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Urine me Infection Kaise Hota Hai: गर्मी और बरसात के मौसम में वजाइना से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस मौसम में पसीना, नमी और गर्म वातावरण बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करते हैं। टाइट कपड़े, बार-बार गीले अंडरगारमेंट पहनना और स्वच्छता में लापरवाही वजाइनल इंफेक्शन, खुजली, जलन और बदबू जैसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी परेशानी सामने आती है और वो है, यूटीआई यानी यूरिन इन्फेक्शन की। लेकिन यूरिन इन्फेक्शन क्या है? किसको इसका अधिक खतरा होता है? और कैसे इससे बचाव किया जाए? आइए जानते हैं।
अगर आपके मन में भी यही सवाल है कि यूटीआई क्या है? तो आपको बता दें कि यूरिन इन्फेक्शन (UTI) एक आम समस्या है, जिसमें यूरिनरी सिस्टम के किसी हिस्से में बैक्टीरिया से संक्रमण हो जाता है। इसमें किडनी, ब्लैडर, यूरेटर और यूरेथ्रा शामिल होते हैं। ज्यादातर संक्रमण ब्लैडर और यूरेथ्रा में होता है। अगर यह किडनी तक पहुंच जाए, तो यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इस स्थिति को पायलोनेफ्राइटिस कहा जाता है। सही इलाज से यूटीआई ठीक हो सकता है, लेकिन लापरवाही से स्थिति बिगड़ सकती है।
(और पढ़ें - पुरुषों में यूटीआई होने का कारण)
1990 से 2019 तक यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) के मामलों में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन चुका है। इस बढ़ोतरी के कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण एंटीबायोटिक प्रतिरोध है, जो कृषि में एंटीबायोटिक के व्यापक उपयोग और पशुओं में उत्पन्न हुए प्रतिरोधी बैक्टीरिया के कारण मानव शरीर में संक्रमण फैलाता है। इसके अलावा, मौसम भी एक बड़ा जोखिम फैक्टर है। खासकर गर्म और गीले मौसम जैसे मानसून में नमी, वाष्प, गीले कपड़े पहनना और स्वच्छता की कमी यूटीआई के मामलों को बढ़ावा देती है, जो बच्चों में अधिक देखा जाता है। इसके साथ ही, गैर-स्वस्थ जीवनशैली जैसे पर्याप्त पानी न पीना, गीले कपड़े पहनना और बाथरूम में असमय या अनियमित व्यवहार भी इस समस्या को बढ़ाता है। इन सभी कारणों से यूटीआई के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
यूरिन इंफेक्शन का खतरा पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को होता है। महिलाओं में यूरेथ्रा (मूत्र नली) छोटी होती है और यह गुदा के पास होती है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से मूत्र मार्ग तक पहुंच जाते हैं। इसी कारण महिलाओं को यूरिन इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। कई आंकड़े बताते हैं कि लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं अपने जीवन में कम से कम एक बार इस संक्रमण का सामना करती हैं। वहीं प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव और बढ़ता ब्लैडर पर दबाव यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) का जोखिम बढ़ाते हैं। मेनोपॉज के बाद एस्टोजन की कमी से मूत्र मार्ग की त्वचा और ऊतक कमजोर और संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों की माने तो मानसून या नमी वाले क्षेत्रों में रहने वाले छोटे बच्चे, जिनकी स्वच्छता का ठीक से ध्यान नहीं रखा जाता, यूटीआई के अधिक खतरे में रहते हैं। गीले और अस्वच्छ कपड़े, कम पानी पीना और संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया बच्चों में तेजी से संक्रमण का कारण बनते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ ब्लैडर की कार्यक्षमता और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे यूटीआई का खतरा बढ़ जाता है। मूत्र असंतुलन और कैथेटर का उपयोग भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ाता है, क्योंकि ये स्थितियां बैक्टीरिया के प्रवेश और वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल बनाती हैं।
डायबिटीज में यूरिन में ग्लूकोज का उच्च स्तर बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है। साथ ही यह स्थिति प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता घट जाती है और यूटीआई का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
यूरिन इन्फेक्शन के शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, लेकिन समय पर इन्हें पहचानकर परेशानी से बचा जा सकता है। प्रमुख लक्षणों की बात करें तो, बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना और पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना शामिल है। कभी-कभी पेशाब में तेज गंध आती है या उसका रंग गाढ़ा और धुंधला नजर आता है। कुछ मामलों में पेशाब में खून भी दिखने को मिलता है। वहीं पेशाब करने का बाद भी ऐसा महसूस होना की आपने अधूरा ही किया है, पेट के निचले हिस्से या कमर में दर्द, और थकावट भी यूटीआई के संकेत हो सकते हैं। महिलाओं में यह योनि के पास जलन या असहजता महसूस यूरिन इन्फेक्शन का संकेत होता है। वहीं यूरिन इन्फेक्शन के सबसे समान्य लक्षणों की बात करें तो यह अक्सर बुखार, ठंड लगना, मतली और पीठ में तेज दर्द के रूप में दिखते हैं, जिसे समय से पहचानना जरूरी है।
यूटीआई के इलाज में संक्रमण के प्रकार और मरीज की स्थिति के आधार पर विभिन्न एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है, जैसे- ट्राइमेथोप्रिम–सल्फामेथोक्साजोल, फॉस्फोमाइसिन,नाइट्रोफ्यूरेंटोइन और सेफालेक्सिन। फ्लुओरोकिनोलोन्स जैसे सिप्रोफ्लोक्सासिन को सरल यूटीआई में प्राथमिक विकल्प के रूप में आमतौर पर नहीं दिया जाता। गंभीर मामलों, जैसे किडनी संक्रमण में, आईवी एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ सकती है। 2025 में अमेरिका में यूटीआई इलाज के लिए नए एंटीबायोटिक जिपोटिडासिन को मंजूरी मिली है, जो पिछले 30 वर्षों में पहला नया विकल्प है और प्रतिरोधी संक्रमणों से लड़ने में मददगार माना जा रहा है।
फेनाजोपीरिडिन जैसी दवाएं पेशाब में जलन और दर्द को पहले कुछ दिनों तक आराम देती हैं, लेकिन ये संक्रमण को ठीक नहीं करतीं। पेल्विक या पेट दर्द में हीटिंग पैड लगाने से राहत मिलती है। बुखार या दर्द के लिए इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन लेना उपयोगी होता है। ये उपाय लक्षणों को कम करते हैं और मरीज को आराम पहुंचाते हैं, लेकिन संक्रमण के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा बताए गए एंटीबायोटिक्स लेना जरूरी है।
अधिक पानी पीना (दिन में 6–8 ग्लास) यूरिनरी ट्रैक्ट से संक्रमण को बाहर निकालने में मदद करता है। वहीं, कैफीन, अल्कोहल और सीटरस युक्त पेय से बचना चाहिए क्योंकि ये ब्लैडर को उत्तेजित कर सकते हैं और लक्षण बढ़ा सकते हैं। गर्म स्नान या कंदीलों से भी परहेज करना जरूरी है। इसके बजाय हल्का पानी और सौम्य, अन्सेंटेड साबुन का उपयोग करना बेहतर होता है, जिससे त्वचा और मूत्र मार्ग की सुरक्षा बनी रहती है और संक्रमण की संभावना कम होती है।
डॉक्टर कुछ मामलों में हल्के डोज के एंटीबायोटिक्स को कई महीनों तक दीर्घकालिक रूप से दे सकते हैं, ताकि संक्रमण को रोका जा सके। सेक्स के बाद एकल डोज़ एंटीबायोटिक भी कभी-कभी उपयोग किया जाता है। मेनोपॉजल महिलाओं के लिए मौखिक या वैजाइनल एस्ट्रोजन थेरेपी उपयुक्त होने पर फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा, यूरोम्यून नामक वैक्सीन कुछ सीमित अध्ययनों में यूटीआई की रोकथाम में सहायक पाया गया है, लेकिन इसके व्यापक उपयोग के लिए और शोध की जरूरत है।
यूरिन इन्फेक्शन से बचाव के लिए आपको अपने जीवन में कुछ सरल आदतों को अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले, आपको दिनभर खूब पानी पीना चाहिए, ताकि बैक्टीरिया पेशाब के जरिए बाहर निकल सकें। पेशाब को कभी भी रोककर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे बैक्टीरिया पनप सकते हैं। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, खासकर टॉयलेट के बाद आगे से पीछे की ओर साफ करें, ताकि बैक्टीरिया यूरेथ्रा तक न पहुंचें। यौन संबंध के बाद पेशाब करना भी संक्रमण से बचाव में मदद करता है। सही और हमी सोखने वाले वस्त्र पहनें और रोजाना कपड़े बदलें। महिलाएं खासकर बहुत अधिक टाइट कपड़े पहनने से बचें। वहीं स्प्रे, पाउडर या सुगंधित साबुन का उपयोग प्राइवेट पार्ट्स पर कतई न करें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
अपने जननांगों की समय-समय पर सफाई न करना या किसी यूरिन इंफेक्शन से ग्रसित व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाना यूटीआई का कारण बन सकता है।
पेशाब में जलन, दर्द, पेशाबमें झाग बनना, बार-बार पेशाब आना आदि यूटीआई का संकेत हो सकता है।