प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड कब करवाना चाहिए और क्यों करवाना जरूरी होता है?
प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड कब करवाना चाहिए और क्यों करवाना जरूरी होता है?
Pregnancy me Pehla Ultrasound kab karna chaiye: डॉ. रश्मि आनंद के अनुसार, आमतौर पर प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड 6 से 8 हफ्ते के बीच कराने की सलाह दी जाती है। ये प्रेग्नेंसी का वो समय होता है, जब गर्भ थैली (Gestational Sac) साफ दिखाई देने लगती है।
Written By: Ashu Kumar Das | Published : February 4, 2026 5:25 PM IST
When do you need your first ultrasound when pregnant : आज के समय में गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान सही देखभाल मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी होती है। जब कोई महिला पहली बार मां बनने वाली होती है, तो उसके मन में कई सवाल आते हैं। इन्हीं सवालों में सबसे पहला और महत्वपूर्ण सवाल होता है- प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड कब करवाना चाहिए और क्यों करवाना जरूरी होता है?
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में डॉ. रश्मि आनंद बताती हैं कि अल्ट्रासाउंड एक मेडिकल जांच है जिसमें हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें बनाई जाती हैं। प्रेग्नेंसी में इसका उपयोग गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति देखने के लिए किया जाता है।यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित, दर्द रहित और बिना किसी रेडिएशन के होती है। होने वाली मां और गर्भ में पलना शिशु दोनों स्वस्थ हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड बहुत जरूरी हो जाता है।
प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड कब करवाना चाहिए?
डॉ. रश्मि आनंद के अनुसार, आमतौर पर प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड 6 से 8 हफ्ते के बीच कराने की सलाह दी जाती है। ये प्रेग्नेंसी का वो समय होता है, जब गर्भ थैली (Gestational Sac) साफ दिखाई देने लगती है। पहले अल्ट्रासाउंड में डॉक्टर इस बात का पता लगाने की कोशिश करते हैं कि गर्भ में पलने वाले बच्चे की हार्ट बीट सही तरीके से आ रही है या नहीं। पहले अल्ट्रासाउंड के बाद किसी भी असामान्य स्थिति का पता लग सकता है। प्रेग्नेंसी में अगर महिला को ब्लीडिंग, तेज दर्द या कोई समस्या हो, तो डॉक्टर 6 से 8 सप्ताह से पहले भी अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दे सकते हैं।
प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी होता है?
डॉ. रश्मि का कहना है कि प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड हर महिला और गर्भ में पलने वाले शिशु के स्वास्थ्य का पता लगाने के लिए जरूरी होता है।
प्रेग्नेंसी कंफर्म करने के लिए- कई बार प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव होने के बावजूद गर्भ सही जगह नहीं ठहरता। पहले अल्ट्रासाउंड से यह कन्फर्म किया जाता है कि बच्चा गर्भाशय में ही है।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की जांच- स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि अगर भ्रूण गर्भाशय के बाहर (जैसे फैलोपियन ट्यूब में) ठहर जाए, तो इसे एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं, जो जानलेवा हो सकती है। पहला अल्ट्रासाउंड इसे पहचानने में मदद करता है।
दिल की धड़कन- प्रेग्नेंसी के 6 से 7वें सप्ताह में गर्भ के शिशु की दिल की धड़कन का पता चलने लगता है। बच्चे के दिल की धड़कन सही या नहीं। इसका पता लगाने के लिए भी प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड बहुत जरूरी होता है।
प्रेग्नेंसी की उम्र जानने के लिए- अल्ट्रासाउंड से गर्भ की सही उम्र (Gestational Age) पता चलती है, जिससे डिलीवरी की संभावित तारीख (EDD) तय होती है।
जुड़वां बच्चों की पहचान- कुछ महिलाओं के गर्भ में 1 से ज्यादा बच्चे ठहर जाते हैं। पहले अल्ट्रासाउंड से गर्भ के अंदर जुड़वा या तिड़वा बच्चे हैं, इसकी भी पहचान हो जाती है भी की जाती है।
10 में से 9 महिलाएं पहले अल्ट्रासाउंड को लेकर घबरा जाती हैं। लेकिन असल में ये बहुत ही आसान से किए जाने वाला मेडिकल प्रोसेस होता है।
अल्ट्रासाउंड के लिए महिला को सबसे पहले बेड पर लिटाया जाता है।
पेट पर जेल लगाया जाता है (एब्डोमिनल में)
मशीन से महिला के पेट को स्कैन किया जाता है
इसके बाद स्क्रीन पर बच्चे की तस्वीर दिखती है।
सबसे आखिर में महिला को रिपोर्ट मिल जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया को करने में डॉक्टर को सिर्फ 10 से 15 मिनट का समय लगता है। इस दौरान मानसिक रूप से महिला को बिल्कुल भी डरना या घबराना नहीं चाहिए।
प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड करवाते वक्त सावधानी
Highlights
प्रेग्नेंसी के 6 से 7वें सप्ताह में पहला अल्ट्रासाउंड होता है।
अल्ट्रासाउंड से प्रेग्नेंसी की परेशानियों का पता चलता है।
कुछ मामलों में 6 सप्ताह से पहले भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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