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Medically Verified By: Dr. Ambrish Kumar Garg
vaccination
अलग-अलग राज्यों की सरकारें देश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों की हेल्थ के लिए कई मुफ्त टीकाकरण अभियान और नियमित कैंप चलाती हैं। मेडिकल साइंस की दुनिया में वैक्सीनेशन एक ऐसा तरीका है, जिसने इंसान को कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने में सबसे बड़ी मदद की है।
वैक्सीनेशन का सीधा सा मतलब शरीर के इम्यून सिस्टम यानी बीमारी से लड़ने वाली ताकत को मजबूत बनाना और उसे ट्रेन करना है। भले ही यह हर किसी की सेफ्टी और अच्छी सेहत के लिए होते हैं, लेकिन क्या सभी वैक्सीन हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद है? यह जानने के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. अम्बरीश कुमार गर्ग से बात की। आइए जानते हैं उन्होंने वैक्सीनेशन के बारे में क्या जानकारी दी है।
डॉक्टर गर्ग बताते हैं कि जब कोई वैक्सीन शरीर में लगाई जाती है, तो वह इम्यून सिस्टम को किसी खास वायरस या बैक्टीरिया की पहचान करना सिखाती है। इससे शरीर में एंटीबॉडीज बनती हैं, जो भविष्य में होने वाले असली इंफेक्शन से शरीर का बचाव करती हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि समय के साथ वैक्सीन बनाने की तकनीक में काफी सुधार आया है। वैक्सीन अलग-अलग तरीकों से तैयार की जाती हैं, जिनमें कमजोर किए गए रोगाणु या उनके छोटे हिस्से शामिल होते हैं। इन सब का मुख्य उद्देश्य शरीर को बिना बीमार किए इम्युनिटी देना होता है। बच्चों के जन्म से लेकर बड़ों तक, उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर सही समय पर वैक्सीन लगवाना अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।
वैक्सीनेशन का फायदा सिर्फ एक इंसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे समाज की सेहत को सुरक्षित रखने में मदद करता है। जब किसी जगह के ज्यादातर लोग वैक्सीन लगवा लेते हैं, तो वहां 'हर्ड इम्युनिटी' बन जाती है। इस स्थिति में उन लोगों का भी बचाव हो जाता है जो किसी मेडिकल वजह से वैक्सीन नहीं लगवा सकते- जैसे कि नवजात बच्चे या बहुत ज्यादा बीमार लोग।
अगर हम इतिहास उठाकर देखें तो वैक्सीनेशन की वजह से ही चेचक जैसी खतरनाक बीमारी दुनिया से पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जबकि पोलियो और खसरा जैसी बीमारियों पर बहुत हद तक काबू पा लिया गया है। सही समय पर वैक्सीनेशन कराने से असमय होने वाली बीमारियों, विकलांगता और अस्पताल के भारी खर्च से बचा जा सकता है। एक स्वस्थ समाज बनाने के लिए रेगुलर वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है।
डॉक्टर गर्ग ने बताया कि हेल्थ के नजरिए से वैक्सीन को मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बांटा जा सकता है:
ये वे वैक्सीन हैं जो सरकारी और नेशनल हेल्थ प्रोग्राम का हिस्सा होती हैं। ये उन बीमारियों से बचाती हैं जो बहुत तेजी से फैल सकती हैं और जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। इनमें पोलियो, टीबी (TB), हेपेटाइटिस बी, टिटनेस और खसरा जैसी बीमारियों की वैक्सीन शामिल हैं, जिन्हें हर बच्चे को सही उम्र में देना बेहद जरूरी माना जाता है।
ये वे वैक्सीन हैं जो किसी खास मौसम, जगह, लाइफस्टाइल या पर्सनल रिस्क के हिसाब से लेने की सलाह दी जाती है। ये उन बीमारियों के लिए होती हैं जो हर किसी के लिए तुरंत जानलेवा नहीं होतीं या फिर किसी खास इलाके और उम्र तक ही सीमित होती हैं। उदाहरण के लिए, सीजनल फ्लू, चिकनपॉक्स या ट्रेवल से जुड़ी खास वैक्सीन इस कैटेगरी में आती हैं। इन्हें लगवाना या न लगवाना इंसान की अपनी सेहत और जरूरत पर निर्भर करता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की राय पर आधारित है, लेकिन यह किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सीय सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या, नई वैक्सीन लगवाने या मौजूदा टीकाकरण को टालने से पहले हमेशा डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।