
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : April 28, 2026 5:25 PM IST
Medically Verified By: Dr. Vighnesh Y
Dengue and Viral fever
बदलते मौसम के साथ बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को बुखार भी आना शुरू हो जाता है। अक्सर लोग इसे वायरल से जोड़ लेते हैं। लेकिन कुछ मामलों में बदलते मौसम के साथ बुखार आना सिर्फ वायरल फीवर नहीं होता है। कई बार डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के कारण भी बुखार आ सकता है। मुख्य रूप से वायरल फीवर और डेंगू के बीच के अंतर को समझने में लोगों को काफी कठिनाई होती है। क्योंकि दोनों के कई लक्षण लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि डेंगू के कुछ खास लक्षण इसे सामान्य वायरल फीवर से अलग बनाते हैं। इस लेख में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे। इसकी जानकारी के लिए हमने यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन डॉ. विघ्नेश वाई से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं डेंगू और वायरल फीवर के बीच क्या है अंतर?
डॉक्टर कहते हैं कि वायरल फीवर आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होता है और इसके साथ सर्दी-खांसी, गले में खराश या नाक बहने जैसे-रेस्पिरेटरी लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। वहीं, डेंगू में बुखार अचानक और तेज आ सकता है, जो 102–104°F तक पहुंच सकता है।
डॉक्टर विघ्नेश का कहना है कि डेंगू की एक खास पहचान है शरीर में तेज दर्द हो सकती है। इसलिए कई लोग इसे ब्रेकबोन फीवर भी कहते हैं, क्योंकि डेंगू होने पर हड्डियों और जोड़ों में बहुत तेज दर्द होता है। इसके अलावा शरीर के अलग-अलग हिस्सों में भी दर्द हो सकता है, जैसे- आंखों के पीछे दर्द होना, मांसपेशियों और जोड़ों में काफी तेज दर्द होना, स्किन पर लाल चकत्ते होना, इत्यादि। वहीं, वायरल फीवर की बात करें, तो इसमें दर्द हल्का होता है और मुख्य रूप से सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण अधिक दिखाई देते हैं।
dengue and viral fever difference- AI Generated
डॉक्टर विघ्नेश का कहना है कि थोड़े आराम और सामान्य इलाज से वायरल फीवर 3 से 5 दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन डेंगू में बुखार उतरने के बाद भी स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए इस स्थिति में एक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है।
डेंगू में कुछ लक्षण खतरनाक हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे-
ये संकेत बताते हैं कि बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और तुरंत डॉक्टर की जरूरत है। डॉक्टर कहते हैं कि सिर्फ लक्षणों के आधार पर डेंगू और वायरल फीवर में फर्क करना हमेशा संभव नहीं हो सकता है। ऐसे में डेंगू की पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट जरूरी हो जाता है, ताकि इलाज समय से शुरु किया जा सके।
डॉ. विघ्नेश कहते हैं कि अगर आपको डेंगू का शक हो, तो खुद से दवा न लें। कुछ लोगों को बुखार और शरीर में दर्द होने पर तुरंत एस्प्रिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं लेने की आदत होती है। ऐसे लोगों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होती है। क्योंकि डेंगू में इस तरह की दवा देने ले ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है।
Diclaimer: डेंगू और वायरल फीवर के बीच अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि दोनों का इलाज और जोखिम अलग-अलग होते हैं। अगर आपको तेज बुखार के साथ शरीर में असहनीय दर्द, आंखों के पीछे दर्द या रैश जैसे लक्षण दिखें, तो इसे हल्के में न लें। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।