इस थीम पर मनाया जा रहा वर्ल्ड हीमोफीलिया डे 2020, जानें कैसे होता है इस बीमारी का इलाज

विश्वभर में 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया दिवस  (World Haemophilia Day in 2020) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य विश्वभर में लोगों को हीमोफीलिया के प्रति जागरुक करना है। यह एक ब्लीडिंग डिसोर्डर है, जिसमें व्यक्ति को चोट लगने पर ब्लीडिंग बंद नहीं होती है। इस बीमारी को लेकर बहुत से लोग जागरुक नहीं है। विश्व के अधिकतर लोग इस बीमारी का नाम तक नहीं सुने होंगे। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में करीब 80 प्रतिशत लोग हीमोफीलिया से बेखबर हैं।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : April 17, 2020 9:19 AM IST

World Haemophilia Day in 2020: विश्वभर में 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया दिवस  (World Haemophilia Day in 2020) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य विश्वभर में लोगों को हीमोफीलिया के प्रति जागरुक करना है। यह एक ब्लीडिंग डिसोर्डर है, जिसमें व्यक्ति को चोट लगने पर ब्लीडिंग बंद नहीं होती है। इस बीमारी को लेकर बहुत से लोग जागरुक नहीं है। विश्व के अधिकतर लोग इस बीमारी का नाम तक नहीं सुने होंगे। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में करीब 80 प्रतिशत लोग हीमोफीलिया से बेखबर हैं। 17 अप्रैल 2020 को पूरे विश्वभर में इस दिवस की 30वीं एनीवर्सिरी है। यानि 17, अप्रैल, 1990 में इस दिवस को पहली बार मनाया गया था।

इस साल क्या है थीम?

लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक कराने के लिए इस साल वर्ल्ड हीमोफीलिया डे का थीम गेट+इंवॉल्व (Gate+involve) है। इस थीम का मतलब है आप चाहे रोगी हैं या फिर रोगी के परिवार के सदस्य,  देखभाल करने वाले, कॉर्पोरेट पार्टनर, स्वयंसेवक या स्वास्थ्य सेवा देने वाले कोई स्वास्थ्य कर्मी। हर किसी को इस अनुवांशिक बीमारी के बारे में अवगत कराना उनका उद्देश्य होना चाहिए।

कैसे होती है इस बीमारी की पहचान

इस अनुवांशिक बीमारी की पहचान जेनेटिक टेस्टिंग के द्वारा की जाती है। हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों के लिए यह टेस्ट काफी विश्वसनीय माना जाता है। इसकी सुविधा बहुत ही कम जगहों पर उपलब्ध है।

क्या हीमोफीलिया का इलाज है संभव?

हीमोफीलिया का उपचार जीन थेरेपी के जरिए किया जाता है। हाल ही में जीन थेरेपी की दवा इस विकार से रोगियों को छुटकारा दिलाने में कामयाब हुई है। इस अनुवांशिक बीमारी के चलते, ब्लड में थक्का बनना बंद हो जाता है। अगर मरीज को मामूली चोट लग भी जाए, तो ब्लीडिंग को रोकना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ-साथ आंतरिक रक्तस्त्राव का भी खतरा हमेशा बना रहता है। जिसकी वजह से रोगियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

विरासत में मिलता है हीमोफीलिया, सतर्क रहना है बहुत ही जरूरी

शोधकर्ताओं के मुताबिक, हीमोफीलिया A से पीड़ित मरीजों पर एक साल तक जीन थेरेपी की दवा चलाई जाती है। इस थेरेपी से ब्लड का थक्का बनने में मददगार प्रोटीन का स्तर सामान्य करने की कोशिश की जाती है, जिससे इस बीमारी से ग्रसित मरीज को ठीक किया जा सके। इस बारे में ब्रिटेन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन पासी ने कहा, "हमारे पास अब यकीनन ऐसी क्षमता है जिसमें एकल उपचार के उपयोग से हीमोफीलिया पीड़ितों में बदलाव लाया जा सकता है। यह बड़ी उपलब्धि है।"

World Hemophilia Day 2020: हीमोफीलिया क्या है? जानिए इसके लक्षण और बचाव

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