SIDS क्या है, जिससे अचानक शिशु की मौत हो जाती है?

फोर्टिस ला फेम जीके 2 के वरिष्ठ निदेशक नियोनेटोलॉजी डॉ. रघुराम मलैया का कहना है कि इस स्थिति में सबसे चिंताजनक बात यह होती है कि बच्चे की मौत के पीछे कोई स्पष्ट बीमारी, संक्रमण, हृदय रोग या अन्य मेडिकल कारण नहीं मिल पाता, यहां तक कि पूरी तरह से मेडिकल टेस्ट और पोस्टमार्टम के बाद भी।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : February 11, 2026 3:35 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Raghuram Malaiya

What is SIDS which causes sudden infant death: सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम, जिसे संक्षेप में SIDS कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक वर्ष से कम उम्र के शिशु की अचानक और बिना किसी स्पष्ट कारण के मृत्यु हो जाती है। फोर्टिस ला फेम जीके 2 के वरिष्ठ निदेशक नियोनेटोलॉजी डॉ. रघुराम मलैया का कहना है कि इस स्थिति में सबसे चिंताजनक बात यह होती है कि बच्चे की मौत के पीछे कोई स्पष्ट बीमारी, संक्रमण, हृदय रोग या अन्य मेडिकल कारण नहीं मिल पाता, यहां तक कि पूरी तरह से मेडिकल टेस्ट और पोस्टमार्टम के बाद भी।

SIDS क्यों होता है?

डॉ. रघुराम मलैया का कहना है कि आज तक SIDSका सटीक कारण पूरी तरह से ज्ञात नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति आमतौर पर दो चीजों के संयोजन से जुड़ी होती है:

  1. शिशु की सांस लेने की क्षमता (Respiratory Drive) का कमजोर होना
  2. कुछ पर्यावरणीय (Environmental) जोखिम कारक

कुछ बच्चे जन्म से ही ज्यादा संवेदनशील (vulnerable) होते हैं और ऐसे में अगर आसपास का वातावरण सुरक्षित न हो, तो SIDS का खतरा बढ़ सकता है।

बच्चों में SIDS होने के प्रमुख कारण क्या है?

डॉक्टर बताते हैं बच्चों में SIDS होने के कारणों शामिल हैः

  1. बच्चे को पेट के बल सुलाना (Prone Position)- पहले के समय में बच्चों को पेट के बल सुलाना आम बात थी, लेकिन अब यह साबित हो चुका है कि पेट के बल सोना SIDS का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर छपी एक र रिसर्च बताती है कि जो बच्चे पेट के बल सोते हैं, उनमें SIDS होने का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है। पेट के बल सोने की स्थिति में बच्चे की सांस रुकने या दम घुटने की संभावना बढ़ जाती है, खासकर तब जब बच्चा खुद से पलटने में सक्षम न हो। 6 से 8 महीने के बच्चे अगर पेट के बल सोएं, तो उनमें SIDS का खतरा ज्यादा होता है।
  2. बच्चे को ज्यादा गर्म रखना (Overheating)- डॉक्टर कहते हैं कि भारतीय पेरेंट्स में अक्सर यह धारणा होती है कि बच्चे को ठंड लग जाएगी, इसलिए उसे कई परतों में लपेट दिया जाता है। लेकिन अत्यधिक गर्मी भी SIDS का कारण बन सकती है। सर्दियों में ज्यादा कपड़े पहनाना, बहुत गर्म कमरा और भारी कंबल या रजाई, ये सभी चीजें बच्चे के शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकती हैं। ठंडी हवाओं और सर्दियों के मौसम में बच्चों के लिए गर्म कपड़े पहनना जरूरी है, लेकिन बच्चों को हमेशा एक सीमित लेयर ही कपड़ों की पहनानी चाहिए।
  3. ढीले कपड़े या कंबल- अगर बच्चे के चेहरे के आसपास ढीले कपड़े, तकिया या कंबल हों, तो उससे दम घुटने का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर बताते हैं बच्चों में SIDS का खतरा न हो इसीलिए बच्चे को हमेशा साफ, समतल और सुरक्षित सतह पर सुलाना चाहिए। सोते समय बच्चों के आसपास ढीला तकिया या कपड़े रखने से बचें।
  4. पेरेंट्स की स्मोकिंग- कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान मां द्वारा धूम्रपान और बच्चे के जन्म के बाद मां या पिता का धूम्रपान करने से भी बच्चे में SIDS का खतरा कई गुणा ज्यादा बढ़ जाता है। दरअसल, सिरगेट और बीड़ी के धुएं में मौजूद जहरीले तत्व बच्चे के फेफड़ों और मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करते हैं। इससे बच्चों में SIDS का खतरा 10 गुणा तेजी से बढ़ता है।

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बच्चों में होने वाले SIDS से कैसे बचाव करें?

डॉक्टर कहते हैं कि बच्चों में होने वाले सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम का कोई एक कारण नहीं है। लेकिन नवजात शिशुओं के पेरेंट्स कुछ सावधानियां बरतें, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  1. बच्चों को पीठ के बल सुलाएं- जन्म के बाद कम से कम 6 से 7 महीने तक बच्चों को सिर्फ पीठ के बल ही सुलाने की कोशिश करें। बच्चे को पीठ के बल (Back Position) सुलाना सबसे सुरक्षित है। जब तक बच्चा खुद से ही उलटना और पलटना सीख न जाए, उसे पेट के बल सुलाने से बचना चाहिए।
  2. सोने की जगह सुरक्षित रखें- 7 महीने की उम्र तक बच्चों को सुलाने के लिए सही और सुरक्षित जगह का होना अनिवार्य है। पेरेंट्स ध्यान दें कि सोते समय बच्चे के आसपास किसी प्रकार का भारी तकिया, कंबल या ढीले कपड़े न रखें हों। बच्चे के आसपास हमेशा बेड को खाली ही रखने की कोशिश करें। 6 महीने की कम उम्र से छोटे बच्चों को सुलाने का सबसे सुरक्षित विकल्प है कि बच्चा अपने अलग पालने या बैसिनेट में सुलाएं। इससे बच्चे पर किसी प्रकार की कोई भारी वस्तु नहीं गिरेगी।
  3. जरूरत से ज्यादा कपड़े न लपेटें- बच्चों को इस प्रकार की समस्या से बचाने के लिए सीमित मात्रा में ही कपड़े पहनाने चाहिए। बच्चे को जरूरत से ज्यादा कपड़े पहनाने से शरीर गर्म होता है और ये उनके लिए नुकसानदायक साबित होता है। डॉक्टर का कहना है कि सोते समय बच्चे को बहुत ज्यादा पसीना आना या शरीर का बहुत गर्म होना खतरे का संकेत हो सकता है।
  4. ब्रेस्टफीडिंग करवाएं- आजकल महिलाएं बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग करवाने से कतराती हैं, लेकिन यह बच्चों के इम्यून सिस्टम के लिए बहुत जरूरी है। ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding) से शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह SIDS से सुरक्षा देने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है।
  5. धूम्रपान से दूर रहें- बच्चों को SIDS से बचाने के लए प्रेग्नेंसी के दौरान धूम्रपान न करें। बच्चे के आसपास कभी भी धूम्रपान करने से बचें। अगर कोई धूम्रपान करता है, तो कमरे से बाहर जाकर करे।

निष्कर्ष

डॉक्टर के साथ बातचीत के आधार पर हम यह कह सकते है कि SIDS का सटीक कारण आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन सही जानकारी और थोड़ी-सी सावधानी आपके बच्चे की जान बचा सकती है।

डिस्क्लेमर: TheHealthSite.com पर दिया गया कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और यह प्रोफेशनल मेडिकल सलाह, डायग्नोसिस या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी सेहत या किसी मेडिकल कंडीशन से जुड़े किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या क्वालिफाइड हेल्थकेयर प्रोवाइडर से सलाह लें।

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