ह्रदय रोगों (हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्‍ट, हार्ट फेलियर) के होने का कारण क्‍या है? जानिए इससे बचने के उपाय और उपचार

सही समय पर इलाज और प्रबंधन हृदय रोगों वाले व्यक्तियों में बेहतर स्वास्थ्य परिणामों का आधार बनता है।

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Written By: Atul Modi | Updated : November 18, 2020 5:01 PM IST

अध्‍ययनों से पता चला है कि हृदय रोग भारत में एक गुप्त महामारी की तरह उभरा है। लोग उन लक्षणों के बारे में कम ज्ञान रखते हैं जिनपर नज़र रखनी चाहिए और इसी वजह से जो लोग खतरे में आ जाते हैं क्योंकि उनके समय पर इलाज और प्रबंधन में देरी होती है। इन अंदरुनी हृदय रोग के संकेतों पर जागरूकता बढ़ाने और सही समय पर इसका निदान करने की आवश्यकता है। हार्ट अटैक पड़ने और घर पर अचानक कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित लोगों की संख्या में बहुत बढ़ोतरी हुई है। इसके कारणों में इलाज में देरी और किसी भी लक्षण की अनदेखी करना शामिल है। उदाहरण के तौर पर सीने की जलन को अक्सर एसिडिटी समझा जाता है।

इस बारे में बोलते हुए, सर गंगा राम हॉस्पिटल में डिपार्टमेंट ऑफ़ कार्डियोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अश्वनी मेहता ने कहा, "अस्वस्थ और बैठे रहने वाली जीवनशैली के कारण भारत में हृदय रोगों की घटनाओं में बहुत तेज बढ़ोतरी हुई है। पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में ऐसी जीवन शैली हृदय रोगों को बढ़ा सकती है। बहुत से लोग हृदय रोगों के संकेतों और लक्षणों से भी अनजान हैं जो अंदरुनी स्थिति के उपचार और प्रबंधन में देरी कर सकते हैं। ऐसे लोग पहले से ही कमज़ोर इम्यूनिटी से जूझ रहे हैं और हाल ही के कोरोना वायरस जैसे संक्रमणों की चपेट में आ गए हैं। छाती के बीच में दर्द जैसे लक्षणों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है यह दर्द आगे बाएं हाथ, कमर और दोनों कंधों के बीच फैल सकता है। अन्य संकेतों में जबड़े की तकलीफ और बेचैनी होना शामिल है।"

समय पर इलाज और प्रबंधन हृदय रोगों वाले व्यक्तियों में बेहतर स्वास्थ्य परिणामों का आधार बनता है। समय पर और सलाह के अनुसार दवाएं लेने के अलावा, यह देखना भी ज़रुरी है कि आप एक स्वस्थ जीवन शैली का पालन करें और किसी भी जटिलता से बचने के लिए ब्लड प्रैशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।

दिल की बीमारियों का उपचार कैसे करते हैं?

दिल से संबंधित जटिलताओं के लिए कुछ उपचारों में एंजियोप्लास्टी और कोरोनरी धमनी बाईपास ग्राफ्ट (CABG) शामिल हैं। एंजियोप्लास्टी खूने के बहाव में सुधार करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया में, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट एक लंबी, पतली ट्यूब (कैथेटर) को धमनी के संकुचित हिस्से में सम्मिलित करता है। यहां सर्जन एक लंबी, पतली ट्यूब का इस्तेमाल करता है, जिसे कैथेटर के रूप में आर्ट्री के संकुचित हिस्से में डाला जाता है। बाद में, इसे एक पिचके गुब्बारे पर लगाया गया एक पतला तार जाल (स्टेंट) कैथेटर के माध्यम से संकरे भाग में ले जाया जाता है।

गुब्बारा फुलाया जाता है, जो आर्ट्री वॉल के में बंद भाग को खोलता है, और फैली हूई स्टेंट आर्ट्री में एम्बेडेड छोड़ देते हैं। यूएसएफडीए द्वारा प्रमाणित स्टेंट हैं और दूसरी जटिलताओं वाले रोगियों में भी बेहद सुरक्षित हैं। सीएबीजी में, सर्जन शरीर के दूसरे हिस्से से एक पोत का उपयोग करके अवरुद्ध कोरोनरी धमनियों को बायपास करने के लिए एक ग्राफ्ट बनाता है जिससे रक्त अवरुद्ध या संकुचित कोरोनरी धमनी के चारों ओर खून के बहाव की अनुमति देता है।

दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने के उपाय

किशोरावस्था से ही स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए कुछ सुझाव दिल की समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं:

  • शुरुआत से ही स्वस्थ भोजन खाने की आदत डालें। पसंदीदा भोजन को सेहतमंद बनाने की कोशिश करें।
  • कुछ बदलाव स्नैक्स को और भी हेल्दी बना सकते हैं।
  • कैलोरी युक्त भोजन बच्चों को देने से बचें। उनका इलाज करना ठीक है लेकिन संयम से हाई फैट और हाई शुगर या नमकीन स्नैक्स को कम से कम खाएं।
  • बच्चों को शारीरिक रूप से एक्टिव होने का महत्व समझाएं। हर दिन कम से कम 60 मिनट की मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि का आनंद लें।
  • बैठने की आदत को कम करें। जबकि पढ़ना एक अच्छा विकल्प है। बच्चों को व्यस्त रखने के लिए आउटडोर और मजेदार एक्टिविटी करवाएं।

नोट: यह लेख सर गंगा राम हॉस्पिटल में डिपार्टमेंट ऑफ़ कार्डियोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अश्वनी मेहता से हुई बातचीत पर आधारित है।

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