मोच लगने के बाद कभी ना करें ये काम, वरना बढ़ सकती है समस्याएं
मोच लगने के बाद कभी ना करें ये काम, वरना बढ़ सकती है समस्याएं
खेलने-कूदने के दौरान या फिर काम के दौरान भारी सामान उठाने के कारण मोच लग जाती है। मोच लगने पर हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह गंभीर रूप से लगी होती है, तो आगे चलकर गंभीर रूप धारण कर सकती है। ऐसे में हमें विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।
Written By: Kishori Mishra | Updated : July 4, 2020 10:22 AM IST
Sprain Problem : अक्सर भारी काम करते हुए पांव में मोच जा जाती है। पांव में मोच को कई लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं। इसके कारण पांव में असहनीय दर्द होने लगता है और दिक्कतें अधिक बढ़ जाती (Sprain Problem) है। अगर मोच हल्की और ज्यादा गंभीर ना हो, तो घर में भी आप इसका इलाज कर सकते हैं, लेकिन इस दौरान हमें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आप अपने मोच को ठीक कर सकें। आइए जानते हैं मोच लगने पर क्या करें और क्या ना करें-
मोच लगने पर क्या करें?
मोच लगने पर सबसे पहले चोट लगने वाले हिस्से को आराम दें और कोशिश करे कि उस हिस्से पर ज्यादा दबाव ना पड़े।
चोट लगने के 48 से 72 घंटे तक उस हिस्से पर 15-20 मिनट में सिंकाई करें। ब़र्फ को मोच वाले हिस्से में सीधे लगाने की बजाय टॉवेल या कपड़े में लपेट कर लगाएं।
मोच वाले एरिया को नुकसान न पहुंचे, इसलिए उस हिस्से में बैंडेज बांध लें। इससे सूजन कम होगी।
बैंडेज को कसकर ना बांधें, इससे ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो सकता है।
तकिए की मदद से मोच वाले हिस्से को थोड़ा ऊपर रखें, इससे सूजन कम होगी।
मोच लगने पर क्या न करें ?
मोच लगने वाली जगह पर कभी भी मसाज न करें।
इस दौरान किसी भी तरह की एक्ससाइज करने से बचें।
मोच वाले हिस्से को गर्मी न दें। बहुत से लोग मोच करने पर स्टीमबाथ लेते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचना चाहिए।
शराब से दूरी बनाएं रखें, एल्कोहल के सेवन से मोच वाले हिस्से में सूजन की समस्या बढ़ सकती है।
मोच और फ्रेक्चर में अंतर
फ्रेक्चर में लोगों की हड्डियां टूट जाती हैं। जैसे कोहनी, अस्थिभंग हाथ, हाथ, पैर, टखने, कलाई, पैर, पैर की उंगलियों में हड्डियों का टूटना है। वहीं, मोच की बात करें तो यह विशेष रूप से टखने और कलाई में स्नायुबंधन (Ligaments) का टूटना।
दुर्घटनाएं, खेल की चोटें या फिर ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी कमजोर) के कारण फ्रेक्चर होती हैं। वहीं, मोच की बात करें तो मोच गिरने, मारने या मुड़ने के कारण लगती है।
फ्रेक्चर के कारण मरीज को प्रभावित क्षेत्र में सूजन, दर्द, चोट के निशान को स्थानांतरित करने में असमर्थ होता है है। इसमें रोगी के प्रभावित क्षेत्र की हड्डी एक असामान्य कोण पर झुकती है। वहीं, मोच में दर्द, सूजन, ब्रूसिंग, संयुक्त को स्थानांतरित करने में सक्षम नहीं है।
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