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दुनिया में कम उम्र में हो रही युवाओं की मौतें एक गंभीर विषय बन गया है। कभी एक्सरसाइज के दौरान, कभी खेलकूद करते समय और कभी राह चलते अचानक हो रही मौतों की कोई एक वजह नहीं है। आमतौर पर लोग प्रदूषण और खराब वातावरण को हृदय समस्याओं के कारणों के तौर पर देखते हैं। मगर इस पर मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के कार्डियक सर्जन पद्मश्री डॉक्टर रमाकांत पांडा कहते हैं कि "युवाओं में अचानक मौत बहुत आम है क्योंकि उनमें अल्टरनेटिव सरकुलेशन विकसित नहीं होता है, जबकि बुजुर्गों में ऐसा नहीं है वह समय के साथ ब्लॉक के डेवलप करते हैं और उनके शरीर को इन परिवर्तनों से अभ्यस्त होने के लिए पर्याप्त समय मिलता है।"
एक्सरसाइज से पहले अपने शरीर को ठीक तरह से हाइड्रेट नहीं करने के बारे में युवाओं को सावधान करते हुए, डॉ पांडा कहते हैं, "जब आप शरीर को हाइड्रेट नहीं करते, और हैवी एक्सरसाइज करते हैं और पसीना बहाते हैं, तो इससे रक्त गाढ़ा हो जाता है और आपका खून जम सकता है जिससे ब्लड क्लॉट्स (थक्का) बन सकते हैं। साथ ही, अपनी क्षमता से अधिक एक्सरसाइज करने से शरीर में तनाव होता है, और यदि धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा हो तो इससे धमनी फटने तक का गंभीर खतरा हो सकता है। किसी भी प्रकार के कठिन व्यायाम को शुरू करने से पहले अपने हार्ट का चेकअप करना जरूरी है।
डॉ पांडा कहते हैं कि छाती में बेचैनी, काम करने पर सांस फूलना, हृदय की समस्या की संभावना की तरफ संकेत देते हैं और कारण जानने के लिए समय से चेकअप करने की आवश्यकता है। क्योकि जब तक लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक रोग बढ़ सकता है।
1. समय-समय पर स्क्रीनिंग टेस्ट से समस्या को शुरुआती अवस्था में ही पहचाना जा सकता है, ताकि दिल को गंभीर नुकसान होने से पहले उचित इलाज दिया जा सके। स्क्रीनिंग परीक्षणों में ईसीजी, 2डी इकोकार्डियोग्राम, तनाव परीक्षण, कोरोनरी कैल्शियम के लिए सीटी स्कैन शामिल हैं।
2. सामान्य व्यक्ति को 40 वर्ष की आयु के बाद या जिन्हें हृदय रोगों का खतरा ज्यादा है, को 30 वर्ष की आयु के बाद वर्ष में एक या 2 वर्ष में एक बार हृदय जांच की सलाह दी जाती है।
3. 30 से 45 मिनट के लिए नियमित व्यायाम शरीर को फिट और डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापा आदि जैसी स्वास्थ्य समस्यों से मुक्त रख सकता है। यह साथ ही हृदय रोगों को भी रोकने में मदद करता है।
4. व्यायाम (मध्यम से गंभीर) आपकी अंतर्निहित हृदय स्थिति को बिगड़ सकता है, इससे दिल का दौरा या कार्डियक अरेस्ट तक हो सकता है। आवश्यक है कि अपनी निरंतर अंतराल में जाँच करवाते रहे और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई व्यायाम न करे।
इसके अतिरिक्त, युवाओं में दिल की बढ़ती समस्याओं के अन्य कारणों में अनुवांशिक हृदय समस्याएं, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी मौजूदा चिकित्सा स्थितियां, जीवनशैली की समस्याएं जैसे धूम्रपान, मोटापा, तनाव, व्यायाम की कमी और पर्यावरण प्रदूषण शामिल हैं।