
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : April 29, 2026 4:50 PM IST
Medically Verified By: Dr. Ambrish Kumar Garg
Understanding the difference between biological age and chronological age
Biological age Vs Real age : आजकल उम्र को लेकर बातचीत सिर्फ बर्थ डेट तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर की असली स्थिति को समझना भी जरूरी है। इसी वजह से आज के समय में लोग रियल एज और बायोलॉजिकल एज पर बाते करने लगें हैं। आज के समय में इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल डॉक्टर्स भी काफी ज्यादा कर रहे हैं। आम भाषा में रियल एज को वह उम्र माना जाता है, जो जन्म के दिन से गिनी जाती है। वहीं, बायोलॉजिकल एज को शरीर की अंदरूनी सेहत और कार्यक्षमता के आधार पर मापा जाता है। इस विषय की अधिक जानकारी के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अंबरीश कुमार गर्ग से बातचीत की है। आइए क्या कहते हैं डॉक्टर-
सबसे पहले रियल एज को समझना जरूरी है। इसे क्रोनोलॉजिकल एज भी कहा जाता है। रियल एज पूरी तरह कैलेंडर पर डिपेंड होती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति का जन्म 1980 में हुआ होता है, तो उसकी रियल एज 2026 में 46 साल मानी जाती है। यह उम्र सभी के लिए समान तरीके से गिनी जाती है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाता।
बायोलॉजिकल एज की बात करें, तो यह शरीर की वास्तविक स्थिति का आईना माना जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि शरीर के अंग कितने स्वस्थ तरीके से काम कर रहे हैं, मेटाबॉलिज्म कितना मजबूत है और कोशिकाओं की उम्र किस स्तर पर होती है। कई बार यह देखा गया है कि किसी व्यक्ति की रियल एज 40 साल होती है, लेकिन उसकी बायोलॉजिकल एज 30 साल के बराबर मानी जाती है। इसका मतलब यह समझा जाता है कि उसका शरीर उसके उम्र के ज्यादा काम कर रहा है यानि वो अपनी उम्र से ज्यादा फिट है।
बायोलॉजिकल एज को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जो निम्न हैं-
खराब लाइफस्टाइल बायोलॉजिकल एज को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लेने से शरीर की उम्र को धीमा किया जाता है। वहीं, अगर आप धूम्रपान का सेवन अधिक करते हैं, स्ट्रेस काफी ज्यादा लेते हैं और शराब का काफी ज्यादा सेवन करते हैं, तो इससे आपकी बायोलॉजिकल एज प्रभावित बढ़ सकती है।
पर्यावरणीय कारकों को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदूषण के संपर्क में ज्यादा समय बिताने से शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसी तरह, क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या मोटापे को भी बायोलॉजिकल एज बढ़ाने वाला कारक माना जाता है।
आजकल बायोलॉजिकल एज को मापने के लिए कई आधुनिक टेस्ट भी इस्तेमाल किए जाते हैं। इसमें ब्लड टेस्ट, हार्मोन लेवल, और डीएनए से जुड़े मार्कर्स को जांचा जाता है। इन सभी के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि शरीर कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा होता है।
डॉक्टर कहते हैं कि सबसे अच्छी बात यह है कि बायोलॉजिकल एज को बदला जा सकता है, जबकि रियल एज को नहीं बदला जा सकता। इसका मतलब यह समझा जाता है कि अगर आप आज से बेहतर लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं, तो आपके शरीर को ज्यादा युवा बनाए रखा जा सकता है। इसके लिए बस आपको नियमित रूप से एक्सरसाइज, पोषण से भरपूर आहार, और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत होती है।
Disclaimer : रियल एज सिर्फ एक संख्या होती है, लेकिन बायोलॉजिकल एज शरीर की असली सेहत को दर्शाती है। इसलिए सिर्फ जन्मदिन मनाने पर ध्यान न दें, बल्कि शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने पर जोर देना जरूरी है। इससे आपका शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।