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कोई बीमारी जेनेटिक कब बनती है? डॉक्टर से जानें कैसे होता है जीन्स में बदलाव

Genetic Diseases: जो बीमारियां माता-पिता या दादा-दादी से विरासत में मिलती हैं, उन्हें ही जेनेटिक बीमारियां कहा जाता है। जानें इसके बारे में विस्तार से-

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Written By: Anju Rawat | Published : July 21, 2025 12:31 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Bhanu Mishra

Genetic Diseases:जेनेटिक वह बीमारी होती है, जो किसी भी व्यक्ति को अपने माता-पिता से विरास में मिलती है। इसके अलावा, जेनेटिक बीमारी जीन्स में हुए अचानक किसी बदलाव की वजह से भी हो सकती है। आपको बता दें कि हर इंसान में लगभग 20 हजार से ज्यादा जीन्स होते हैं। हर जीन का अलग-अलग काम होता है, कोई प्रोटीन बनाता है तो कोई शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रित करता है। जब जीन्स में किसी तरह की कोई गड़बड़ी होती है, तो इसकी वजह से कई गंभीर बीमारियां होने लगती हैं। थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया सबसे आम जेनेटिक रोग हैं, जो बच्चों को माता-पिता से जीन्स के जरिए मिलते हैं। आइए, बीएलके मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली के फिजिशियन डॉ. भानु मिश्रा से जानते हैं कि कोई बीमारी जेनेटिक कब बनती हैं और इसके बारे में विस्तार से-

कोई बीमारी जेनेटिक कब बनती है?

कोई बीमारी जेनेटिक तब बनती है, जब वह जीन्स के माध्यम से विरासत में मिली हो। या जीन्स में म्यूटेशन के कारण उत्पन्न हुई हो। ऐसा 2 तरह से हो सकता है। इसमें शामिल हैं-

  1. इनहेरिटेड म्यूटेशन (Inherited Mutation): जब कोई जीन माता-पिता से संतान में आता है, तो यह बीमारी बच्चों को जन्म के साथ आ जाती है।
  2. एक्वायर्ड म्यूटेशन (Acquired Mutation): कभी-कभी जीवन के किसी भी पड़ाव पर जीन्स में बदलाव हो जाते हैं। प्रदूषण, रेडिएशन, तंबाकू और कई अन्य हानिकारक तत्वों के संपर्क में आने से कई बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।

जीन्स में बदलाव कैसे होता है?

आपको बता दें कि हमारे जीन्स डीएनए 4 रसायनों से बने होते हैं। इसमें एडेनिन, थाइमिन, साइटोसिन और गुआनिन शामिल हैं। अगर इस क्रम में कोई बदलाव होता है, तो इसे म्यूटेशन कहा जाता है।

म्यूटेशन के कितने प्रकार होते हैं?

  • पॉइंट म्यूटेशन
  • डिलीशन
  • डुप्लिकेशन
  • इनवर्जन/ट्रांसलोकेशन

कौन-कौन सी बीमारी जेनेटिक होती हैं?

  • कैंसर (स्तन, प्रोस्टेट, कोलन)
  • डायबिटीज टाइप-2
  • हृदय रोग (हार्ट अटैक, कार्डियोमायोपैथी)
  • अल्जाइमर और डिमेंशिया
  • ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर
  • पार्किंसन डिजीज
  • थैलेसीमिया
  • सिकल सेल एनीमिया
  • हंटिंगटन डिजीज
  • ब्रैका म्यूटेशन से जुड़ा स्तन या ओवरी कैंसर
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस
  • मस्कुलर डिस्ट्रॉफी

जेनेटिक टेस्टिंग क्या है?

जेनेटिक टेस्टिंग एक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति के DNA की जांच करके यह पता लगाया जाता है कि उसमें जेनेटिक म्यूटेशन है या नहीं। जेनेटिक टेस्टिंग में पता लगाया जाता है कि व्यक्ति के जीन, क्रोमोसोम या डीएनए में कोई असामान्यता या गड़बड़ी तो नहीं है। इस टेस्ट के माध्यम से पता चलता है कि किसी व्यक्ति को कोई जेनेटिक बीमारी है या नहीं। या फिर भविष्य में उसे जेनेटिक बीमारी होने का खतरा है या नहीं।

जेनेटिक टेस्टिंग कब करवानी चाहिए?

  • अगर परिवार में जेनेटिक बीमारी का इतिहास रहा हो, तो इस स्थिति में जेनेटिक टेस्टिंग करवाना चाहिए।
  • शादी से पहले थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों की जांच के लिए जेनेटिक टेस्टिंग जरूर करवानी चाहिए।
  • कैंसर रोगों के जोखिम को जानने के लिए भी आप जेनेटिक टेस्टिंग करवा सकते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की अनुवांशिक स्थिति जांचने के लिए जेनेटिक टेस्टिंग जरूर करवानी चाहिए।

जेनेटिक टेस्टिंग के प्रकार- Genetic Testing Types in Hindi

जेनेटिक टेस्टिंग कई प्रकार के होते हैं। जानें, इनके बारे में-

डायग्नोस्टिक टेस्ट

डायग्नोस्टिक टेस्ट करवाने से जेनेटिक बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। इन टेस्ट में उन बीमारियों के लक्षणों का पता लग जाता है, जो अनुवांशिक कारणों से हो सकती हैं। इस टेस्ट में उत्परिवर्तित जीन या जीन में होने वाले बदलावों के बारे में जानकारी मिलती है।

कैरियर स्क्रीनिंग

कैरियर स्क्रीनिंग के माध्यम से भी कई जेनेटिक बीमारियों का पता चल जाता है। इस टेस्ट की मदद से सिकल सेल एनीमिया और सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी बीमारियों का पता लगाया जाता है। अगर किसी परिवार में हर पीढ़ी के लोगों में कोई अनुवांशिक बीमारी का इतिहास रहा है, तो इस टेस्ट में इसका पता लग सकता है।

प्रीनेटल स्क्रीनिंग

इस टेस्ट के माध्यम से जन्म से पहले भ्रूण के जीन या गुणसूत्रों में परिवर्तन के बारे में जानकारी मिलती है। यह जांच गर्भवास्था के दौरान की जाती है।

क्या जेनेटिक बीमारियों से बचा जा सकता है?

हर तरह की जेनेटिक बीमारियों से बचाव संभव नहीं है। लेकिन, अगर आप कुछ उपायों को आजमाएंगे, तो इससे जेनेटिक बीमारियों से बचा जा सकता है।

  • अगर आपके परिवार में किसी को जेनेटिक बीमारी का इतिहास रहा है, तो काउंसल की सलाह जरूर लें।
  • जेनेटिक बीमारियों से बचाने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में सुधार करना चाहिए। बैलेंस डाइट लेना भी फायदेमंद होता है।
  • आपको नियमित योग और एक्सरसाइज की मदद से भी जेनेटिक बीमारियों से बच सकते हैं।
  • जेनेटिक बीमारियों से बचाव के लिए बच्चों के जन्म के तुरंत बाद जांच करवानी चाहिए।
  • प्रीनेटल टेस्टिंग से कई बीमारियों का पता डिलीवरी से पहले ही लगाया जा सकता है।

Disclaimer:प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

क्या जेनेटिक बीमारी से बचाव किया जा सकता है?

नहीं, जेनेटिक बीमारियों से पूरी तरह बचाव नहीं किया जा सकता है। लेकिन, स्क्रीनिंग और जांच की मदद से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।

क्या जेनेटिक बीमारी का इलाज संभव है?

जी हां, कुछ जेनेटिक बीमारियां का इलाज संभव है। वहीं, कुछ जेनेटिक बीमारियां लाइलाज हैं।

जेनेटिक टेस्ट क्या होता है और कब करवाना चाहिए?

जेनेटिक टेस्टिंग एक मेडिकल जांच है। इससे पता चलता है कि किसी व्यक्ति के जीन में कोई दोष या म्यूटेशन है या नहीं। अगर परिवार में किसी को जेनेटिक बीमारी है, तो उन्हें समय-समय पर जांच जरूर करवानी चाहिए।

क्या हर जेनेटिक बीमारी माता-पिता से ही आती है?

नहीं, कुछ बीमारियां माता-पिता से विरासत में मिलती हैं। इसके अलावा, कुछ बीमारियां दादा-दादी या नाना-नानी से भी मिल सकती है। कुछ म्यूटेशन बाद में भी हो सकते हैं, जिसकी वजह से बीमारियां हो सकती हैं।