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Medically Verified By: Dr. Amit Miglani
Liver Damage: लिवर शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलने, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन में मदद करता है। यह प्रोटीन बनाने का काम भी करता है। लिवर की सेहत, संपूर्ण शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होता है। आज की बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान और कुछ बीमारियों की वजह से लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोगों को लगता है कि जब लिवर से जुड़ी बीमारियां होती है, तो लिवर खराब हो जाता है और फिर यह काम नहीं कर पाता है। क्या वाकई ऐसा होता है? तो आइए, एशियन हॉस्पिटल के डायरेक्टर एंड एचओडी गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. अमित मिगलानी (Dr Amit Miglani, Director & HOD- Gastroenterology, Asian Hospital) से जानते हैं लिवर कब और कैसे खराब होता है? लिवर कितने चरणों में खराब होता है? लिवर खराब होने के लक्षण क्या हैं?
लिवर मानव शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, डिटॉक्सिफिकेशन और पाचन के कार्य में अहम भूमिका निभाता है। यह पेट के दाहिने हिस्से में डायफ्राम के नीचे स्थित होता है। आपको बता दें कि लिवर में लाखों छोटी-छोटी कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें हेपेटोसाइट्स कहा जाता है। ये कोशिकाएं लिवर के मुख्य कार्यों को संचालित करती हैं।
लिवर का सबसे प्रमुख काम डिटॉक्सिफिकेशन होता है। जब हम खाना खाते हैं या दवाइयां लेते हैं, तो उनमें मौजूद कई केमिकल्स और टॉक्सिन्स खून के जरिए लिवर तक पहुंचते हैं। लिवर, इन हानिकारक पदार्थों को एंजाइम्स की मदद से तोड़ता है और शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
लिवर, पाचन प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाता है। यह बाइल (Bile) नामक तरल पदार्थ बनाता है, जो पित्ताशय में जमा रहता है। बाइल फैट को छोटे-छोटे कणों में तोड़ने में मदद करता है। इससे शरीर उन्हें आसानी से पचा और अवशोषित कर पाता है।
लिवर, शरीर में ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करता है। जब शरीर में ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा होती है, तो लिवर उसे ग्लाइकोजन के रूप में स्टोर कर लेता है। फिर जरूरत पड़ने पर यही ग्लाइकोजन, ग्लूकोज में बदलकर शरीर को ऊर्जा देता है।
लिवर, कई जरूरी प्रोटीन और कोलेस्ट्रॉल बनाता है। यह एल्ब्यूमिन और खून के थक्के बनाने वाले प्रोटीन का निर्माण करते हैं। यह विटामिन A, D, E, K और आयरन जैसे पोषक तत्वों को स्टोर करने का काम भी करता है।
लिवर शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है और यह पेट के दाहिने हिस्से में स्थित होता है। यह दवाइयों और केमिकल्स को प्रोसेस करता है। जब किसी कारण से लिवर की कोशिकाएं लगातार क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, तो धीरे-धीरे यह खराब होने लगता है और इसकी कार्यक्षमता कम होने लगती है।
लिवर खराब होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। इनमें शामिल हैं-
शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से लिवर खराब हो सकता है। दरअसल, शराब में एथेनॉल (Ethanol) होता है, जो लिवर में जाकर टूटता है। इस प्रक्रिया में एसीटैल्डिहाइड नामक जहरीला पदार्थ बनता है, जो लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। यानी शराब पीने से लिवर की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। इससे लिवर में फैट जमा होने लगता है, इसी स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है। जब शराब पीने से लंबे समय तक फैटी लिवर की समस्या रहती है, तो इससे लिवर में सूजन आ जाती है और फिर लिवर की कोशिकाएं खराब होकर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का कारण बनती हैं। इस स्थिति में लिवर शरीर से विषैले पदार्थों को नहीं निकाल पाता है और हेपेटाइटिस रोग भी विकसित हो जाता है।
गलत दवाइयों का लंबे समय तक सेवन करने से भी लिवर खराब हो सकता है। दरअसल, कुछ दवाइयों के केमिकल्स लिवर में जाकर टूटते (metabolize) हैं। जब ज्यादा मात्रा में दवाइयों का सेवन किया जाता है, तो लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ता है। दवाइयों का ज्यादा सेवन करने से कोशिकाएं डैमेज भी हो सकती हैं। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह स्थिति लिवर फेलियर तक का कारण बन सकती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन बिल्कुल न करें। कई दवाइयां लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं और इसे नुकसान पहुंचाती हैं।
जंक और प्रोसेस्ड फूड्स सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। इनका ज्यादा सेवन करने से लिवर से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं और लिवर डैमेज हो सकता है। आपको बता दें कि जंक और प्रोसेस्ड फूड में ज्यादा शुगर, ट्रांस फैट और रिफाइंड कार्ब्स होते हैं। ये शरीर में जाकर फैट मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ते हैं। इससे लिवर में फैट जमा होने लगता है। साथ ही, इंसुलिन रेजिस्टेंस, सूजन (inflammation) और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने लगता है, जो भविष्य में फैटी लिवर और लिवर डैमेज का कारण बन सकता है। इसलिए लिवर को स्वस्थ रखने के लिए इनका सेवन करने से बचन चाहिए
जो लोग लंबे समय तक तनाव में रहते हैं, उनमें लिवर खराब होने का जोखिम ज्यादा बना रहता है। तनाव और चिंता में रहने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ जाता है। जब लंबे समय तक कॉर्टिसोल ज्यादा बना रहता है, तो मेटाबॉलिज्म और फैट स्टोरेज प्रभावित होता है और लिवर में फैट जमा हो जाता है। इससे सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो धीरे-धीरे लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इस तरह से तनाव में रहने से लिवर खराब हो सकता है।
फिजिकली एक्टिव न रहने से शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे शरीर में फैट और ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और अतिरिक्त फैट लिवर में जमा होने लगता है। यह स्थिति इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर का कारण बन सकती है, जो आगे चलकर लिवर को नुकसान पहुंचाती है। अगर समय पर फैटी लिवर का इलाज न किया जाए, तो लिवर खराब हो सकता है।
आजकल बिना शराब पिए भी कई लोगों में फैटी लिवर की समस्या देखने को मिल रही है। इसे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। यह समस्या मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और खराब लाइफस्टाइल के कारण होती है। आपको बता दें कि हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी जैसे वायरस, लिवर में संक्रमण पैदा करते हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह लिवर डैमेज और सिरोसिस का कारण बन सकते हैं।
लिवर खराब होने के शुरुआत में लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं दिखाई देते हैं। लेकिन, कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसमें शामिल हैं-
इन लक्षणों के दिखने पर तुरंत लिवर की जांच करवानी चाहिए।

लिवर की बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है। आमतौर पर 4 चरणों में लिवर खराब होता है।
यह लिवर खराब होने का शुरुआती चरण होता है। इसमें लिवर की कोशिकाओं में फैटजमा हो जाता है। अगर इस स्टेज पर जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए, तो लिवर को फिर से सामान्य किया जा सकता है।
फैटी लिवर के बाद, हेपेटाइटिस का स्टेज आता है। इस स्थिति में लिवर में गंभीर सूजन हो जाती है। यह सूजन शराब, वायरस, मोटापा या दवाइयों के कारण हो सकती है। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति लिवर को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।
इस चरण में लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं की जगह स्कार टिश्यू बनने लगते हैं। इससे लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। खून का प्रवाह भी प्रभावित हो जाता है।
यह लिवर बीमारी का सबसे गंभीर चरण होता है। इसमें लिवर का बड़ा हिस्सा स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है और लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता। इस स्थिति में ज्यादातर मामलों में लिवर खराब हो जाता है और लिवर ट्रांसप्लांट की जरूर पड़ जाती है।
लिवर से जुड़ी समस्याएं होने पर आपको डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। इन संकेतों को न करें नजरअंदाज-
ये संकेत नजर आने पर डॉक्टर से मिलें। इन स्थिति में डॉक्टर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), अल्ट्रासाउंड और कुछ अन्य जांचों के जरिए लिवर की स्थिति का पता लगाते हैं।
लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसकी सेहत पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में लिवर से जुड़ी बीमारियों का इलाज सिर्फ खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करके किया जा सकता है। लेकिन, जब स्थिति बिगड़ जाती है तो दवाइयों से ही इसका इलाज संभव है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।