ब्लड टेस्ट में ट्राइग्लिसराइड का लेवल क्या होना चाहिए, जानिए कितनी मात्रा में होने पर आता है हार्ट अटैक

Triglycerides Level in Hindi: अपने ट्राईग्लिसराइड लेवल को जानने के लिए आपको एक छोटे से ब्लड टेस्ट से गुजरना होता है, इसके बाद आपको सारी जानकारी मिल जाती है।

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Written By: Atul Modi | Published : May 14, 2024 3:56 PM IST

Triglycerides Level in Hindi: अधिकांश लोग अपना बैड कोलेस्ट्रॉल तो चेक करते हैं मगर ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल चेक करना भूल जाते हैं जबकि यह भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हाई ट्राइग्लिसराइड्स कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए हमें ट्राइग्लिसराइड्स के सही लेवल का पता होना जरूरी है, साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि हाई ट्राइग्लिसराइड का लेवल (HighTriglycerides Level) कब हानिकारक हो जाता है और इसके नुकसान क्या-क्या हैं?

वैसे तो हेल्दी लाइफ पाना आज के समय में किसी वरदान से कम नहीं है। इसके लिए हमें कई बातों का ध्यान रखना होता है। हेल्दी फूड, एक्सरसाइज, योग, विटामिन आदि के विषय में तो अधिकांश लोग जानते हैं, लेकिन इसके अलावा कई ऐसे फैक्टर्स हैं, जिनके बारे में लोगों को कोई जानकारी ही नहीं है। इन्हीं में शामिल है ट्राइग्लिसराइड्स।

जानिए क्या है ट्राइग्लिसराइड्स - What is Triglycerides in Hindi

ट्राइग्लिसराइड्स एक खतरनाक फैट है, जिसे लिपिड कहते हैं। जब ब्लड में इसकी मात्रा बढ़ती है तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है। शरीर में पाए जाने वाले सभी फैट्स में से यह फैट का सबसे आम प्रकार है। ज्यादा ऑयली और फैटी फूड खाने के कारण इसकी मात्रा बढ़ने लगती है। चिंता की बात यह है कि शरीर को ट्राइग्लिसराइड्स की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में यह ट्राइग्लिसराइड्स एक्स्ट्रा कैलोरी पूरे शरीर में जमने लगती है। हालांकि कुछ ट्राइग्लिसराइड्स शरीर के लिए अच्छे भी होते हैं, लेकिन ये भी सीमित ही होने चाहिए। शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने से आप कई गंभीर रोगों से पीड़ित हो सकते हैं। हार्ट अटैक, स्ट्रोक के साथ ही यह हाई कोलेस्ट्रॉल का कारण बनता है। साथ ही यह मेटाबॉलिज्म सिंड्रोम का भी कारण बनता है।

ट्राइग्लिसराइड्स को ऐसे करें कंट्रोल - How to Control Triglycerides Level in Hindi

ट्राइग्लिसराइड्स को गंभीरता से कंट्रोल करना जरूरी है। क्योंकि चार में से एक वयस्क हाई ब्लड ट्राइग्लिसराइड्स से प्रभावित है। हेल्दी फूड, अच्छी लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज और दवाओं से आप ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल कर सकते हैं। ब्लड टेस्ट के माध्यम से ट्राइग्लिसराइड्स का पता लगाया जा सकता है।

कितना ट्राइग्लिसराइड्स लेवल है हेल्दी - What Level of Triglycerides is Normal in Hindi

सीमित मात्रा में ट्राइग्लिसराइड्स बॉडी के लिए नुकसानदायक नहीं होता है। हालांकि उम्र के अनुसार सभी को इसकी अलग-अलग जरूरतें होती है। विशेषज्ञों के अनुसार वयस्कों के लिए 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होनी चाहिए। वहीं नवजात बच्चों से लेकर 19 साल तक के टीनएजर्स में यह 90 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होना चाहिए। अगर बॉडी में ट्राइग्लिसराइड्स 150 से 199 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर होता है तो इसका लेवल मीडियम हाई माना जाएगा है। वहीं 200 से 499 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर को हाई लेवल का माना जाता है। यह मात्रा 500 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर है तो यह खतरनाक स्तर माना जाता है।

ट्राइग्लिसराइड लेवल कब हो जाता है खतरनाक - What Level of Triglycerides is Dangerous in Hindi

  1. हाई ब्लड ट्राइग्लिसराइड्स के लक्षण (Symptoms Of High Blood Triglycerides) आमतौर पर बहुत साफ नजर नहीं आते हैं। ऐसे में 40 की उम्र के बाद आपको नियमित रूप से ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। अगर हाई ब्लड ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल 175 मिलीग्राम प्रति डीएल से ज्यादा है तो यह हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है।
  2. 500 मिलीग्राम प्रति डीएल से ज्यादा ट्राइग्लिसराइड्स के कारण आपके पेनक्रियाज में सूजन आ सकती है, जिसे अक्यूट पेनक्रिएटिक कहते हैं। इसका असर आपकी आंखों की नसों पर भी नजर आता है। इसे लिपेमिया रेटिनोल्स कहते हैं। इससे आपकी पीठ, छाती, हाथ और पैरों की स्किन डैमेज हो सकती है।
  3. हाई ब्लड ट्राइग्लिसराइड लेवल 1,500 मिलीग्राम प्रति डीएल से ज्यादा होने पर यह बॉडी फैट को तोड़ना बंद कर देता है, जिसे मल्टीफैक्टोरियल काइलोमाइक्रोनेमिया सिंड्रोमएक्सटर्नल लिंक कहा जाता है। इससे मेमोरी लॉस, लिवर डैमेज, पेट दर्द, सूजन आदि की परेशानी हो सकती है। इसी के साथ लिवर डिजीज, डायबिटीज, किडनी डिजीज, वजन बढ़ना और थायराइड जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

(डिस्क्लेमर: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।)

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