बच्चों में फैटी लिवर के लिए कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट करवाने चाहिए?
What medical tests should be done for fatty liver in children: बच्चों में फैटी लिवर एक साइलेंट लेकिन गंभीर समस्या है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर मेडिकल टेस्ट और लाइफस्टाइल सुधार से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कौन से मेडिकल टेस्ट हैं, जिसके जरिए फैटी लिवर का पता चलता है।
Written by Ashu Kumar Das|Published : February 9, 2026 12:43 PM IST
What medical tests should be done for fatty liver in children: आज के समय में फैटी लिवर (Fatty Liver) सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, जंक फूड, मोबाइल-टीवी की आदत और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण बच्चों में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के सीनियर फिजिशियन डॉ. निशांत सिंह (Dr. Nishant Singh, Sr. Consultant- Physician, Yatharth Hospital Noida Extension) का कहना है कि बच्चों में फैटी लिवर की समस्या को मेडिकल भाषा में NAFLD (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease) कहा जाता है।
सबसे चिंता की बात यह है कि बच्चों में फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में बिना लक्षणों के भी हो सकता है। ऐसे में सही समय पर मेडिकल टेस्ट ही इस बीमारी की पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका हैं। आज डॉ. निशांत सिंह से जानेंगे बच्चों में फैटी लिवर की पहचान करवाने के लिए कौन से मेडिकल टेस्ट करवाने (Baccho main Fatty liver ke Mamle) चाहिए।
बच्चों में फैटी लिवर क्या होता है?
जब बच्चे के लिवर (यकृत) की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। अगर समय रहते इसका पता न चले, तो यह आगे चलकर लिवर में सूजन, लिवर डैमेज, सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर तक का कारण बन सकता है।
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)- डॉक्टर का कहना है कि लिवर फंक्शन टेस्ट एक ब्लड टेस्ट होता है, जिससे यह पता चलता है कि बच्चे का लिवर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। लिवर फंक्शन टेस्ट के जरिए बच्चों में लिवर की बीमारियों का इलाज आसानी से किया जा सकता है। इस टेस्ट के जरिए ALT (SGPT), AST (SGOT), ALP, Bilirubin और Albumin की जांच की जाती है।
अल्ट्रासाउंड एब्डोमेन (USG)- डॉक्टर का कहना है कि बेसिक टेस्ट के जरिए अगर फैटी लिवर की बीमारी का पता नहीं चलता है, तो अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी जाती है। अल्ट्रासाउंड एक इमेजिंग टेस्ट है, जिसमें साउंड वेव्स की मदद से लिवर की तस्वीर बनाई जाती है। अल्ट्रासाउंड एब्डोमेन टेस्ट लिवर का आकार बढ़ा हुआ, लिवर ज्यादा चमकीला (Bright Liver) और लिवर में कितना फैट फैट जमा हुआ है, इसकी जानकारी देता है।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट- लिपिड प्रोफाइल एक ब्लड टेस्ट है, जो शरीर में फैट के लेवल को मापता है। डॉ. निशांत सिंह का कहना है कि लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए बच्चे के शरीर का Total Cholesterol, LDL (Bad Cholesterol), HDL (Good Cholesterol) और Triglycerides का पता चलता है। इस टेस्ट के जरिए बच्चं में सिर्फ
ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट- ये टेस्ट करवाने से बच्चों के शरीर में शुगर मेटाबॉलिज्म की स्थिति का पता चलता है। डॉक्टर का कहना है कि इस टेस्ट में बच्चों का Fasting Blood Sugar, Post Prandial Blood Sugar और HbA1c (3 महीने की औसत शुगर) जांचा जाता है। इस टेस्ट के जरिए बच्चे में इंसुलिन रेसिस्टेंस, प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा पता चलता है। डॉक्टर बताते हैं कि जिन बच्चों में ज्यादा मोटापा है, उनके पेरेंट्स को नियमितर रूप से ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। ये टेस्ट करवाने से बच्चों में लिवर, हार्ट और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी बीमारियों का पता जल्दी चलता है।
फाइब्रोस्कैन (FibroScan)- फाइब्रोस्कैन एक एडवांस, नॉन-इनवेसिव टेस्ट है, जो लिवर में फैट और लिवर की सख्ती (Fibrosis) को मापता है। ये टेस्ट लिवर में फैट कितना जमा है और लिवर में फाइब्रोसिस तो नहीं शुरू हो गया है या नहीं इसकी जानकारी देता है। बच्चों में फैटी लिवर का पता लगाने के लिए फाइब्रोस्कैन, अल्ट्रासाउंड और LFT में गड़बड़ी मिले तब किया जाता है। फाइब्रोस्कैन करवाने से डॉक्टर को बीमारी की गंभीरता का पता चलता है।
बच्चों को फैटी लिवर होने पर क्या करें?
निष्कर्ष
बच्चों में फैटी लिवर एक साइलेंट लेकिन गंभीर समस्या है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर मेडिकल टेस्ट और लाइफस्टाइल सुधार से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। वर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर और फाइब्रोस्कैन- ये 5 मेडिकल टेस्ट फैटी लिवर की पहचान और मॉनिटरिंग में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।
Add The HealthSite as a Preferred Source
Highlights
फैटी लिवर बच्चों के लिए घातक बीमारी बन सकता है।
फैटी लिवर का पता लगाने के लिए मेडिकल टेस्ट जरूरी है।
पेरेंट्स को साल में 1 बार फैटी लिवर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
Don’t Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today!
Subscribe Now
Enroll for our free updates
Please confirm that you agree to the terms and conditions.
Thank You for Subscribing
Thanks for Updating Your Information
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
We noticed that you are running an ad-blocker.
Ads helps us keep our content free. Please add us to your whitelist or disable your ad-blocker.