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40 की उम्र के बाद का समय किसी भी पुरुष का जीवन कई मायनों में महत्वपूर्ण होता है। स्वास्थ्य रखरखाव और निवारक देखभाल पर ज़ोर देना बहुत ज़रूरी हो जाता है। इस उम्र में नियमित रूप से मेडिकल टेस्ट्स करवाने से संभावित स्वास्थ्य समस्याएं जल्दी समझ में आ सकती हैं और उन पर जल्द से जल्द इलाज किए जा सकते हैं। 40 की उम्र के बाद इन मेडिकल टेस्ट्स को करवाना आवश्यक है –
हाइपर टेन्शन या हाई ब्लड प्रेशर एक आम समस्या है जो हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष को कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर की जांच करवानी चाहिए। यदि रीडिंग लगातार हाई है, तो अधिक बार जांच और जीवनशैली में बदलाव या दवा की आवश्यकता हो सकती है।
हाई कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल), एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स को नापा जाता है, यह टेस्ट हर 4-6 साल में किया जाना चाहिए। यदि परिवार में पहली पीढ़ी में से किसी को कोलेस्ट्रॉल है या अभी कोई दूसरी बीमारियां हैं तो बहुत बार जांच करवाना उचित रहेगा।
मधुमेह की बीमारी चुपचाप से बढ़ती जाती है और इस पर समय पर और ठीक से इलाज नहीं किए गए तो स्वास्थ्य की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खाली पेट ब्लड ग्लूकोज़ टेस्ट या एचबीए1सी टेस्ट करवाने से मधुमेह या मधुमेह-पूर्व स्थिति का पता लगाया जा सकता है। 40 की उम्र के बाद हर तीन सालों में एक बार और अगर परिवार में किसी को मधुमेह है तो अधिक बार यह टेस्ट करवाना चाहिए।
उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। पीएसए जांच में रक्त में प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन के स्तर को नापा जाता है, जो कैंसर सहित प्रोस्टेट समस्याओं का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। पुरुषों को परीक्षण शुरू करने के लिए उचित समय के बारे में अपने डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए, आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के आसपास, या यदि परिवार में पहले किसी को प्रोस्टेट कैंसर हुआ हो तो 40 की उम्र से भी पहले यह जांच करवानी चाहिए।
नियमित जांच से कोलोरेक्टल कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है। पुरुषों को 40 वर्ष की उम्र से शुरू करके, हर 10 साल में एक बार कोलोनोस्कोपी करवानी चाहिए। पॉलीप्स पाए जाते हैं या परिवार में पहले किसी को कोलोरेक्टल कैंसर हुआ है तो अधिक बार यह जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा हर साल फेकल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट या हर 5 साल में एक बार सिग्मोइडोस्कोपी करवानी चाहिए।
40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों के लिए पूरे पेट का अल्ट्रासाउंड बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे पित्त पथरी, किडनी की पथरी और लिवर की बीमारियों जैसी पेट की स्थितियों की जांच करने में मदद मिलती है। इससे प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं जैसे कि बीपीएच और प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाया जा सकता है। पेट के अंगों में असामान्यता हो तो उसका पता लग सकता है और पेट की एओर्टा में संभावित एन्यरिज्म की जांच की जा सकती है। नियमित जांच से समस्याओं का जल्द पता लगाया जा सकता है, जिससे समय पर इलाज और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम पाए जा सकते हैं।
अपने वजन को स्वस्थ बनाए रखना कुल स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। बीएमआई की जांच और कमर को मापने से मोटापे से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। पुरुषों को हृदय रोग, मधुमेह और अन्य स्थितियों के जोखिम को कम करने के लिए अपने बीएमआई को 18.5 और 24.9 के बीच और अपनी कमर को 40 इंच से कम रखने का लक्ष्य रखना चाहिए।
ऑस्टियोपोरोसिस महिलाओं में अधिक आम है, लेकिन पुरुषों को भी इसका ख़तरा होता है, खासकर 50 की उम्र के बाद पुरुषों को ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। बोन डेन्सिटी टेस्ट (DEXA स्कैन) फ्रैक्चर की जोखिम का पता लगाने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग, शरीर का वज़न कम हो या परिवार में पहले किसी को ऑस्टियोपोरोसिस हुआ हो तो अपने डॉक्टर से इस जांच के बारे में चर्चा करें।
उम्र के साथ दृष्टि बदल सकती है, और 40 से अधिक उम्र के पुरुषों को हर 2-4 साल में एक बार आंखों की व्यापक जांच करवानी चाहिए। इससे ग्लूकोमा, मैक्यूलर डिजनरेशन और मोतियाबिंद जैसी स्थितियों का पता लगाया जा सकता है। ध्यान रखें, यह बीमारियां बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकती हैं।
उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की सुनने की क्षमता कम होना आम बात है। 40 की उम्र में एक बेसलाइन हियरिंग टेस्ट और हर कुछ वर्षों में नियमित जांच करवाने से सुनने की क्षमता में कमी का पता लगाने और समय रहते इलाज से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।
40 की उम्र के बाद स्वास्थ्य की नियमित जांच करवाना पुरुषों के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल की कुंजी है। प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों को ध्यान में रखकर, समस्याओं का जल्दी पता लगाना और स्वास्थ्य को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए सक्रिय कदम उठाना संभव है। पुरुषगत जोखिम कारकों और स्वास्थ्य की पूर्व स्थिति को ध्यान में रखकर बनाए जाने वाले पुरुषगत स्क्रीनिंग शेड्यूल के लिए अपने मेडिकल एक्सपर्ट के साथ चर्चा करें। इस सक्रिय दृष्टिकोण को अपनाकर आप अपने जीवन की गुणवत्ता और आयु को बढ़ा सकते है।
Inputs: डॉ अमोल कुमार पाटील लीड एंड सीनियर कंसल्टेंट, यूरोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट और रोबोटिक्स ,अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई.