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आजकल की तेज-रफ्तार जिंदगी और तनाव की वजह से कई बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। इसमें थायराइड रोग भी एक है। थायराइड एक आम समस्या है, लेकिन यह गंभीर बनती जा रही है। भारत में लाखों-करोड़ों लोग थायराइड से पीड़ित हैं। थायराइड से महिलाएं, पुरुषों की तुलना में ज्यादा प्रभावित होती हैं। आपको बता दें कि थायराइड, गले के सामने वाले हिस्से में स्थित एक छोटी-सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है।
यह ग्रंथि T3 और T4 हार्मोन बनाती है। जब यह ग्रंथि जरूरत से ज्यादा या कम हार्मोन बनाती है, तब थायराइड रोग विकसित होता है। थायराइड शरीर के कई हिस्सों जैसे- दिल की धड़कन, वजन, पाचन-तंत्र, मस्तिष्क और पीरियड्स को प्रभावित करता है। वैसे तो थायराइड रोग को दवाइयों और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से कंट्रोल में किया जा सकता है। लेकिन, क्या यह बीमारी खतरनाक बन सकती है?

थायराइड अपने आप में खतरनाक या जानलेवा बीमारी नहीं है। लेकिन, अगर थायराइड का समय पर इलाज न किया जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों को न्यौता दे सकता है। इन स्थितियों में बनता है थायराइड खतरनाक-
हाइपरथायराइडिज्म की वजह से दिल की धड़कन काफी तेजहो जाती है। इसकी वजह से हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है। थायराइड हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और अनियमित धड़कन का खतरा बढ़ाता है।
थायराइड महिलाओं में इनफर्टिलिटी का एक मुख्य कारण होता है। थायराइड से पीड़ित महिलाओं को गर्भधारण में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, इन महिलाओं में गर्भपात और समय से पहले डिलीवरी का खतरा भी बना रहता है।
थायराइड तक खतरनाक हो सकता है, जब इसकी वजह से मानसिक सेहत पर असर पड़ता है। थायराइड का दिमाग पर भी सीधा असर पड़ता है। यह डिप्रेशन, एंग्जाइटी, चिड़चिड़ापन और कमजोर याद्दाश्त का कारण बन सकता है।
जब थायराइड की वजह से शरीर का तापमान लगातार गिरता जाता है तो यह स्थिति भी बेहद खतरनाक मानी जाती है। ऐसा हाइपोथायराइडिज्म की स्थिति में होता है। इस स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
कई बार थायराइड रोगियों को तेज बुखार से गुजरना पड़ता है। इस स्थिति को थायराइड स्टॉर्म कहा जाता है। यह हाइपरथायराइडिज्म की एक जानलेवा अवस्था होती है। इस स्थिति में तेज बुखार के साथ दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है।
थायराइड की जांच के लिए कुछ जरूर टेस्ट किए जाते हैं। इसमें शामिल हैं-
थायराइड की जांच के लिए सबसे पहले डॉक्टर TSH टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इसमें T3 और T4 लेवल की जांच की जाती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर गले का अल्ट्रासाउंड कराया जा सकता है।

Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।