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शुरू में कैंसर के लक्षण नहीं दिखे तो बन सकता है साइलेंट किलर, एक्सपर्ट्स से जानें क्या करना चाहिए

Early Symptoms of Cancer: कभी-कभी कैंसर कोई लक्षण प्रकट नहीं करता और साइलेंट किलर बनकर अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है, एक्सपर्ट्स ने बताया कि इसकी समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी है।

शुरू में कैंसर के लक्षण नहीं दिखे तो बन सकता है साइलेंट किलर, एक्सपर्ट्स से जानें क्या करना चाहिए
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Sanjay Sharma

Written by Mukesh Sharma |Updated : March 9, 2026 5:39 PM IST

Cancer Symptoms Often Missed: कैंसर का नाम सुनते ही दिमाग में डर बैठ जाता है, जो कि स्वाभाविक भी है क्योंकि कैंसर जानलेवा हो सकता है। लेकिन एक चीज है, जो कैंसर को और ज्यादा जानलेवा और घातक बनाता है। वह है कैंसर के शुरुआत में लक्षण न दिखना। बहुत ही मामलों में ऐसा देखा है कि कैंसर का आमतौर पर तब पता चलता है, जब शरीर में मेटास्टेसाइज्ड हो चुका होता है यानी शरीर के अन्य हिस्सों में फैलना शुरू हो चुका होता है। यह कैंसर की सबसे खतरनाक स्टेज होती है, जिसमें मरीज की ट्रीटमेंट की संभावना काफी कम हो जाती है और मृत्यु का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर संजय शर्मा ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी, जिनके बारे में हम इस लेख में आगे जानने वाले हैं।

कैंसर एक एक साइलेंट किलर है। यह शरीर के अंदर बिना दर्द और बिना कोई भी लक्षण प्रकट किए बढ़ता चला जाता है। कई तरह के कैंसर ऐसे हैं, जिनके कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते। इस वजह से डॉक्टर तक पहुंचने से पहले यह रोग खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका होता है। कैंसर जब शुरू हुआ है, उस समय उसका इलाज सबसे ज्यादा कारगर होता है। यह जब तक छोटा होता है और एक ही जगह पर स्थित होता है, तब तक इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए किसी भी ऐसे लक्षण को लंबे समय तक इग्नोर नहीं करना चाहिए, जो कैंसर का मामूली सा भी संकेत दे सकते हों जैसे -

लगातार खांसी रहना, खांसी के साथ खून आना, अचानक से वजन कम होने लगना और शरीर के किसी हिस्से में दर्द रहना आदि। जरूरी नहीं है कि ये लक्षण शरीर के किसी हिस्से में कैंसर होने का ही संकेत हों, ये किसी अन्य किसी बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं लेकिन समय रहते पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

Dr. Sanjay Sharma, Consultant - General and Oncological Surgery, Manipal Hospital, Jaipur

कैंसर के शुरुआती लक्षण

  • असामान्य गांठ या सूजन - शरीर में कोई भी असामान्य गांठ या सूजन दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज न करें, फिर चाहे उसमें दर्द हो या नहीं।
  • लगातार खांसी रहना - अगर तीन हफ्ते से अधिक समय तक खांसी बनी रहे या आवाज बैठी रहे, तो डॉक्टर की सलाह लें।
  • मलत्याग की आदतों में बदलाव - अगर टॉयलेट जाने के समय व अवधि में बड़ा बदलाव हो, जो लंबे समय तक बना रहे या फिर मल के साथ खून आने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • बिना वजह वजन कम होना - अगर आहार में परिवर्तन किए बिना तेजी से वजन कम होने लगे, तो तुरंत उसका कारण पता करें।
  • लगातार थकान बनी रहना - अगर आराम करने के बाद भी थकान बनी रहे या फिर बिना कारण के दर्द महसूस हो, तो अपने डॉक्टर को बताएं।

कैंसर शरीर में बताकर नहीं आता है। इसकी पहचान करने के लिए नियमित तौर से स्वास्थ्य जांच, उम्र के अनुरूप स्क्रीनिंग, और जोखिमों के बारे में जागरूकता जरूरी है। जैसे ही शरीर में कोई परिवर्तन दिखाई दे, तुरंत उस पर ध्यान दें। इससे जान बचाने में काफी मदद मिलती है। हल्की खांसी या थकान को नजरअंदाज करना आसान है, पर डॉक्टर का परामर्श किसी जोखिम की संभावना को खत्म करने और एक सुकून भरा जीवन प्रदान करने में काफी मदद करता है। अपने शरीर के सिग्नलों को पहचान कर और उन पर तुरंत कार्रवाई करके आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं और एक सेहतमंद जीवन जी सकते हैं।

(और पढ़ें - कैंसर की आखिरी स्टेज का क्या मतलब है?)

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समय पर जांच क्यों जरूरी?

लक्षण दिखाई देने से पहले सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा तरीका स्क्रीनिंग है। लोगों को समय-समय पर स्क्रीनिंग कराते रहना चाहिए। इससे कोई भी शारीरिक समस्या होने से पहले ही कैंसर पूर्व होने वाले बदलावों या माइक्रोस्कोपिक सेल्स को पहचानने में मदद मिलती है। मैमोग्राम, पैप स्मियर, एच.पी.वी टेस्ट, कोलोनोस्कोपी, फेफड़ों के कैंसर के लिए लो-डो सीटी स्कैन, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लिए पी.एस.ए टेस्ट कुछ स्क्रीनिंग के तरीके हैं, जो तुरंत बीमारी की पहचान करके जान बचाने में मदद कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए तुरंत निदान और स्क्रीनिंग सबसे किफायती तरीकों में शामिल हैं।

(और पढ़ें - दुनिया का सबसे खतरनाक कैंसर कौन सा है)

कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी

भारत जैसे देश में रोग के शुरुआती चरणों को लेकर अक्सर जागरूकता की कमी होती है। कई सारे लोग दर्द, निदान या इलाज के डर से स्क्रीनिंग से बचते हैं। कई लोग यह मानते हैं कि कैंसर की स्क्रीनिंग केवल बुढ़ापे में करानी चाहिए। इन भ्रांतियों के कारण निदान में विलंब हो जाता है। कई लोग गांठ के दिखने और महसूस होने का इंतजार करते हैं, लेकिन तब तक कैंसर फैल चुका होता है। स्क्रीनिंग की मदद से इसे रोका जा सकता है और रोग को वहीं पकड़ा जा सकता है, जहां से ये शुरू हुआ है।

जल्दी पहचान से बेहतर नतीजे

कैंसर की पहचान तुरंत हो जाए, तो मरीज की जान बचाने और इलाज के बेहतर नतीजे मिलते हैं। अगर कैंसर की पहचान तुरंत हो जाती है, तो उससे डॉक्टर, मरीज व उसके परिवारजनों को कुछ राहत मिल सकती है जैसे

  • इलाज ज्यादा कारगर होगा - ट्यूमर छोटा होता है और एक ही जगह स्थित होता है, इसलिए सर्जरी, रेडियेशन या दवाई के परिणाम ज्यादा सफल होते हैं।
  • इलाज में कॉम्पिकेशन कम होंगी - कैंसर शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाता है, तो इलाज थोड़ा आसान रहता है और जटिलताएं होने का खतरा कम होता है। साथ ही इलाज के बेहतर परिणाम मिलते हैं।
  • जान बचने की ज्यादा संभावना - कैंसर की पहचान तुरंत हो जाए, तो जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर जितना अधिक फैला होता है, उसका इलाज उतना ही अधिक मुश्किल होता चला जाता है।
  • जीवन बेहतर होता है - अगर इलाज समय पर शुरू हो जाए तो कैंसर से अंगों पर पड़ने वाला नुकसान कम हो जाता है और मरीज को अपेक्षाकृत बिस्तर पर भी कम समय तक रहना पड़ता है जो उसके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है।

इलाज पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी

समय पर रोग की पहचान होने पर स्वस्थ होने का पूरा अनुभव बेहतर होता है। गंभीर मामलों में इलाज भी कठिन हो जाता है, जिसका शरीर पर उतना ही गहरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन अगर रोग शुरुआत में ही पहचान लिया जाता है, तो विशेषज्ञ विधियों द्वारा उसे ठीक किया जा सकता है। शरीर के स्वस्थ अंगों को सुरक्षित रखते हुए केवल रोगग्रस्त टिश्यू को काटकर निकाला जा सकता है। टारगेटेड रेडियेशन या लोकलाईज़्ड रिमूवल से ही काम चल जाता है और बड़ी सर्जरी से बचा जा सकता है। छोटी सर्जरी के बाद शरीर भी तेजी से स्वस्थ होता है, जिससे एक बेहतर जीवन प्राप्त होता है। छोटे से हिस्से के इलाज में ज्यादा चीरे की जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिए मरीज बहुत जल्दी अपना सामान्य जीवन फिर से शुरू कर सकता है।

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।