3 साल की उम्र के बाद भी नहीं बोल पा रहा बच्चा तो क्या करें?

अगर 3 साल की उम्र के बाद भी बच्चे को बोलने में मुश्किल हो रही है तो एक बार बाल रोग विशेषज्ञ से जरूर मिलें। इस स्थिति में स्पीच थेरेपी देना फायदेमंद हो सकता है।

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Written By: Anju Rawat | Published : April 23, 2026 1:08 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Meena J.

बच्चों के बोलने की प्रक्रिया करीब 6 महीने से शुरू होती है। पहले वह बा-बा, मा-मा जैसी आवाजें निकालना शुरू करता है। वहीं, एक साल की उम्र तक वह एक-एक शब्द जैसे- मम्मी, पापा बोलना शुरू कर देता है। 2 साल की उम्र तक वह छोटे-छोटे वाक्य जैसे- मम्मी पानी चाहिए, पापा चीज चाहिए आदि बोलने लगता है। वहीं, 3 साल की उम्र तक बच्चा काफी हद तक बोलने लगता है और अपनी सारी बातों को आसानी से समझा देता है। लेकिन, अगर कोई बच्चा 3 साल की उम्र तक स्पष्ट रूप से नहीं बोल पा रहा है या वह छोटे-छोटे वाक्य भी नहीं बोल पा रहा है, तो इसे सामान्य विकास में देरी के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। आइए, आकाश हेल्थकेयर की कंसल्टेंट-पीडियाट्रिक डॉ. मीना जे (Dr Meena J, consultant, Dept of Paediatrics, Akash Healthcare) से जानते हैं इस मामले में माता-पिता को क्या करना चाहिए?

बच्चे का 3 साल तक न बोल पाने के क्या कारण हो सकते हैं?

बच्चे का देरी से बोलने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

  • सबसे पहला है- सुनने की क्षमता में कमी होना। जो बच्चे ठीक से सुन नहीं पाते हैं, उन्हें शब्दों को सीखने और बोलने में मुश्किल हो सकती है।
  • ऑटिज्मस स्पेक्ट्रम से जुड़े बच्चे भी देरी से बोल सकते हैं।
  • कुछ बच्चों में न्यूरो डेवलपमेंटल देरी की वजह से भी बोलने में देरी हो सकती है।
  • मुंह और जीभ की मांसपेशियां कमजोर होने की वजह से भी बोलन में देरी हो सकती है।
  • समय से पहले जन्म भी बच्चे में देरी से बोलने का कारण हो सकता है।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

  • अगर बच्चा नाम पुकारने के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो डॉक्टर से मिलें।
  • अगर बच्चा बोलते समय आंखों से संपर्क नहीं बनाता है या दूसरों के साथ इंटरैक्शन से बचता है, तो इस स्थिति में डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • इन स्थितियों में देरी करने से बचना चाहिए और तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

इसका क्या इलाज है?

  • इसके इलाज के लिए डॉक्टर सबसे पहले बच्चे की हियरिंग टेस्टिंग करते हैं, अगर बच्चा सही तरीके से सुन लेता है तो इसके बाद स्पीच और लैंग्वेज असेसमेंट किया जाता है।
  • जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक और न्यूरोलॉजिकल कंडीशन को चेक किया जाता है।
  • बच्चा बोल नहीं पा रहा है तो जितनी जल्दी संभव है तो स्पीच थेरेपी शुरू करें।
  • बच्चे के साथ लगातार बातचीत करें और उसे किताबें पढ़कर सुनाएं।
  • गाने और राइम्स के जरिए बच्चे को भाषा बोलना सिखाएं।
  • बच्चे के स्क्रीन टाइम को कम से कम रखने की कोशिश करें।

अक्सर माता-पिता यह सोचकर इंतजार करते हैं कि बच्चा अपने आप बोलने लगेगा। लेकिन 3 साल की उम्र के बाद ज्यादा देरी करना सही नहीं है। अगर बच्चा 3 साल के बाद भी बोल नहीं पा रहा है, तो इस स्थिति की अनदेखी बिल्कुल न करें। समय पर स्पीच थेरेपी की मदद से बच्चे को बोलने में आसानी हो सकती है।

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