
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : January 23, 2026 10:49 AM IST
Mouth breathing
Mouth breathing problem : सांस लेना व्यक्ति के जिंदा रहने की एक नेचुरल प्रक्रिया है। सांस वैसे तो नाक से ही ली जाती है, लेकिन कुछ लोग मुंह से भी सांस लेने लगते हैं। ऐसा अक्सर तभी होता है, जब व्यक्ति को जुकाम हो जाता है और नाक बंद हो जाती है। ऐसे में नाक से सांस लेने के बजाय मुंह से सांस लेनी पड़ जाती है। लेकिन ऐसा करना बहुत नुकसानदायक होता है। डॉक्टर्स का कहना है कि मुंह से सांस लेने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यहां हम इसी बारे में बात करने जा रहे हैं।
जिन लोगों को नाक से सांस लेने में दिक्कत होती है और वे मुंह से सांस लेते हैं, तो इससे उनमें टॉन्सिल बढ़ जाते हैं, जिससे खर्राटे आते हैं और इससे नींद खराब होती है।
मुंह से सांस लेने की वजह से मुंह के मसूड़ों और टिशूज़ सूख जाते हैं, जिससे मुंह में बैक्टीरिया का सामान्य संतुलन बिगड़ जाता है और मसूड़ों की बीमारी व दांतों में सड़न की समस्या हो जाती है।
मुंह से सांस लेने पर फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। ऐसे में खून में भी ऑक्सीजन अच्छे से नहीं पहुंच पाती है। इससे फेफड़ों के काम पर असर पड़ता है, और अस्थमा वाले लोगों के लिए यह और भी खराब स्थिति हो जाता है।
नाक में मौजूद छोटे बाल कीटाणुओं को फिल्टर करती हैं लेकिन मुंह से सांस लेने से यह सुरक्षा काम नहीं करती, जिससे बैक्टीरिया गले तक पहुंच जाते हैं और सर्दी, साइनस इन्फेक्शन, फीवर और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।
नाक की बजाय मुंह से सांस लेने की वजह से रात में मुंह और गले के टिशूज़ सूख जाते हैं, जिससे सुबह गले में लगातार सूखापन और खराश रहती है।
मुंह से सांस लेना अंदरूनी हेल्थ इश्यूज का नतीजा हो सकता है। ऐसे में जांच करवानी जरूरी होती है। हालांकि, सर्दी या नाक बंद होने पर मुंह से सांस लेना सामान्य है, लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है जिसके लिए मेडिकल ध्यान देने की ज़रूरत है।
डॉक्टर्स का कहना है कि मुंह से सांस लेने की समस्या से बचने के लिए डायाफ्राम ब्रीदिंग का अभ्यास करना चाहिए। इससे सांस लेने के लिए मांसपेशियों को एक्टिव किया जा सकता है। इसके अलावा, स्लीप एपनिया या पुरानी नींद की समस्या से परेशान लोगों को सपोर्टिव तकिए का इस्तेमाल करना चाहिए।