Endoscopy: बिना चीरा लगाए शरीर की अंदरूनी बीमारी को ढूंढकर खुद उसका इलाज कर देगी ये खास मेडिकल प्रोसीजर

What is the use of endoscopy: एंडोस्कोपी एसी खास प्रोसीजर है, जिसकी मदद से शरीर के अंदर की कई बीमारियों का पता लगाकर उनका इलाज भी किया जा सकता है। चलिए जानते हैं क्या है एंडोस्कोपी और इससे किन बीमारियों का इलाज किया जा सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : August 17, 2023 7:36 PM IST

What diseases can be detected by an endoscopy: एंडोस्कोपी एक तरह की टेस्ट प्रोसीजर है, जिसकी मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों में होने वाली समस्याओं जैसे ट्यूमर, सूजन, सीलिएक रोग, रक्तस्राव, अल्सर और घावों का पता लगाया जाता है। इसके साथ ही इस प्रक्रिया में कई और अज्ञात लक्षणों जैसे सीने में जलन, पेट में दर्द, रक्तस्राव, मतली, उल्टी और दर्द का भी पता लगाने में मदद मिलती है। आजकल तमाम तरह की अंदरूनी बीमारियां पनप रही है जिन का इलाज काफी दीर्घकालिक और कठिन होता है। अक्सर दवाइयों के अधिक उपयोग से हृदय एवं किडनी पर भी असर पड़ता है इसलिए एंडोस्कोपिक के माध्यम से बिना चीरा लगे शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच बहुत आराम से की जा सकती है।

कैसे काम करती है एंडोस्कोपी

इस प्रक्रिया में एक 'एंडोस्कोप' नाम के उपकरण का इस्तेमाल करते हुऐ शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच की जाती है। एंडोस्कोप एक लंबी, पतली और लचीली ट्यूब होती है, जिसके एक सिरे पर एक लाइट और एक कैमरा लगा होता है। कैमरा की मदद से ली गई तस्वीरें कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजी जाती हैं। आमतौर पर इस प्रक्रिया का उपयोग कुछ स्वास्थ्य मापदंडों के निदान के लिए किया जाता है। लेकिन कई जगह इसका उपयोग उपचार प्रदान करने के लिए भी किया जाता है।

क्यों और कैसे की जाती है

शरीर के अंदर कई प्रकार की बीमारियां पनपती हैं जिनके लिए एंडोस्कोप पर लगे कैमरे की मदद से शरीर के अंदर गले, गुदा मार्ग या मूत्र मार्ग एक पतला पाइप डाला जाता है। हालांकि, इससे पहले शरीर के उस भाग को एनेस्थीसिया के माध्यम से सुन्न कर दिया जाता है। इसमें मरीज को दर्द ना हो इसलिए बहुत ही छोटा कैमरा होता है और इसीलिए एंडोस्कोपी के दौरान मरीज को बेहोश करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। आज कल एंडोस्कोपिक में भी कई प्रकार की नई प्रक्रियाओं के माध्यम से मरीज को ठीक किया जाता है।

किन बीमारियों के इलाज में सक्षम

डॉ. सुकृत सिंह सेठी, कंसल्टेंट - ट्रांसप्लांट हेपेटोलॉजी, हेपेटोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (एडल्ट), नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम ने बताया कि एंडोस्कोपी प्रोसीजर में कुछ ऐसी नई विधि है जिनके द्वारा मरीज को बेहतर लाभ मिलता है और खासकर गैस्ट्रिक की समस्या के लिए मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है जिससे वह दवाई का उपयोग नहीं करता और उसके हार्ट को किडनी पर असर भी नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा हमारे अस्पताल में इन नई तकनीक के माध्यम से मरीजों को लाभ हुआ है। हालांकि, इसमें खर्च ज्यादा आता है परंतु भविष्य में जीवन सुरक्षित हो जाता है और किसी भी प्रकार की दवाइयां बाद में लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उन्होंने बताया कि यह विधि भारत के गिने-चुने दो-चार अस्पतालों में ही की जाती है। हालांकि हमने भी हाल ही में इसकी नई प्रक्रिया द्वारा मरीज को नया जीवन दिया है।

जीईआरडी का इलाज

एंडोस्कोपिक प्लिकेशन एक खास तरह की एंडोस्कोपिक प्रोजीसर है, जिसका की मदद से गैस्ट्रो इसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज का इलाज भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इस नई प्रोसीजर को जीईआरडीएक्स के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सेफ होने के साथ-साथ इससे इलाज होने के बाद व्यक्ति को भविष्य इससे जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है।

एंटी-रिफ्लक्स म्यूकोसेक्टोमी (एआरएमएस) गैस्ट्रिक कार्डिया में म्यूकोसल फ्लैप वाल्व के पुनर्निर्माण के लिए एक नवीन एंडोस्कोपिक प्रक्रिया है। डॉ. सुकृत सिंह सेठी ने बताया कि जब पेट में एसिड ग्रासनली में चला जाता है तो लोग एसिडिटी से पीड़ित हो जाते हैं। यदि दीवार क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो एसिड अन्नप्रणाली की दीवारों तक पहुंच जाती है और मरीजों को गंभीर दर्द होता है। यदि ऐसा नियमित रूप से होता रहे, तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है और सीने में दर्द, सूजन, जलन और कई अन्य जटिलताओं का कारण बनता है। तक कि गंभीर एसिडिटी की समस्या का इलाज केवल 30 मिनट में किया जाता है।

एंडोस्कोपी में लगने वाला समय व खर्च

एंडोस्कोपी करीब एक घंटे के भीतर हो जाती है। इससे पहले डॉक्टर कुछ चीजों का परहेज बता सकते हैं और कुछ दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि यह यह इस पर निर्भर करता है कि किस अंग के माध्यम से आपकी एंडोस्कोपी होनी है। इस एंडोस्कोपिक प्रक्रिया में लगभग 7 से 8 लाख रुपए तक खर्च आता है। हालांकि, यह भारत में कुछ अस्पताल कर रहे हैं जिसमें नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम ने भी सफलतापूर्वक प्रक्रिया करके यह उपलब्धि हासिल की है। इस प्रक्रिया के बाद आपको दवाइयों पर निर्भर नहीं होना पड़ता और भविष्य में आपकी किडनी और हार्ड तो सुरक्षित रहती हैं इसी कारण आप लंबा जीवन व्यतीत कर पाते हैं।

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