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बच्चे को उल्टी होने पर क्या करें? खुद डॉक्टर से जानें दवा, डोज, एंटी-बायोटिक और कितने दिन तक देनी है दवा
Thehealthsite Originals Series : अगर आपके घर में बच्चा है तो रात-बे-रात कोई भी परेशानी होना लाजमी है और ये परेशानियां आपकी रातों की नींद तक उड़ा सकती है। इन्हीं में से एक समस्या है उल्टी की, जिसमें बच्चा का बुरा हाल तक हो जाता है। अगर समय रहते बच्चों का इलाज न किया जाए या फिर उसे समय पर दवा न दी जाए तो ये उसके स्वास्थ्य के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। THS Originals की इस विशेष सीरिज में हम बात कर रहे हैं ऐसी अचानक होने वाली परेशानियों के बारे में, जो आपकी मुश्किलें बढ़ाने का काम करती हैं। इस लेख में हम आपको एक्सपर्ट की मदद से उल्टी की समस्या में दी जाने वाली दवा और डोज के बारे में बता रहे हैं, जो आपको काम आ सकती है तो चलिए शुरू करते हैं।
बच्चे को उल्टी आना एक सामान्य लक्षण है इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे_
1- बच्चे को वायरल इंफेक्शन हो सकता है
2-गैस्ट्रोएंट्राइटिस (पेट का इन्फेक्शन)
3- शरीर के अन्य हिस्से का इन्फेक्शन जैसे ब्रेन इन्फेक्शन
4-यूरिन सिस्टम में इन्फेक्शन
5-लिवर इन्फेक्शन।
इन सब वजह से भी बच्चों में उल्टियां होती हैं। नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम के पीडियाट्रिक्स के सीनियर कन्सल्टेंट डॉ. बिलाल खान का कहना है कि इसके अन्य वजह भी हो सकती हैं जैसे आंतों में कोई रुकावट आ रही है ( पाइलोरिक स्टेनोसिस pyloric stenosis, इंटस्ससेप्शन intussusception या intestinal instructions) या फिर बच्चे को जब कभी कभी बुखार आ जाता है तो जब दवाइयां दी जाती हैं तब वह कभी कभी पचा नहीं पाते और बच्चे उल्टियां करते हैं, कभी-कभी छोटे बच्चों को अगर दूध पिलाया जाता है तो वह जल्दबाजी में दूध पीते हैं जिस कारण दूध के साथ एयर भी उनके पेट में जाता है और वे उल्टियां करते हैं।
लेकिन इस तरह की समस्या 1 साल से छोटे बच्चों में ही अधिकतर होती है जिसे सामान्य रूप में देखा जाता है और यह डकार लेने से काफी हद तक ठीक हो जाता है। लेकिन 1 साल के बाद भी यदि उल्टी हो रही है तो उसकी अन्य वजह को पता करना चाहिए।
उल्टी होने पर बच्चों को दवाइयां देने से पहले कुछ मुख्य बातों पर गौर करना बहुत आवश्यक है। सबसे पहले उनके उल्टी होने की वजह जानना बहुत जरूरी है और इसके लिए डॉक्टर के द्वारा एग्जामिनेशन भी बहुत आवश्यक है। डॉक्टर बच्चों की उम्र व वजन के अनुसार कुछ दवाइयां देते हैं जिनमें सामान्यतः histamine receptor ब्लॉकर जैसी दवाइयां दी जाती है परंतु यह दवाइयां डॉक्टर के निर्देशानुसार ही लें।
अगर बच्चा 1 साल की उम्र से छोटा है तो यह एक आम लक्षण है सामान्य तौर पर देखा जाता है कि अगर बच्चा 100ml दूध पीता है और उल्टी के कारण 20ml दूध निकाल देता है तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है अगर बच्चे का वजन ठीक बढ़ रहा है और उसका यूरीन आउटपुट भी सही है तो यह नॉर्मल रूप में देखा जाता है।
लेकिन इससे शरीर को कई नुकसान भी होते हैं जैसे डिहाइड्रेशन की संभावना बढ़ जाती है, बच्चे के शरीर में पानी की कमी हो जाती है, शरीर के अंदर इलेक्ट्रोलाइट डिसबैलेंस हो जाता है, जिसका असर बच्चे के अन्य आर्गन पर भी पड़ सकता है। बच्चे के शरीर में अनुचित एसिड भी एकत्रित होने लगते हैं और बच्चे का पेशाबभी कम हो जाता है जिसकी वजह से किडनी पर भी विपरीत असर पड़ता है और जिस कारण बच्चा शारीरिक रूप से भी कमजोर हो सकता है।
उल्टी होने पर बच्चे की उम्र व वजन के हिसाब से उन्हें दवाइयां दी जाती है। इसमें यह भी देखा जाता है कि उल्टी आने के क्या कारण है और जब तक प्राइमरी पैथोलॉजी पता नहीं चलेगी तब तक उल्टी का सही ट्रीटमेंट नहीं हो सकता. इंफेक्शन के लिए बच्चों को एंटीबायोटिक, गैस्ट्राइटिस के लिए अन्य दवाइयां दी जाती हैं। परंतु यह डॉक्टर के निर्देशानुसार ही उन्हें देना चाहिए तभी उचित रहेगा अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं।
बच्चे को दवाई देना उसकी उल्टी आने की वजह पर निर्भर करता है जैसे यह वजह गैस से संबंधित हो सकती है फ़ूड पोइजनिंग हो सकती है या फिर कोई वायरल इंफेक्शन हो सकता है यदि इंफेक्शन बैक्टीरियल है तो एंटीबायोटिक दवाई दी जाती है इसलिए ऐसे में यह सलाह दिया जाता है कि डॉक्टरों से संपर्क कर उनके निर्देश अनुसार ही एंटीबायोटिक दवाइयां बच्चों को दें। कौन सी दवाइयां देनी है कितने दिनों तक देनी है और कब बंद करनी है यह सब बच्चे की परिस्थिति के अनुसार ही डॉक्टर तय करते हैं।
कितने दिनों तक उल्टी की दवाई देनी है वह कब बंद करनी है यह सब उसके उल्टी होने की वजह के बाद ही पता चल पाता है उल्टी एक प्रकार का लक्षण है और यह अन्य बीमारी होने के संकेत भी हो सकते हैं इसलिए पहले यह पता लगाना बहुत जरूरी है कि आखिर इन लक्षणों के पीछे वजह क्या है फिर इसके बाद डॉक्टरी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाता है कि आखिर उल्टी की वजह क्या है। हालांकि हम उल्टी की दवाइयां SOS के रूप में देते हैं ऐसे इसका मतलब है जब उल्टी आए तब ही दवाई देनी है इसकी कोई समय सारणी नहीं है जब उल्टी ना आए तब दवाई ना देने की सलाह दी जाती है।
यह सभी बच्चे के उल्टी होने के कारणों पर निर्भर करता है इसमें कभी-कभी 3 से 5 दिन भी लग जाते हैं सामान्यतया बच्चे 2 से 3 दिन में ठीक हो जाते हैं इस दौरान सिंपटोमेटिक रिलीफ के लिए मेडिसिन की जरूरत पड़ती है जिसमें बच्चे को तुरंत उल्टी के दरमियान ही दवाइयां दी जाती है यदि बच्चे को कोई बैक्टीरियल इनफेक्शन है तब एंटीबायोटिक दवाएं डॉक्टर लिखते हैं। यदि कोई और गंभीर समस्या है तो डॉक्टरी जांच और सर्जरी के बाद ही वह सही हो पाता है। यदि बच्चे को पेट में कोई समस्या है लीवर इंफेक्शन है या यूरीन में कोई समस्या तो उन्हीं के हिसाब से डॉक्टर दवाइयां लिखते हैं।