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किन लक्षणों से होती है किडनी में सूजन की पहचान? जानें कारण और बचाव

कई बार हम शरीर में होने वाले बैक्टीरियल इंफेक्शन या अन्य वायरल बीमारियों को अनदेखा कर देते हैं। लेकिन जांच के बाद पता चलता है कि ऐसा किडनी में सूजन के कारण होता है। आइए आपको किडनी में सूजन के लक्षण बताते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : July 29, 2026 1:16 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Sudeep Singh Sachdev

बहुत से लोग शरीर में होने वाली सूजन या ब्लोटिंग को अनदेखा कर देते हैं। ऐसा किडनी में सूजन के कारण भी हो सकता है। इस समस्या को डॉक्टरी भाषा में नेफ्राइटिस या ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस कहा जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब किडनी के माइक्रो फिल्टर (नेफ्रॉन्स) में किसी इंफेक्शन या इंटरनल बीमारी के कारण सूजन आ जाती है।

17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले नारायणा हॉस्पिटल गुरुग्राम के नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांटेशन विभाग में डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सुदीप सिंह सचदेव बताते हैं कि किडनी का मुख्य कार्य शरीर से अपशिष्ट पदार्थ (वेस्ट मटेरियल) और अतिरिक्त तरल को बाहर निकालना होता है। जब इस अंग में सूजन आ जाती है, तो इसकी कार्यप्रणाली बाधित हो जाती है, जिससे शरीर में कई तरह के शारीरिक और जैविक बदलाव देखने को मिलते हैं। आइए इन बदलावों के बारे में जानते हैं।

चेहरे और आंखों पर पफीनेस

किडनी में सूजन की पहचान शुरुआती लक्षणों के जरिए आसानी से की जा सकती है। इसका सबसे पहला और प्रमुख लक्षण शरीर में पानी जमा होना है, जिसके कारण सुबह सोकर उठने पर आंखों के आसपास और चेहरे पर सूजन दिखाई देती है। धीरे-धीरे यह सूजन पैरों, टखनों और पंजों तक फैल जाती है। 

इसके अलावा, पेशाब में बदलाव आना भी इसका एक स्पष्ट संकेत है। किडनी में सूजन के कारण जब किडनी से प्रोटीन रिसने लगता है, तो पेशाब अत्यधिक झागदार हो जाता है। कई मामलों में पेशाब का रंग लाल, भूरा या चाय जैसा दिखने लगता है, जो पेशाब में खून (रेड ब्लड सेल्स) आने का इशारा करता है।

बढ़ने लगता है ब्लड प्रेशर

किडनी में सूजन आने पर शरीर के अन्य तंत्र भी प्रभावित होते हैं। किडनी शरीर में नमक और पानी का संतुलन नियंत्रित करती है, इसलिए इसके प्रभावित होने पर अचानक और तेजी से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके साथ ही मरीजों को पीठ के निचले हिस्से या पसलियों के नीचे लगातार हल्का या भारी दर्द महसूस हो सकता है। जैसे-जैसे शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, मरीज को अत्यधिक थकान, कमजोरी, भूख में कमी, जी मिचलाना और मुंह का स्वाद कड़वा होने जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं।

किडनी में सूजन की समस्या कैसे पैदा होती है?

इसके कारणों की बात करें, तो यह समस्या कई अलग-अलग वजहों से पैदा हो सकती है। सबसे पहला प्रमुख कारण संक्रमण है-

  • पेशाब की नली का गंभीर संक्रमण (UTI)- अगर समय पर इलाज न हो, तो संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है।
  • गले का बैक्टीरियल संक्रमण (Strep Throat)- हेपेटाइटिस और अन्य वायरल बीमारियां भी किडनी के फिल्टर्स में सूजन ला सकती हैं।
  • ऑटोइम्यून बीमारियां- जैसे लुपस (Lupus) या IgA नेफ्रोपैथी, जिनमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र गलती से किडनी के अपने ही ऊतकों पर हमला करने लगता है।
  • जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी किडनी में सूजन का कारण बनती हैं।
  • लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की नसों को नुकसान पहुंचाकर उनमें सूजन पैदा करता है।
  • साथ ही, किडनी में पथरी होने से पेशाब का रास्ता रुक जाता है, जिससे किडनी पर दबाव बढ़ता है। 

एक और बड़ा कारण बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार दर्द निवारक दवाओं (पेनकिलर्स) या तेज असर वाली एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक सेवन है, जो किडनी पर सीधा हानिकारक असर डालता है।

डॉक्टर ने दी सलाह

“अगर किसी भी व्यक्ति को पैरों में लगातार सूजन, झागदार पेशाब या पीठ के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य मानकर टालना खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी किडनी विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्ट) से परामर्श लेना चाहिए।” यह डॉ. सुदीप सिंह सचदेव का कहना है।

डिस्क्लेमर: आमतौर पर यूरिन रूटीन टेस्ट (Urine Routine), किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) और पेट का अल्ट्रासाउंड के जरिए सूजन की सटीक वजह का पता लगाते हैं और सही समय पर इलाज शुरू करके किडनी को गंभीर क्षति से बचाते हैं। इसलिए अगर शरीर में किडनी की सूजन से जुड़े कोई भी लक्षण दिखें तो डॉक्टर से परामर्श लें।