बच्चे की तेज सांसें कब बन सकती हैं खतरे की घंटी? जानिए किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए इग्नोर
बच्चों की सांसें बड़ों की तुलना में थोड़ा ज्यादा तेज चलती है। लेकिन अक्सर पेरेंट्स के मन में सवाल उठता है कि आखिर किन स्थितियों में घबराने की जरूरत होती है? आइए इस विषय को समझते हैं-
जन्म के बाद से लेकर कुछ सालों तक बच्चों की सांस सामान्य रूप से अन्य लोगों की तुलना में थोड़ा अधिक तेज लगती है। वहीं, खेलते समय, रोने, बुखार आने या अधिक उत्साहित होने पर सांसों की गति बढ़ना सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर बच्चा आराम की स्थिति में भी लगातार तेजी से सांस ले रहा है, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। नारायणा हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, मुंबई की सीनियर कंसल्टेंट (पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी) डॉ. इंदु खोसला के अनुसार, समय पर लक्षणों की पहचान और इलाज बच्चों को गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।
बच्चों में तेज सांस चलने की वजह क्या हो सकती है?
तेज सांस चलने की स्थिति को मेडिकल भाषा में टैकीप्निया कहा जाता है। यह तब होता है, जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वह इसकी भरपाई के लिए तेजी से सांस लेने लगता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे अस्थमा, ब्रोंकियोलाइटिस, निमोनिया, बार-बार घरघराहट, तेज बुखार, एलर्जी, डिहाइड्रेशन, जन्मजात हृदय रोग या गंभीर संक्रमण। इनमें से कुछ समस्याएं हल्की होती हैं और अपने आप ठीक हो सकती हैं, जबकि कुछ मामलों में तुरंत डॉक्टर की जरूरत पड़ती है।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
अगर बच्चे में तेज सांसों के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-
- आराम करने या सोने के दौरान भी सांसों का तेज बने रहना।
- सांस लेते समय पसलियों या गर्दन के आसपास की त्वचा का अंदर की ओर खिंचना।
- नथुनों का बार-बार फूलना।
- सांस लेते समय घरघराहट, कराहने या असामान्य आवाज आना।
- होंठ, जीभ या उंगलियों का नीला पड़ना।
- सांस फूलने के कारण दूध पीने, खाने, बोलने या रोने में कठिनाई होना।
- तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी।
- बच्चा बहुत सुस्त हो जाना या प्रतिक्रिया कम देना।
डॉ. खोसला बताती हैं कि ये संकेत इस बात का इशारा हो सकते हैं कि बच्चे के शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है।
एक साल से छोटे बच्चों में ज्यादा सावधानी जरूरी
एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं की श्वसन नलियां छोटी होती हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में ब्रोंकियोलाइटिस और निमोनिया जैसे संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकते हैं। यदि शिशु दूध पीते समय तेजी से सांस ले, दूध पीने से मना करे, पेशाब कम आए या बहुत ज्यादा सुस्त या चिड़चिड़ा दिखाई दे, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समय पर इलाज क्यों है जरूरी?
बच्चों में सांस से जुड़ी बीमारियां बहुत तेजी से गंभीर हो सकती हैं। शुरुआती जांच से डॉक्टर बीमारी का कारण पता लगाकर सही इलाज शुरू कर सकते हैं। कई मामलों में केवल दवाओं और घर पर देखभाल से स्थिति संभल जाती है, जबकि गंभीर मामलों में ऑक्सीजन थेरेपी या अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है। इलाज में देरी होने पर श्वसन संकट (Respiratory Distress) और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
इस तरह बच्चों को रखें सुरक्षित
बच्चों को सभी जरूरी टीके समय पर लगवाएं, जिसमें फ्लू वैक्सीन भी शामिल है। नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें, धूम्रपान के धुएं से बच्चों को दूर रखें, संतुलित आहार दें और बीमार लोगों के संपर्क से बचाएं। खासकर मानसून और सर्दियों के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है क्योंकि इस दौरान श्वसन संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं।
Disclaimer : यह लेख डॉक्टर द्वारा दी गई विशेषज्ञ जानकारी और विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों पर आधारित है। यदि बच्चे को लगातार तेज सांस, सांस लेने में कठिनाई या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।