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World Cancer Day: क्या होता है टेस्टिकुलर या अंडकोष का कैंसर, जानिए इसके शुरुआती लक्षण

टेस्टिकुलर कैंसर सबसे ज्यादा इलाज योग्य कैंसरों में से एक है। यहां तक कि ज्यादा फैलने पर भी इस कैंसर का उपचार संभव है।

World Cancer Day: क्या होता है टेस्टिकुलर या अंडकोष का कैंसर, जानिए इसके शुरुआती लक्षण

Written by Atul Modi |Updated : February 4, 2024 11:22 AM IST

कैंसर को अक्सर लोग लाइफस्टाइल से जोड़कर देखते हैं। लेकिन पुरुषों में होने वाला 'टेस्टिकुलर कैंसर' यानी वृषण कैंसर एक ऐसा गंभीर व दुर्लभ कैंसर है, जिसका संबंध काफी हद तक शिशु के जन्म से जुड़ा है। हालांकि समय पर पता चलने पर इसका उपचार संभव है। लेकिन अगर ये फैल जाए तो यह शरीर के बाकी अंगों को भी प्रभावित कर देता है। ऐसे में जरूरी है कि इस कैंसर के लक्षणों की समय पर पहचान हो। वर्ल्ड कैंसर डे पर हम आपको बताने जा रहे हैं टेस्टिकुलर कैंसर से जुड़ी सभी अहम बातें, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है।

इसलिए जरूरी है लक्षणों की पहचान

विशेषज्ञों के अनुसार टेस्टिकुलर कैंसर सबसे ज्यादा इलाज योग्य कैंसरों में से एक है। यहां तक कि ज्यादा फैलने पर भी इस कैंसर का उपचार संभव है। हालांकि समय पर इसका उपचार शुरू करने से इसको आस-पास के अंगों में फैलने से रोका जा सकता है। पुरुषों में दो अंडकोष यानी टेस्टिकल्स होते हैं। ये शरीर की कई ग्रंथियों में से एक हैं। इनका काम पुरुष हार्मोन और शुक्राणु बनाना है। प्रत्येक टेस्टिकल शुक्राणु कॉर्ड से जुड़ा होता है। यह स्पर्म डक, नर्वस और रक्त वाहिकाओं से बना होता है। यह लिम्फ नोड्स, फेफड़े, यकृत, हड्डियों आदि से जुड़ा रहता है। अगर आप समय पर टेस्टिकुलर कैंसर का उपचार नहीं करवाते हैं तो इन अंगों तक कैंसर फैलने की आशंका रहती है, जो गंभीर ​हो सकता है।

इन्हें होता है टेस्टिकुलर कैंसर का ज्यादा खतरा

टेस्टिकुलर कैंसर तब होता है, जब टेस्टिकल्स में असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। ये असामान्य कोशिकाएं एक गांठ या ट्यूमर बन सकती हैं। यदि ट्यूमर बढ़ता है तो यह शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। विभिन्न शोध बताते हैं कि कुछ लोगों में ​टेस्टिकुलर कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है।

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1. टेस्टिकुलर कैंसर होने का सबसे आम कारण है क्रिप्टोर्चिडिज्म। क्रिप्टोर्चिडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक या दोनों टेस्टिकल जन्म के समय पेट में रह जाते हैं। हालांकि ऐसी आशंका बहुत कम होती है। शिशु का जन्म समय से पहले हुआ है तो भी क्रिप्टोर्चिडिजम का खतरा अधिक हो जाता है।

2. अनुवांशिक कारणों से भी टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यह माता या पिता दोनों से ही बच्चों में आ सकता है। डाउन सिंड्रोम वाले पुरुषों में इसके होने की आशंका अधिक होती है।

3. अगर आप पहले ही टेस्टिकुलर कैंसर के शिकार हो चुके हैं तो आपको यह कैंसर फिर से होने का खतरा करीब 4 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

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4. अगर आपकी यौन इच्छा और क्षमता में कमी है तो हो सकता है कि आप टेस्टिकुलर कैंसर के शिकार हों। ऐसी परेशानी होने पर आप डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

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