
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : April 16, 2026 1:44 PM IST
Medically Verified By: Dr. Pavitra Shankar
Layoff का मेंटल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?
Oracle Corporation में हाल ही में बड़े स्तर पर छंटनी यानी layoff की खबरों ने कॉर्पोरेट वर्ल्ड में डर का माहौल बना दिया है। यहां से लगभग 30 हजार लोगों के लेऑफ होने चर्चा है। लेकिन, ऐसा सिर्फ इसी कंपनी तक सीमित नहीं है। कई दूसरी कंपनियों में भी रोजाना Layoff हो रहे हैं। कभी किसी की जॉब जा रही है, तो कभी किसी की। क्या आपके ऑफिस में भी Layoff हो रहे हैं? क्या आपके ऑफिस में हर रोज किसी-न-किसी की नौकरी जा रही है? अगर हां, तो जाहिर है कि अन्य लोगों के मन में भी Layoff का डर बना होगा। इसकी वजह से ऑफिस में तनावभरा माहौल बना रहता है, इसका असर काम की गुणवत्ता पर तो पड़ता ही है, व्यक्ति के मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। ऑफिस में लेऑफ का माहौल लोगों के मेंटल हेल्थ पर गहरा असर डाल सकता है। लंबे समय तक Layoff वाले माहौल में रहने से मेंटल हेल्थ से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। आइए, आकाश हेल्थकेयर, द्वारका की एसोसिएट कंसल्टेंट और साइकेट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर (Dr. Pavitra Shankar, Associate Consultant, Psychiatrist, Aakash Healthcare, Dwarka) से जानते हैं लेऑफ मानसिक सेहत पर क्या असर डालता है?
इस तरह का माहौल एंग्जायटी को बढ़ाता है। लेऑफ वाले माहौल में व्यक्ति हर छोटी बात को लेकर अधिक सोचने लगता है, क्या अगला नंबर उसका हो सकता है या वह अपनी परफॉर्मेंस को लेकर सोचने लगता है। यह लगातार चलने वाला डर “anticipatory anxiety” में बदल सकता है। इसमें व्यक्ति हमेशा सबसे खराब स्थिति के बारे में सोचता रहता है। इसकी वजह से नींद की समस्या, दिल की धड़कन तेज होना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
ऑफिस में लेऑफ का माहौल होने से व्यक्ति डिप्रेशन में जा सकता है। यह डिप्रेशन का खतरा बढ़ा सकता है। जब व्यक्ति को लगता है कि उसके पूरे प्रयासों के बावजूद भविष्य अनिश्चित है, तो वह निराशा और हताशा महसूस करने लगता है। इसकी वजह से काम में रुचि कम होने लगती है और शरीर में ऊर्जा कम हो जाती है। लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से आत्मसम्मान भी प्रभावित होता है।
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एंग्जाइटी या डिप्रेशन में रहता है, तो सबसे पहले उसकी नींद प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाती है और नींद से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। इसकी वजह से व्यक्ति सोने में दिक्कत हो सकती है। लेऑफ के डर से कई लोग अपनी नौकरी बचाने के लिए जरूरत से ज्यादा काम करने लगते हैं। इसकी वजह से शारीरिक और मानसिक थकान हो सकती है। इसकी वजह से व्यक्ति खालीपन महसूस करता है और उसे चिड़चिड़ापन होने लगता है। लंबे समय तक तनाव में रहने से नींद न आने की समस्या हो सकती है।
ऑफिस में इस तरह के माहौल की वजह से इम्पोस्टर सिंड्रोम भी विकसित हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगता है। उसे लगता है कि उसके काम में कमी है और वह सही तरीके से काम करने में सक्षम नहीं है। किसी भी व्यक्ति में यह भावना आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है।
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो इसकी वजह से उसे छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा आ सकता है। इसका असर व्यक्तिगत संबंधों पर पड़ सकता है। यह न केवल पेशेवर जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी असंतुलन पैदा करता है।
इस माहौल में दिमाग सबसे पहले सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। ऐसे में लॉजिकल सोच कम हो जाती है और इमोशनल रिएक्शन ज्यादा निकलता है। इसकी वजह से छोटी-छोटी बातें भी ज्यादा स्ट्रेसफुल लगने लगती हैं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।