
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : August 25, 2025 8:19 AM IST
Peshab Mai Jhag: कई बार आपने गौर किया होगा कि बच्चा जब पेशाब करता है तो कभी-कभी उसमें झाग पैदा हो जाता है। कुछ माता-पिता इसे नजरअंदाज कर देते हैं तो कुछ बच्चे इसे अनदेखा कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं पेशाब में झाग क्यों आता है? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी कंसल्टेंट डॉक्टर निशा कृष्णमूर्ति से बात की। उन्होंने इस समस्या को एक सिंड्रोम बताया है।
डॉक्टर ने बताया कि पेशाब में झाग आना नेफ्रोटिक सिंड्रोम कहलाता है। नेफ्रोटिक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जो आमतौर पर बच्चों में देखी जाती है। माता-पिता अक्सर शिकायत करते हैं कि उनके बच्चे का मूत्र बहुत झागदार दिखता है। इसके साथ ही बच्चे की पलकों, पैरों पर सूजन हो सकती है और मूत्र की मात्रा में कमी आ सकती है। माता-पिता को यह भी लग सकता है कि उनके बच्चे का वजन बढ़ गया है और वह सामान्य से अधिक सूजा हुआ है।
बच्चे में जब नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण दिखाई दें, तो कुछ ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवा सकते हैं। ब्लड टेस्ट से पता चल सकता है कि कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा हुआ है और सीरम प्रोटीन का स्तर, खासकर एल्ब्यूमिन, सामान्य से कम है।
यूरिन टेस्ट में मूत्र में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा दिख सकती है, जिसे 1+ से 4+ तक मापा जाता है।
जब ये लक्षण और जांच परिणाम एक साथ मिलते हैं, तो हम इसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम कहा जाता है। यह ऐसी स्थिति है जब जिसका असर किडनी पर पड़ता है। इसमें किडनी ठीक से काम नहीं करती ‘लीकी’ हो जाती है यानी यह प्रोटीन को शरीर में रोक पाने में असमर्थ हो जाती हैं और प्रोटीन मूत्र में निकल जाता है।
यह स्थिति 3 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों में आमतौर पर देखी जाती है और अगले कुछ वर्षों तक बार-बार हो सकती है। बच्चे आमतौर पर प्यूबर्टी या 15 से 18 वर्ष की आयु तक इस समस्या से उबर सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी बच्चों में यह स्थिति एक ही तरह से होगी। कुछ बच्चों में इस बीमारी का रास्ता अलग हो सकता है, और हम यह नहीं कह सकते कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम एक निश्चित आयु में शुरू होता है और एक निश्चित समय तक रहता है।
हर बच्चे की पेशाब में झाग आने के लक्षण यानी कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए, उपचार को बच्चों की जरूरतों और उसके लक्षणों के आधार पर तैयार किया जाता है, जिन्हें हम कई सालों से देखते आए हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम का मतलब यह नहीं है कि किडनी पूरी तरह खराब हो गई हैं। किडनी कई काम करती है, जिनमें से एक है प्रोटीन को शरीर में बनाए रखना।
जब भी माता-पिता को अपने बच्चे में इस तरह के लक्षण दिखें या जांच के बाद प्राथमिक बाल रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर द्वारा किए गए डायग्नोसिस में नेफ्रोटिक सिंड्रोम होने का पता चले, तो बच्चे को पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट के पास ले जाना चाहिए। इससे सही इलाज किया जा सकता है।
किडनी की समस्या का पहला संकेत मूत्र (पेशाब) से जुड़ा हो सकता है, जैसे कि मूत्र की मात्रा में कमी या वृद्धि, पेशाब में झाग, खून या दर्द होना।
पेशाब में झाग आना अक्सर गुर्दे की बीमारी (Kidney disease) का संकेत हो सकता है, क्योंकि यह पेशाब में प्रोटीन की अधिकता (प्रोटीन्यूरिया) के कारण होता है, जिससे गुर्दे ठीक से काम नहीं कर पाते हैं।
पेशाब में प्रोटीन की अधिकता होने पर झाग आता है।
अगर आप पेशाब के बाद अपने गुप्तांगों को ठीक से साफ नहीं करते, तो पेशाब की बची हुई बूंदें आपके अंडरवियर में समा सकती हैं। इससे दिन भर बदबू और नमी और असहजता का एहसास हो सकता है। इसलिए प्राइवेट पार्ट जरूर साफ करें।