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कई बच्चों के बचपन से ही टेढ़े-मेढ़े दांत होते हैं या उनके दांत ज्यादा ही बाहर निकले होते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए डेंटल ब्रेसेज एक बेहतर विकल्प है। हालांकि सवाल यह है कि बहुत छोटे बच्चों के मामले में एक विकल्प सही है क्या? फोर्टिस हॉस्पिटल में कंसल्टेंट डेंटिस्ट्री डॉक्टर सुनील वासुदेवआपको इस बारे में जानकारी दे रहे हैं।
डेंटल ब्रेसेज के लिए सही उम्र
डॉक्टर के अनुसार, बच्चों के लिए डेंटल ब्रेसेज की सही उम्र 8 से 10 साल और उसकी गंभीरता पर निर्भर करती है। इस उम्र में सिर और मुंह का विकास हो रहा होता है जिस वजह से दांतों को एडजस्ट किया जा सकता है। हालांकि लोगों को 25 से 35 साल की आयु में इस इलाज से बचना चाहिए।
कुछ तरीके यह भी हैं
इनले और ओनले (Inlays and Onlay)- इसे इनडायरेक्ट फीलिंग के लिए जाना जाता है जिसे एक डेंटल लेबोरेटरी द्वारा तैयार किया जाता है।
कम्पोजिट बोन्डिंग- इसे सड़े या डैमेज हो चुके दांतों के लिए यूज किया जाता है और दांत के कलर का मटेरियल रिसंबल किया जाता है। इसे 16 साल की उम्र के बाद शुरू करने की सलाह दी जाती है।
डेंटल वेनेरर्स- इसे प्रत्येक रोगी के लिए अलग-अलग रूप बनाया जाता है जो कि उनके नैचुरल दांतों के समान होता है। इसे आमतौर पर मेडिकल-ग्रेड सिरेमिक से बनाया जाता है। इसकी सलाह 14 वर्ष और उससे अधिक की उम्र बच्चों को दी जाती है।
टीथ वाइटनिंग- इसे दांतों कि नैचुरल लुक देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि बच्चों के मुंह में जेल या अन्य पदार्थ जाने का खतरा होता है। इसलिए इसकी सलाह 11 साल के बाद ही दी जाती है।
इम्प्लान्ट्स- इसका इस्तेमाल दांतों को बदलने के लिए किया जाता है। इस प्रकिया के लिए पूरी तरह से विकसित जबड़े की जरूरत होती है, इसलिए इसके लिए 18 साल के बाद ही कराने की सलाह दी जाती है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock