Diabetes और Cardiomyopathy के बीच क्या संबंध है?

जानिए डायबिटीज से आपकी हार्ट मसल्स कैसे प्रभावित होती हैं और आपको हार्ट अटैक का खतरा होता है!

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Written By: Editorial Team | Published : November 14, 2017 10:00 AM IST

डायबिटीज के बहुत से रोगी विभिन्न तरह की हार्ट डिजीज से पीड़ित होते हैं। यह दिल की मांसपेशियों को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे दिल को कमजोर बनाता है। इन लोगों को हार्ट कार्डियोमायोपैथी का भी अधिक जोखिम होता है जो कि एक हार्ट मसल्स से जुड़ी बीमारी है। मुंबई स्थित गाडगे डायबिटीज सेंटर के डॉक्टर प्रदीप गाडगे आपको डायबिटीज और कार्डियोमायोपैथी के बीच संबंध बता रहे हैं।

डायबिटीज से कार्डियोमायोपैथी का खतरा कैसे है?

कार्डियोमायोपैथी में दिल की मसल्स बढ़ जाती हैं, मोटी और कठोर हो जाती हैं। इससे दिल को पंप करने और बॉडी को खून पहुंचाने में परेशानी होती है। डायबिटिक कार्डियोमायोपैथी का मतलब हार्ट मसल्स का चेंज होना है। यह मायोकार्डियम में स्ट्रक्चरल और फंक्शनल चेंज का कारण बनता है। मोटापे से ग्रस्त डायबिटीज के मरीजों के लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। इसके अलावा ख़राब ग्लाइकेमिक कंट्रोल वालों को भी कार्डियोमायोपैथी का अधिक जोखिम होता है।

क्या सभी डायबिटीज के मरीजों को इसका खतरा है?

मोटापा, हाई बीपी, हाई ब्लड शुगर लेवल, स्मोकिंग और ड्रिंकिंग आदि से डायबिटीज के मरीजों में कार्डियोमायोपैथी का खतरा बढ़ जाता है। वजन कंट्रोल, एक्सरसाइज, बेहतर डायट, पर्याप्त नींद, कम तनाव, शराब नहीं पीना आदि से डीसीएम का जोखिम कम किया जा सकता है।

क्या कार्डियोमायोपैथी से हार्ट फेलियर हो सकता है?

इससे हार्ट फेलियर का खतरा होता है। शुरू के स्टेज में कार्डियोमायोपैथी वाले लोगों के कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। लेकिन बाद के स्टेज में नजर आने लगते हैं। इसके लक्षणों में आराम करने पर भी सांस में कमी, पैरों, टखनों में सूजन, ब्लोटिंग, खांसी, मोटापा, असमान्य दिल की धड़कन, सीने में दर्द, और बेहोशी आना शामिल हैं।

कार्डियोमायोपैथी हार्ट मसल्स को कैसे प्रभावित करती है?

कार्डियोमायोपैथी तीन प्रकार के हैं और तीन तरीके से दिल को प्रभावित करते हैं। डाइलेट, हाइपरट्रॉफिक और रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी।

डाइलेट में पम्पिंग चैम्बर की लेफ्ट वेंट्रिकल कमजोर हो जाती हैं जिससे पम्पिंग क्षमता पर असर पड़ता है। लेफ्ट वेंट्रिकल बड़ी हो जाती है और दिल से रक्त प्रभावी तरीके से पंप नहीं हो पाता है।

हाइपरट्रॉफिक में हार्ट की मसल्स मोती हो जाती हैं। खासकर इससे से हृदय की मुख्य पम्पिंग चैम्बर (लेफ्ट वेंट्रिकल) की मसल्स प्रभावित होती हैं। हार्ट की मोटी मसल्स कठोर हो जाती हैं जिससे दिल के लिए ब्लड पंप नहीं हो पाता है।

रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी में मसल्स कठोर और कम लोचदार होती है। इसका मतलब यह है कि दिल अच्छी तरह से सांस लेने के दौरान छोटा या बड़ा नहीं हो पाता है और  दिल की धड़कन के बीच रक्त के साथ ठीक से विस्तार नहीं कर पाता है।

इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो अपने दिल की देखभाल करें। ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें। नियमित रूप से जांच कराते रहें। डायट और एक्सरसाइज से भी आपको मदद मिल सकती है। लेकिन आपको पहले यह जान लेना चाहिए कि आपके लिए कौन-सी एक्सरसाइज़ सही रहेगी। क्योंकि डायबिटीज और हार्ट डिजीज से पीड़ित लोग सभी एक्सरसाइज नहीं कर सकते हैं।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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