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क्या आप ब्रोंकाइटिस (bronchitis) की दिक्कत है? अगर हां, तो आपको इस बात के लिए जागरूक होना चाहिए कि ये कब निमोनिया में बदल सकता है। जी हां, ब्रोंकाइटिस का अगर लंबे समय के लिए इलाज ना किया जाए तो यह निमोनिया का रूप ले सकता है। पर इन दोनों को समझने के लिए आपको यह समझना होगा कि इनके बीच का फर्क क्या है। इसी बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Plmonologist Dr. Rama Mehta, Udhyan Health Care, Lucknow से बात की।
ब्रोंकाइटिस (bronchitis) को आप ऊपरी श्वशन तंत्र का इंफेक्शन समझ सकते हैं। यानी कि फेफड़ों से ऊपर नाक तक। इसमें मुंह और नाक से लेकर फेफड़ों के बीच हवा की गति सही नहीं होती और ये ब्लॉक्ड महसूस होता है। होता यह है कि ब्रोंकाइटिस में वायरस या किसी बैक्टीरिया के कारण ब्रोंकाइल ट्यूब्स (bronchial tubes), जिसके जरिए हवा फेफड़ो तक पहुंचती है उसमें सूजन आ जाती है और जलन होने लगती है। इंफेक्शन के कारण ये ट्यूब्स सूज जाती हैं और बलगम से भर जाती हैं, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा आपको कुछ ब्रोंकाइटिस के लक्षण (bronchitis symptoms) महसूस हो सकते हैं जैसे खांसी, बलगम, घरघराहट, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और हल्का बुखार।
निमोनिया एक वायरल इंफेक्शन है जो आपके एक या दोनों फेफड़ों में हो सकता है। हालांकि, निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के कारण हो सकता है, लेकिन आमतौर पर माना जाता है कि ये बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण ज्यादा हो सकता है। निमोनिया के कारण आपके फेफड़ों में हवा की थैली में पस भर जाता है। इससे आपको महसूस हो सकता है कि आपकी सांस रूक गई है। साथ ही इस दौरान लक्षणों में खांसी, बुखार, ठंड लगना और सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है। आमतौर पर लोगों को सबसे ज्यादा बैक्टीरियल निमोनिया (bacterial Pneumonia) होता है। इसमें एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज किया जाता है।
अगर समय रहते इलाज न कराया जाए तो ब्रोंकाइटिस के कारण निमोनिया भी हो सकता है। ब्रोंकाइटिस श्वसन मार्गों होने वाला एक संक्रमण है और निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। ऐसे में अगर ब्रोंकाइटिस का इलाज समय रहते न किया जाए तो इसका संक्रमण फेफड़ों तक फैल सकता है और इस कारण निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है। तो, ब्रोंकाइटिस के लक्षणों या शुरुआती दिनों में ही इसका इलाज करवा लें और निमोनिया से बचें।