शरीर में दर्द होने पर फिजियोथेरेपी कब कराई जाती है? जानें किन स्थितियों में डॉक्टर देते हैं इसकी सलाह
शरीर के दर्द को कम करने के लिए फिजियोथेरेपी करवाई जाती है। लेकिन, क्या सभी मामलों में फिजियोथेरेपी करवाना जरूरी होता है?
बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधि की कमी आदि कारणों की वजह से शरीर में दर्द की समस्या बेहद आम होती जा रही है। आजकर हर दूसरा व्यक्ति शरीर में दर्द की शिकायत करता है। कई लोग पीठ दर्द, तो कई लोग गर्दन दर्द, घुटनों में दर्द या मांसपेशियों में जकड़न की शिकायत करते हैं। ऐसे में दर्द से राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग दवाइयों का सहारा लेते हैं। लेकिन, कुछ मामलों में डॉक्टर फिजियोथेरेपी को भी दर्द से राहत पाने का एक प्रभावी तरीका मानते हैं। फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों के अनुसार, यह शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों और नसों के कार्य को बेहतर बनाता है। लेकिन, सभी तरह के दर्द को ठीक करने के लिए फिजियोथेरेपी नहीं करवाई जाती है। आइए, एशियन हॉस्पिटल के हेड ऑफ डिपोर्टमेंट-फिजियोथेरेपी डॉ. अमित पांडे (Dr. Amit Pandey, Head of Department - Physiotherapy, Asian Hospital) से जानते हैं कि किसी व्यक्ति को फिजियोथेरेपी की जरूरत कब पड़ती है?
कब पड़ती है फिजियोथेरेपी की जरूरत?
कई बार दर्द होने पर डॉक्टर फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह देते हैं। लेकिन, क्या हर दर्द को ठीक करने के लिए फिजियोथेरेपी करवाई जाती है? जानें, कब पड़ती है फिजियोथेरेपी की जरूरत-
1. लंबे समय से चल रहा पीठ या गर्दन दर्द
अगर पीठ या गर्दन में कई दिनों या हफ्तों से दर्द बना हुआ है, दवाइयों के बाद भी दर्द में आराम नहीं मिल रहा है, तो इस स्थिति में फिजियोथेरेपी की सलाह दी जाती है। फिजियोथेरेपी की मदद से मांसपेशियों की जकड़न कम होती है। इससे रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट मिलता है और दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।
2. चोट या सर्जरी के बाद रिकवरी
कोई चोट या सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी के बाद डॉक्टर फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह दे सकते हैं। किसी दुर्घटना, स्पोर्ट्स इंजरी या सर्जरी के बाद शरीर की मूवमेंट वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपी करवाई जा सकती है। इससे मांसपेशियां फिर से एक्टिव होती हैं और उनकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे पहले की तरह होने लगती है।
3. जोड़ों में दर्द
जब किसी व्यक्ति को जोड़ों में दर्द रहता हैं, तो इससे राहत पाने के लिए फिजियोथेरेपी करवाई जा सकती है। घुटनों और कंधों के दर्द से राहतपाने के लिए भी डॉक्टर फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह दे सकते हैं। इससे जोड़ों की लचक बढ़ती है और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। कुछ दिनों तक रोजाना फिजियोथेरेपी करवाने से दर्द कम हो सकता है।
4. मांसपेशियों में जकड़न
कई बार सुबह उठने के बाद जकड़न महसूस होने लगती है, इस स्थिति में डॉक्टर फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, कई बार लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या गलत पोस्चर के कारण मांसपेशियों में जकड़न और कमजोरी आ जाती है। फिजियोथेरेपी से मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
5. स्पोर्ट्स इंजरी
खिलाड़ियों में अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट इंजरी या जोड़ों की चोट देखने को मिलती है। ऐसी स्थितियों में फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह दी जाती है।
फिजियोथेरेपी के फायदे
फिजियोथेरेपी सिर्फ दर्द कम करने तक सीमित नहीं है। इसके कई अन्य फायदे भी हैं-
- फिजियोथेरेपी करने से मूवमेंट में सुधार होता है।
- इससे बॉडी फ्लैक्सिबल बनती है।
- फिजियोथेरेपी करने से मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
- चोट के बाद तेजी से रिकवरी में मदद मिलती है।
Highlights:
- मांसपेशियों की अकड़न कम करने के लिए फिजियोथेरेपी करवाने की सलाह दी जाती है।
- फिजियोथेरेपी करने से बॉडी फ्लैक्सिबल बनती है।
- स्पोर्ट्स इंजरी से रिकवरी के लिए भी फिजियोथेरेपी करवाई जाती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।