
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : May 5, 2026 5:40 PM IST
अस्थमा के केस
Kis Desh Mai Asthma Ke Marij Jyada Hai: देशभर में अस्थमा के कई मरीज हैं, जिनमें से कुछ का इलाज चल रहा है, कुछ को तो पता ही नहीं है कि वह अस्थमा से पीड़ित हैं और कुछ इस बीमारी में चल बसे। अस्थमा आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ने वाली सांस से जुड़ी बीमारी बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में करोड़ों लोग अस्थमा से प्रभावित हैं और यह जन स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज किस देश में अस्थमा के मरीज सबसे ज्यादा हैं और उसके पीछे क्या कारण है?
अधिकतर लोगों का जवाब ‘नहीं’ होगा। इसका जवाब हमें वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू और विश्व स्वास्थ्य संगठन से मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ देशों में प्रति 1 लाख लोगों पर अस्थमा के केस सबसे ज्यादा हैं। इनमें खासतौर पर विकसित देश और कुछ छोटे देश शामिल हैं। आज हम आपको इन दोनों ही स्टडी का अध्ययन करके, सही जानकारी देंगे। हो सकता है आप जिस देश में रह रहे हैं वह भी इस अस्थमा लिस्ट में शामिल हो! आइए हम रिपोर्ट देखते हैं और सही जानकारी लेते हैं।
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के आंकड़ों के मुताबिक कुछ देशों में प्रति 1 लाख लोगों पर अस्थमा के मामले सबसे ज्यादा पाए गए हैं। आइए आपको बताते हैं किस देश में अस्थमा के कितने आंकड़े मिले हैं और टॉप पर कौन से देश हैं।
| देश के नाम | अस्थमा के मामले |
| न्यूजीलैंड | लगभग 14,513 प्रति 100k |
| कोस्टा रिका | लगभग 14,379 प्रति 100k |
| होंडुरास | लगभग 13,599 प्रति 100k |
| ऑस्ट्रेलिया | लगभग 12,486 प्रति 100k |
| कनाडा | लगभग 11,380 प्रति 100k |
अगर आप इन आंकड़ों और देशों पर गौर करेंगे तो साफ देखने को मिलेगा कि कुछ विकसित और कुछ लैटिन अमेरिकी देशों में अस्थमा की दर काफी ज्यादा है।
देखें WHO की रिपोर्ट के मुताबिक अस्थमा होने के पीछे एक ही कारण नहीं होता, बल्कि कई कारक होते हैं जो मिलकर इसके बढ़ने का कारण बनते हैं। जैसे-
शहरीकरण- जहां पॉल्यूशन ज्यादा होता है, लाइफस्टाइल बदल जाता है, इंडोर एलर्जेंस बढ़ जाते हैं। इसलिए विकसित देशों और शहरों आबादी में अस्थमा ज्यादा देखा जाता है।
पॉल्यूशन और पर्यावरणीय फैक्टर- WHO के अनुसार अस्थमा का रिस्क तब बढ़ता है जब लोग एक्सपोजर में आते हैं। जैसे घर के बाहर का पॉल्यूशन, घर के अंदर का प्रदूषण जैसे धूल, धुआं आदि और केमिकल फ्यूम्स। ये सभी चीजें हमारे फेफड़ों को प्रभावित करती हैं और अस्थमा को ट्रिगर करती हैं।
एलर्जी और लाइफस्टाइल- ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2025 के अनुसार अस्थमा कई बार एलर्जिक कंडीशन्स से जुड़ा होता है। जिन देशों में पोलेन एक्सपोजर अधिक होता है या इनडोर एलर्जेन ज्यादा होते हैं, वहां अस्थमा का रिस्क बढ़ जाता है।
हेल्थ फैक्टर्स-WHO की रिपोर्ट यह भी बताती है कि ओवरवेट या ओबेसिटी वाले लोगों में अस्थमा का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा लो बर्थ वेट या इंफेक्शन जैसे अर्ली लाइफ फैक्टर भी रिस्क बढ़ाते हैं।
भारत में अस्थमा की दर कम्पैरेटिवली कम दिखाई जाती है, लेकिन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार लो और मिडिल इनकम वाले देशों में अवेयरनेस कम होती है और डायगनोसिस देर से होता है, इसलिए वास्तविक संख्या ज्यादा हो सकती है।
अगर डेटा के आधार पर देखें, तो न्यूजीलैंड, कोस्टा रिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अस्थमा के मरीज सबसे ज्यादा हैं लेकिन इसके पीछे का कारण पॉल्यूशन न होकर बेहतर हेल्थ केयर, ज्यादा डायग्नोसिस, लाइफस्टाइल फैक्टर जैसी कई वजहें हैं।
डिस्क्लेमर- WHO के अनुसार अस्थमा एक ग्लोबल समस्या है और इसका सही इलाज, जागरूकता और समय पर निदान ही इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है। अगर आपको सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी महसूस होती है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। इसे अनदेखा न करें वरना हालत बिगड़ सकती है।
दुनिया में अस्थमा की सबसे अधिक दर वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूके और अमेरिका प्रमुख हैं।
शहरी इलाकों में अस्थमा (Asthma) के प्रमुख कारणों में उच्च वायु प्रदूषण (वाहनों का धुआं, धूल, निर्माण), कम हरित क्षेत्र, भीड़भाड़ वाले आवास में धूल के कण, फफूंद (mold), और पालतू जानवरों की एलर्जी शामिल हैं।
ग्रामीण इलाकों में अस्थमा (दमा) होने के मुख्य कारण घरेलू प्रदूषण, कृषि गतिविधियाँ, और प्राकृतिक एलर्जी के कारक हैं।
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