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जब हम स्ट्रोक के बारे में सोचते हैं, तो हम अक्सर बोलने में कठिनाई, सुन्नता, या चेहरे और शरीर में हलचल में कमी जैसे लक्षणों के बारे में सोचते हैं। लेकिन साइलेंट स्ट्रोक (Silent Strokes) के साथ ऐसा नहीं है, यह स्ट्रोक जब किसी व्यक्ति को होता है तो उन्हें किसी तरह के लक्षणों को कोई अनुभव नहीं होता है। यही कारण है कि इन्हें साइलेंट स्ट्रोक कहा जाता है। क्योंकि साइलेंट स्ट्रोक के आमतौर पर कोई लक्षण देखने को नहीं मिलते हैं। साइलेंट स्ट्रोक बिना किसी वार्निंग साइन या लक्षण के हमला करते हैं और आपके मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचाते हैं। यही कारण है कि साइलेंट स्ट्रोक को सामान्य स्ट्रोक से ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Strokes) की तरह, साइलेंट स्ट्रोक तब होता है जब आपके मस्तिष्क के एक हिस्से में रक्त की आपूर्ति अचानक बंद हो जाती है, जिससे आपका मस्तिष्क ऑक्सीजन से वंचित हो जाता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। लेकिन एक साइलेंट स्ट्रोक को स्वभाव से, पहचानना कठिन होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक साइलेंट स्ट्रोक आपके मस्तिष्क के एक हिस्से में रक्त की आपूर्ति को बाधित करता है जो बोलने या चलने जैसे किसी भी दृश्य कार्य को नियंत्रित नहीं करता है, इसलिए आपको कभी पता नहीं चलेगा कि आपको स्ट्रोक हुआ है।
यदि आपके साइलेंट स्ट्रोक हो रहे है, तो आप शायद इसके बारे में तब तक नहीं जान पाएंगे जब तक कि आपके मस्तिष्क को स्कैन न किया जाए और उसमें क्षति दिखाई न दे। इस दौरान आपको याददाश्त संबंधी थोड़ी समस्या हो सकती है या बाहर आने-जाने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है। हालांकि, डॉक्टर टेस्ट किये बिना भी साइलेंट स्ट्रोक के लक्षणों को देखने में सक्षम सकता है।
मध्यम आयु वर्ग के लोगों के एक अध्ययन में स्ट्रोक के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे, उन्होंने पाया कि लगभग 10% का मस्तिष्क डैमेज था। जो क्षति होती है वह स्थायी होता है, लेकिन चिकित्सा मस्तिष्क के अन्य हिस्सों को उत्तेजित करने में मदद कर सकती है ताकि आप उन क्षमताओं को पुनः प्राप्त कर सकें जो कमजोर हो सकती हैं।
यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर या अनियमित दिल की धड़कन की समस्या है तो आपको स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है। आपके जीने के तरीके में बदलाव आपके स्ट्रोक और हृदय रोग की संभावना को कम करने में मदद कर सकता है। ऐसे में इन हेल्दी हैबिट्स को अपनाएं: