
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr. Bhanu Mishra
Genetic Diseases:जेनेटिक वह बीमारी होती है, जो किसी भी व्यक्ति को अपने माता-पिता से विरास में मिलती है। इसके अलावा, जेनेटिक बीमारी जीन्स में हुए अचानक किसी बदलाव की वजह से भी हो सकती है। आपको बता दें कि हर इंसान में लगभग 20 हजार से ज्यादा जीन्स होते हैं। हर जीन का अलग-अलग काम होता है, कोई प्रोटीन बनाता है तो कोई शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रित करता है। जब जीन्स में किसी तरह की कोई गड़बड़ी होती है, तो इसकी वजह से कई गंभीर बीमारियां होने लगती हैं। थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया सबसे आम जेनेटिक रोग हैं, जो बच्चों को माता-पिता से जीन्स के जरिए मिलते हैं। आइए, बीएलके मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली के फिजिशियन डॉ. भानु मिश्रा से जानते हैं कि कोई बीमारी जेनेटिक कब बनती हैं और इसके बारे में विस्तार से-
कोई बीमारी जेनेटिक तब बनती है, जब वह जीन्स के माध्यम से विरासत में मिली हो। या जीन्स में म्यूटेशन के कारण उत्पन्न हुई हो। ऐसा 2 तरह से हो सकता है। इसमें शामिल हैं-
आपको बता दें कि हमारे जीन्स डीएनए 4 रसायनों से बने होते हैं। इसमें एडेनिन, थाइमिन, साइटोसिन और गुआनिन शामिल हैं। अगर इस क्रम में कोई बदलाव होता है, तो इसे म्यूटेशन कहा जाता है।
जेनेटिक टेस्टिंग एक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति के DNA की जांच करके यह पता लगाया जाता है कि उसमें जेनेटिक म्यूटेशन है या नहीं। जेनेटिक टेस्टिंग में पता लगाया जाता है कि व्यक्ति के जीन, क्रोमोसोम या डीएनए में कोई असामान्यता या गड़बड़ी तो नहीं है। इस टेस्ट के माध्यम से पता चलता है कि किसी व्यक्ति को कोई जेनेटिक बीमारी है या नहीं। या फिर भविष्य में उसे जेनेटिक बीमारी होने का खतरा है या नहीं।
जेनेटिक टेस्टिंग कई प्रकार के होते हैं। जानें, इनके बारे में-
डायग्नोस्टिक टेस्ट करवाने से जेनेटिक बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। इन टेस्ट में उन बीमारियों के लक्षणों का पता लग जाता है, जो अनुवांशिक कारणों से हो सकती हैं। इस टेस्ट में उत्परिवर्तित जीन या जीन में होने वाले बदलावों के बारे में जानकारी मिलती है।
कैरियर स्क्रीनिंग के माध्यम से भी कई जेनेटिक बीमारियों का पता चल जाता है। इस टेस्ट की मदद से सिकल सेल एनीमिया और सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी बीमारियों का पता लगाया जाता है। अगर किसी परिवार में हर पीढ़ी के लोगों में कोई अनुवांशिक बीमारी का इतिहास रहा है, तो इस टेस्ट में इसका पता लग सकता है।
इस टेस्ट के माध्यम से जन्म से पहले भ्रूण के जीन या गुणसूत्रों में परिवर्तन के बारे में जानकारी मिलती है। यह जांच गर्भवास्था के दौरान की जाती है।
हर तरह की जेनेटिक बीमारियों से बचाव संभव नहीं है। लेकिन, अगर आप कुछ उपायों को आजमाएंगे, तो इससे जेनेटिक बीमारियों से बचा जा सकता है।
Disclaimer:प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
नहीं, जेनेटिक बीमारियों से पूरी तरह बचाव नहीं किया जा सकता है। लेकिन, स्क्रीनिंग और जांच की मदद से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
जी हां, कुछ जेनेटिक बीमारियां का इलाज संभव है। वहीं, कुछ जेनेटिक बीमारियां लाइलाज हैं।
जेनेटिक टेस्टिंग एक मेडिकल जांच है। इससे पता चलता है कि किसी व्यक्ति के जीन में कोई दोष या म्यूटेशन है या नहीं। अगर परिवार में किसी को जेनेटिक बीमारी है, तो उन्हें समय-समय पर जांच जरूर करवानी चाहिए।
नहीं, कुछ बीमारियां माता-पिता से विरासत में मिलती हैं। इसके अलावा, कुछ बीमारियां दादा-दादी या नाना-नानी से भी मिल सकती है। कुछ म्यूटेशन बाद में भी हो सकते हैं, जिसकी वजह से बीमारियां हो सकती हैं।