The Healthsite Originals : बच्चों को बुखार में कौन सा सिरप देना चाहिए? डॉक्टर से जानें दवा और डोज

The Healthsite Originals : हम आपको बच्चे को हुए अचानक बुखार में क्या दें ताकि बच्चा परेशान न हो, इसके लिए कुछ जरूरी टिप्स बताने जा रहे हैं।

WrittenBy

Written By: Jitendra Gupta | Published : October 3, 2022 4:25 PM IST

बदलते मौसम के कारण बच्चों के बीमार होने की संख्या के मामले बढ़े हैं और जब बात बीमारियों से भरे माहौल की हो तो कई बार जरूरत से ज्यादा लापरवाही बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। कुछ मामलों में जब अचानक बच्चे को बुखार हो जाता है तो आपके लिए परेशानी अचानक से आई मुसीबत बन जाती है। ऐसी स्थिति में धैर्य से काम लेने की जरूरत है और आपके पास ऐसी जानकारी होनी चाहिए ताकि न तो आपका बच्चा परेशान हो और न ही आप। The Healthsite Original की इस सीरिज की पहली कड़ी में हम आपको बच्चे को हुए अचानक बुखार में क्या दें ताकि बच्चा परेशान न हो, इसके लिए कुछ जरूरी टिप्स बताने जा रहे हैं। ये जरूरी सूचना सिर्फ और सिर्फ एक्सपर्ट की राय पर आधारित है, जिसकी पुष्टि वो खुद करते हैं।

शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एसोसिएट डायरेक्टर- पीडियाट्रिक्स, डॉ. सोनिया मित्तल The Healthsite Original की इस पहली कड़ी में बच्चों को अचानक बुखार आने पर इमरजेंसी के वक्त कौन सी दवा देनी है, उसकी डोज जैसी जरूरी जानकारी शेयर करेंगी। तो चलिए शुरू करते हैं।

1-बच्चे को बुखार होने पर कौन-कौन की दवा इमरजेंसी के रूप में दी जा सकती हैं?

डॉ. सोनिया मित्तल कहती हैं कि बच्चों को अचानक बुखार होनेपर आप पैरासिटेमॉल और मेफनमिक एसिड सॉल्ट वाला सिरप दे सकते हैं। सबसे सेफ पैरासिटामॉल दवा है। 12 साल तक के बच्चों को सिरप की सलाह दी जाती है, उसके बाद आप गोली के रूप में दवा दे सकते हैं।

2-बच्चे के लिए कितना बुखार नार्मल है?

डॉ. सोनिया मित्तल कहती हैं कि बच्चों का तापमान अगर 99 F तक हैं तो चिंता ना करें। उन्होंने कहा कि जब तापमान 99 ° F के करीब हो तो माता-पिता को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि बच्चे का थोड़ा गर्म होना बहुत सामान्य है। इसलिए इतने बुखार में घबराने की बात नहीं है। बच्चे को 100 से ज्यादा बुखार हो तो आप ऊपर लिखी सॉल्ट वाली दवा दे सकते हैं

3-कितनी उम्र के बच्चे को कितनी डोज देनी है?

दवा की डोज बच्चों के वजन पर आधारित होती है इसलिए बेहतर है कि आप डॉक्टर से बात करके ही दवा लें। लेकिन बात जब इमरजेंसी की है तो ये डोज की सलाह दी जाती हैः

1-0 से 6 महीने के बच्चे को 5 बूंद

2-6 महीने से 12 महीने के बच्चे को 1 एमएल

3-12 महीने से डेढ़ साल के बच्चे को 1.5 एमएल

4-डेढ़ साल से दो साल के बच्चे को 3 एमएल

5-दो से चार साल के बच्चे को 5 एमएल

6-5 से 10 साल के बच्चे को 10 एमएल डोज दी जानी चाहिए।

4-बुखार में बच्चे को कौन-कौन सी एंटी-बायोटिक देना सही होगा?

बच्चों को बुखार में एंटीबायोटिक स्वयं ना दें हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही एंटीबायोटिक दें । एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग या अति प्रयोग हर किसी को जोखिम में डालता है क्योंकि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से एंटीबायोटिक प्रतिरोध हो सकता है जो वर्तमान में वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बन रहा है।

एंटीबायोटिक्स की खुराक लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है क्योंकि हमेशा एक मौका नहीं होता है कि बुखार एक संक्रमण के कारण होता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में अस्पतालों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आपात स्थिति में बच्चे को बीमारी के दौरान बचाने का एक सुरक्षित तरीका है उसे पेरासिटामोल या मेफेनैमिक एसिड की गोली देना। एक बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित दवा एक पेरासिटामोल है क्योंकि इसके दुष्प्रभाव बहुत कम होते हैं।

5-कितने दिन तक दवा देनी चाहिए और कब दवा बंद कर देनी चाहिए?

दवाएं अलग अलग तरह की होती है ,अगर एंटीबायटिक है तो जितने दिन आपके डॉक्टर ने कहा है कोर्स जरूर पूरा करें।अगर बुखार ,खांसी ,उल्टी , जुखाम की दवा हो तो समस्या ख़त्म होने पर बंद कर सकते हैं। 10 साल से कम उम्र के बच्चे के इलाज के लिए कई अलग-अलग प्रकार की दवाओं का उपयोग किया जाता है, इसलिए डॉक्टर से परामर्श करना और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए कोर्स को पूरा करना महत्वपूर्ण हो गया है। अगर लक्षण बुखार, खांसी, उल्टी या सर्दी हैं, तो समस्या ठीक होने पर दवाओं का सेवन बंद किया जा सकता है।

उन्होंने ये भी कहा कि यह भी देखा गया है कि इस दौरान ज्यादातर मामले वायरल होते हैं लेकिन लोगों ने बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना शुरू कर दिया है जो सीधे तौर पर समस्या पैदा नहीं करती हैं लेकिन लंबे समय में व्यक्ति के शरीर के लिए हानिकारक होती हैं। हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि बच्चों में सबसे आम संक्रमण दस्त, सर्दी या खांसी वायरल कारणों से होते हैं, न कि बैक्टीरिया से क्योंकि बैक्टीरिया के संक्रमण ज्यादातर तब होते हैं जब बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता खराब होती है, कुपोषण आदि होता है। माता-पिता से अनुरोध है कि वे बाल रोग विशेषज्ञ से उचित परामर्श लें। कोई भी एंटीबायोटिक लेने से पहले।