
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. V. P. Singh
बवासीर और फिशर
आपने बवासीर के बारे में सुना होगा, अधिकतर लोग मलत्याग के दौरान दर्द या खून आने पर इसे सीधे बवासीर यानी पाइल्स ही मान लेते हैं। यह मलाशय (Rectum) और गुदा (Anal Canal) की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में सूजन आने से होने वाली समस्या है। लेकिन बहुत से लोग एनल फिशर और बवासीर को एक ही समझ लेते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, आइए, नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड, जनरल सर्जन डॉ. वी.पी. सिंह से जानते हैं।
डॉक्टर कहते हैं कि एनल कैनाल से जुड़ी दो सबसे आम समस्याएं हैं- एनल फिशर और पाइल्स। हो सकता है आपको दोनों के लक्षण मिलते-जुलते महसूस हो, लेकिन मेडिकल पर्सपेक्टिव से ये दोनों बिल्कुल अलग स्थितियां हैं। आइए, पहले आपको इन दोनों के बीच के अंतर को बताते हैं।
इन दोनों स्थितियों के बीच के मुख्य अंतर को समझना सही उपचार के लिए बहुत जरूरी है, जो डॉक्टर ने बहुत ही आसान भाषा में समझाया है-
एनल फिशर: यह गुदा के अंदरूनी हिस्से की त्वचा या परत में आने वाला एक कट या दरार सा होता है। इसमें दर्द ऐसा महसूस होता है, जैसे त्वचा छिल गई हो। इसमें सबसे मुख्य लक्षण मलत्याग के समय या उसके बाद तेज जलन और दर्द होना है। इसमें मस्से नहीं बनते, सिर्फ स्किन फटी होती है।
पाइल्स (बवासीर): वहीं पाइल्स की बात करें तो यह गुदा और मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से में मौजूद रक्त वाहिकाओं के सूज जाने या बढ़ जाने से होता है। जब इन नसों में दबाव बढ़ता है, तो ये मस्सों की तरह सूज जाती हैं। इंटरनल पाइल्स में अक्सर दर्द नहीं होता, जबकि बाहरी पाइल्स में दर्द हो सकता है। लेकिन बिना दर्द के लाल खून बहना और गुदा के आसपास मस्से बनना इसका मुख्य लक्षण है।
गुदा से जुड़ी ये दोनों समस्याएं बहुत सामान्य हैं और किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। डॉक्टर के अनुसार "बदलती जीवनशैली, कम फाइबर वाला खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 50% से अधिक लोग अपने जीवन में कभी न कभी पाइल्स की समस्या का सामना करते हैं। वहीं, एनल फिशर भी बहुत आम है और यह छोटे बच्चों से लेकर वयस्कों तक किसी को भी हो सकता है। महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान के दौरान या डिलीवरी के बाद इन दोनों समस्याओं की संभावना अधिक देखी जाती है।"
एनल फिशर और पाइल्स दोनों के सबसे आम कारण क्रोनिक कब्ज है।
| एनल फिशर और बवासीर होने के प्रमुख कारण |
| एनल फिशर के कारण | पाइल्स के कारण |
| बहुत कड़ा या सूखा मल त्यागना | शौचालय में लंबे समय तक बैठे रहना |
| मलत्याग के समय बहुत अधिक जोर लगाना | मल साफ करने के लिए लगातार जोर लगाना |
| बार-बार दस्त (Diarrhea) होना | अधिक वजन या मोटापा |
| गुदा क्षेत्र की मांसपेशियों में अत्यधिक तनाव होना | गर्भावस्था में गर्भाशय का दबाव बढ़ना |
फिशर और पाइल्स (Image Credit- Gemini)
इलाज और बचाव के तरीके (Image Credit- ChatGPT)
शुरुआती मामलों में स्टूल सॉफ्नर (मल को नरम करने वाली दवाएं) और दर्द निवारक क्रीम से राहत मिलती है। लेकिन अगर समस्या क्रॉनिक (Chronic) हो जाए, तो लेजर ट्रीटमेंट या छोटी सर्जरी के माध्यम से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
नॉर्मल घरेलू उपचार या प्राथमिक आदतों में बदलाव से आराम न मिलने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। डॉक्टर कहते हैं कि इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए-
सही समय पर पहचान और उचित डॉक्टरी मार्गदर्शन से इन दोनों ही समस्याओं का सही तरीके से और सुरक्षित इलाज संभव है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको मलत्याग के दौरान लगातार दर्द, खून आना, गुदा के आसपास सूजन, तेज दर्द या अन्य कोई गंभीर लक्षण महसूस हों, तो खुद इलाज करने की बजाय तुरंत जनरल सर्जन या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लें। समय पर जांच और सही उपचार से एनल फिशर और पाइल्स जैसी समस्याओं का प्रभावी ढंग से इलाज संभव है।