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Written By: Anshumala | Updated : September 20, 2021 11:31 AM IST
इंसान के शरीर में मस्तिष्क (Brain) सबसे गूढ़ और महत्वपूर्ण अंग है। आजकल, खराब लाइफस्टाइल और कई बीमारियां मस्तिष्क के लिए बड़ा खतरा बन जाती हैं। स्ट्रोक (Stroke) इन्हीं में से एक ऐसी बीमारी है, जो वैश्विक स्तर पर प्रत्येक चार में से एक व्यक्ति को प्रभावित करती है। हालांकि, सभी तरह के स्ट्रोक में तकरीबन 80 फीसदी मामलों से बचा जा सकता है बशर्ते कि इसकी सही समय पर पहचान की जाए। सही समय पर यदि मरीज को हॉस्पिटल पहुंचा दिया जाए, तो वह लकवाग्रस्त होने से भी बच सकता है। ब्रेन स्ट्रोक पर संपूर्ण जानकारी दे रहे हैं, शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल के न्यूरो साइंस विभाग के प्रिंसिपल कंसलटेंट डॉ. शैलेश जैन....
स्ट्रोक (Stroke Risk) गंभीर हो सकता है यदि इसे नजरअंदाज किया गया। स्ट्रोक की स्थिति में लोगों को तत्काल कार्रवाई करने के लिए जागरूक करना बहुत जरूरी है। स्ट्रोक को 6-एस (6-S) पद्धति से पहचानने में मदद मिलती है। ये 6-एस हैं-
1 सडेन यानी लक्षणों की तत्काल उभरने की पहचान
2 स्लर्ड स्पीच यानी जुबान लड़खड़ाना
3 साइड वीक यानी बाजू, चेहरा, पैर या इन तीनों में दर्द होना
4 स्पिनिंग यानी सिर चकराना
5 सीवियर हेडेक यानी तेज सिरदर्द
6 सेकंड्स यानी लक्षणों के उभरते ही कुछ सेकंड्स में मरीज को हॉस्पिटल पहुंचाना।
कई अध्ययनों से यह पता चलता है कि स्ट्रोक (brain stroke) पीड़ित मरीज की प्रति मिनट 19 लाख मस्तिष्क कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। लगभग 140 करोड़ स्नायु संपर्क टूट जाता है और 12 किमी तक स्नायु फाइबर खराब हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में मिनट भर की देरी भी मरीज को स्थायी रूप से लकवाग्रस्त और मौत तक की स्थिति में पहुंचा देती है।
ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है। आमतौर पर हार्ट अटैक के मुकाबले अधिक खतरनाक होता है। अन्य बड़े कारणों के अलावा नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि नहीं करना भी शुरुआती चरण के स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार माना जाता है। नियमित व्यायाम से न सिर्फ संपूर्ण स्वास्थ्य बना रहता है, बल्कि कई सारी बीमारियां भी दूर रहती हैं। ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ाने वाली अन्य बीमारियों में हाइपरटेंशन, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल शामिल हैं। हाइपरटेंशन के कारण ही इस्केमिक स्ट्रोक (ब्लॉकेज के कारण) के 50 फीसदी से ज्यादा मामले होते हैं। इससे हेमोरेजिक स्ट्रोक (मस्तिष्क में रक्तस्राव) की संभावना बढ़ जाती है। लिहाजा नियमित व्यायाम से रक्तचाप का उचित स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है और इससे 80 फीसदी तक ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है।
डायबिटीज (Diabetes) के कारण स्ट्रोक की आशंका दोगुनी हो जाती है, क्योंकि ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के कारण सभी बड़ी रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और यही इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बनता है। इसमें भी नियमित व्यायाम से न सिर्फ ब्लड ग्लूकोज लेवल नियंत्रित रहता है, बल्कि डायबिटीज की स्थिति में स्ट्रोक अटैक की संभावना भी कम हो जाती है। शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल से भी स्ट्रोक का खतरा रहता है और इसे भी नियमित व्यायाम से नियंत्रित किया जा सकता है।
खराब लाइफस्टाइल, खासकर खानपान की गलत आदतें, जंक फूड, मांस—अंडे का सेवन आदि के कारण कोरोनरी आर्टेरियल डिजीज, स्ट्रोक और इंट्राक्रेनियल हेमरेज की नौबत अब दशक पुरानी बात हो गई है। तनाव, धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन, खानपान की गलत आदतें और शारीरिक गतिविधियों की कमी समेत खराब लाइफस्टाइल स्ट्रोक का कारण बनती हैं। वहीं, खानपान की स्वस्थ आदतें अपनाने से देखा गया है कि 80 फीसदी से ज्यादा मामलों को टाला जा सकता है।
ब्रेन स्ट्रोक का इलाज स्ट्रोक के टाइप पर निर्भर करता है। लगभग 85 फीसदी स्ट्रोक के मामले इस्केमिक होते हैं, जिन पर दौरा पड़ने के 4.5 घंटे के अंदर इंट्रावेनस मेडिकेशन टीपीए से काबू पाया जा सकता है। किसी विशेषज्ञ और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की मदद से यह प्रक्रिया सुरक्षित और त्वरित तरीके से अपनाई जाती है। बायप्लेन टेक्नोलॉजी में एडवांस्ड उपकरण सुरक्षित तरीके से मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं तक पहुंचते हुए 3डी तस्वीर देता है, जिससे किसी तरह की दिक्कत का खतरा कम रहता है।
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