चूहों के अलावा कुत्ते, बिल्ली या अन्य जंगली जानवर काट जाए तो क्या करें?

हाल में हंता वायरस का प्रकोप खूब बढ़ गया है, लेकिन क्या सिर्फ चूहों से रोग फैलता है? नहीं कुत्तों व बिल्लियों जैसे और भी कई जानवर हैं जो काट लें जो जान भी जा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : May 14, 2026 2:30 PM IST

चूहों के मल से फैलने वाले हंता वायरस आजकल बहुत ही ज्यादा चर्चा में है और लोगों में अपना खौफ बनाए हुए है। ऐसे में अगर हम चूहे-बिल्ली जैसे अन्य जंगली जानवरों की भी बात करें तो इनका काटना भी हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आपको याद होगा कि कबड्डी खिलाड़ी बृजेश सोलंकी की भी कुत्ते के काटने से मौत हुई थी। जिसका कारण यह था कि उन्होंने इसे मामूली समझकर एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया था। आपको इसी तरह और भी कई केस मिल जाएंगे।

आज हम आपको इस लेख में कुत्ते, बिल्लियों और अन्य जंगली जानवरों के काटने पर होने वाली समस्याओं और फिर उनसे बचने के उपायों के बारे में बताने वाले हैं। यह जानकारी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा शेयर की गई है, लेकिन पर्सन टू पर्सन हर व्यक्ति की समस्या कम या ज्यादा हो सकती है, ऐसे में अगर ऐसा कुछ सच में हो जाए तो डॉक्टर के पास जाएं। आइए हम थोड़ा विस्तार से जानते हैं कि डब्ल्यू एच ओ ने क्या गाइडलाइन्स दी हैं।

कुत्तों का काटना कितना खतरनाक है?

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक कुत्तों के काटने का कोई वैश्विक अनुमान नहीं है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि हर साल लाखों लोग कुत्तों के काटने से घायल होते हैं। साइंस डायरेक्ट द्वारा किए गए 2 मार्च 2022 से 26 अगस्त 2023 तक एक सर्वे किया गया। इसमें भारत के 15 राज्यों के 60 जिलों को शामिल किया गया था। 

क्या रहा सर्वे का रिजल्ट

सर्वेक्षण में 337,808 व्यक्ति थे, जिसमें से 2052 ने जानवरों के काटने की घटना बताई। इनमें से 1576 पिछले एक साल में कुत्तों द्वारा काटे जाने के मामले थे। कुत्ते के काटने की सालाना घटना दर प्रति 1000 पर 5.6 थी। कुत्ते द्वारा काटे गए लोगों में से 323 को एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं दिया गया था, और 1043 (66.2%) को कम से कम तीन खुराकें दी गई थीं। एक खुराक प्राप्त करने वाले 1253 व्यक्तियों में से लगभग आधे 615 लोगों ने टीकाकरण का पूरा कोर्स पूरा नहीं किया। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में प्रतिवर्ष 5726 मानव रेबीज से मौतें होती हैं।

जानवर के काटने से क्या होता है? Image Credit- ChatGPT

आइए अब हम अन्य जानवरों के काटने के बारे में जानें- 

बिल्लियों के काटने की संख्या दूसरे नंबर पर

अगर हम विश्व स्तर की बात करें तो जानवरों के काटने की घटनों में डॉग बाइटिंग के बाद बिल्लियों का काटना दूसरे स्थान पर है। PubMed की रिपोर्ट के अनुसार बिल्लियों के काटने या खरोंच के घाव ज्यादातर मामूली होते थे, लेकिन बिल्लियों के काटने से अक्सर इन्फेक्शन हो सकता है, जो 30%–50% मामलों में हुआ। वहीं WHO की रिपोर्ट कहती है कि बिल्लियों के काटने से रेबीज वायरल इंफेक्शन और बरटोनेला, ब्रुसेला, लेप्टोस्पाइरा और कैम्पिलोबैक्टर स्पीसिस से संबंधित कई बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकते हैं। बिल्ली के काटने से संक्रमण होने की संभावना कुत्ते के काटने की तुलना में दोगुनी होती है।

बंदर के काटने से होने वाली समस्या

WHO की रिपोर्ट कहती है कि जानवरों के काटने से होने वाली चोटों में 2–21% मामले बंदर के काटने के होते हैं। आपको समधने में आसानी हो, इसके लिए बता दें कि विश्व स्तर पर तो बिल्ली के काटने की घटना दूसरे नंबर पर है, लेकिन भारत में हुई दो स्टडीज़ में बताया गया है कि कुत्तों के काटने के बाद, बंदर का काटना चोट लगने का दूसरा सबसे आम कारण है। बंदर के काटने से रेबीज, सिमियन रेट्रोवायरस, हर्पीज B वायरस और mpox इन्फेक्शन का खतरा रहता है।

जानवरों के काटने से होने वाली बीमारियां
जानवरजानवर के काटने से होने वाली बीमारियां/इंफेक्शन
कुत्तारेबीज, सेल्युलाइटिस, पास्चुरेला संक्रमण, सेप्सिस
बिल्लीरेबीज वायरल इंफेक्शन और बार्टोनेला, ब्रुसेला, लेप्टोस्पाइरा और कैम्पिलोबैक्टर स्पीसिस से संबंधित कई बैक्टीरियल इंफेक्शन
बंदररेबीज़, सिमियन रेट्रोवायरस, हर्पीज B वायरस और mpox इन्फेक्शन
चमगादड़रेबीज, हिस्टोप्लास्मोसिस, लेप्टोस्पाइरोसिस, निपाह वायरस, मारबर्ग और सार्स वायरस
चूहा, रोडेंट, गिलहरियां या धूसहंटावायरस, रैट-बाइट फीवर, रेबीज, लेप्टोस्पायरोसिस और टुलारेमिया

जानवर के काटने पर बिना दवा के इलाज कैसे करें?

डिस्क्लेमर- जानवर का काटना हमारी जान के लिए खतरा हो सकता है। कुत्ता, बिल्ली, चूहा या फिर अगर बंदर भी काट जाए तो इसे नजरअंदाज न करें। यह आपको रेबीज का मरीज बना सकता है और सही समय पर एंटी रेबीज इंजेक्शन न लिया जाए तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। किसी भी जंगली जानवर के काटने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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