खिलौने, कपड़े और टूथब्रश के द्वारा भी हो सकता है बच्चों के पेट में कीड़ों का संक्रमण, एक्सपर्ट से जानिए बचाव के उपाय

कृमि संक्रमण (Worm Infestation) क्‍या होता है और इससे बच्‍चे किए प्रकार प्रभावित होते हैं? कृमि संक्रमण से बचाव के कुछ उपाय क्‍या हो सकते हैं?

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Written By: Atul Modi | Published : February 10, 2022 2:07 PM IST

कृमि संक्रमण (Worm Infestation) मल में मौजूद कृमियों (कीड़ों) से फैलता है जो कि सूक्ष्‍म धागों के समान होते हैं। अक्सर, पेट के कीड़े बच्‍चों में ज्‍यादा पाए जाते हैं और एक-दूसरे में तेजी से फैलते भी हैं। इनका इलाज हो सकता है लेकिन बच्‍चों को कुछ बातों का ध्यान करना जरूरी होता है, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। हो सकता है कि आपके बच्‍चे के मल में भी ये मौजूद हों। ये कीड़े सफेद रंग के धागे जैसे दिखते हैं। कई बार ये बच्‍चे की गुदा मार्ग के आसपास भी होते हैं। अक्‍सर रात में जब बच्‍चा सो जाता है तो ये निकलते हैं और गुदा या योनि मार्ग के आसपास इनकी वजह से जलन या खुजली होती है। इनकी वजह से त्‍वचा में खुजलाहट पैदा हो सकती है जिसके कारण रात में बार-बार नींद टूटती है। कुछ अन्‍य लक्षण, जो आमतौर पर कम होते हैं, इस प्रकार हैं- वजन कम होना, गुदा मार्ग के आसपास त्‍वचा में जलन, सोते समय पेशाब कर देना।

कृमि (थ्रेडवर्म) कैसे फैलते हैं?

डॉ आशुतोष सिन्‍हा कहते हैं कि, कृमि (थ्रेडवर्म) के अंडे निगलने से ये कृमि फैलते हैं। होता यह है कि ये कृमि गुदा मार्ग के इर्द-गिर्द अपने अंडे देते हैं और उस जगह त्‍वचा में खुजली होने पर जब उंगलियों से खुजाते हैं तो अंडे नाखूनों और उंगलियों की त्‍वचा पर चिपक जाते हैं। ऐसी त्‍वचा/नाखून जिस चीज़ के भी संपर्क में आती है, जो चाहे खिलौने हों, कपड़े, टूथब्रश, किचन या बाथरूम की सतह, बिस्‍तर, भोजन, पालतू जंतु वगैरह तो अंडे उनसे चिपक जाते हैं और जब कोई दूसरा व्‍यक्ति ऐसी सतह को छूता है तो अंडे उसके हाथों से होते हुए, मुंह के संपर्क में आने पर शरीर में प्रवेश करते हैं। इन अंडों के निषेचन में दो सप्‍ताह का समय लगता है। बच्‍चों का इलाज कराने के बाद अगर दोबारा उनके मुंह तक अंडे पहुंचते हैं तो उनके फिर से संक्रमित होने की आशंका होती है। इसलिए यह जरूरी है कि बच्‍चों को बार-बार हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जाए।

कृमि संक्रमण से बचने के लिए घरों में क्‍या उपाय करें?

अक्‍सर दवाएं कृमियों को खत्‍म करती हैं लेकिन अंडों पर बेअसर होती हैं। ये अंडे शरीर से बाहर भी दो सप्‍ताह तक जीवित रहते हैं। इसलिए घरों में संक्रमण से बचने के लिए निम्‍न उपाय करने चाहिए:

क्‍या करें

  • हाथों को धोएं और नाखुनों के नीचे त्‍वचा को अच्‍छी तरह रगड़ें- भोजन करने से पहले और शौच के बाद या नैपीज़ बदलने के बाद अवश्‍य पालन करें
  • बच्‍चों को नियमित रूप से हाथ धोने के लिए प्रेरित करें
  • टूथब्रश का प्रयोग करने से पहले उन्हें पानी से अवश्‍य धोएं
  • नाखुनों को नियमित रूप से काटें और छोटा रखें
  • रात में सोते वक्‍त पहने वाले कपड़ों, चादर, तौलिया और सॉफ्ट टॉयज आदि की धुलाई गरम पानी में करें
  • वैक्‍यूम करें और भीगे कपड़े से धूल हटाएं
  • रात में सोते वक्‍त बच्‍चों को अंडरवियर अवश्‍य पहनाएं और सुबह उसे बदल दें

क्‍या नहीं करें

  • कपड़ों और बिस्‍तर आदि को झाड़ें नहीं, ऐसा करने से उन पर पड़े अंडें उड़कर दूसरी सतहों पर पहुंच सकते हैं
  • तौलिए शेयर न करें
  • नाखून न चबाएं और अंगूठा या उंगलियां नहीं चूसें

(इनपुट्स: डॉ आशुतोष सिन्‍हा, एचओडी एवं एडिशनल डायरेक्‍टर, पिडियाट्रिक्‍स, फोर्टिस अस्‍पताल, नोएडा)

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