hamburger icon
A
Read in English

सिजोफ्रेनिया क्या होता है? जानें क्या हैं इसके लक्षण और कारण

सिजोफ्रेनिया एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है। जब यह समस्या विकसित होती है, तो व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती है। जानें, इस बीमारी के बारे में-

WrittenBy

Written By: Anju Rawat | Published : July 9, 2026 6:31 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By:

What is Schizophrenia in Hindi: सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जिसमें व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और वास्तविकता को समझने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। अक्सर लोग इसे "स्प्लिट पर्सनैलिटी" समझ लेते हैं, जबकि यह एक अलग मानसिक बीमारी है। सिजोफ्रेनिया का समय पर इलाज न होने पर व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और दैनिक जीवन पर गहरा असर पड़ सकता है। ज्यादातर मामलों में इस बीमारी की शुरुआत कम उम्र में ही हो जाती है। इसकी वजह से लोगों को ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल हो सकती है और निर्णय लेने या कोई योजना बनाने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। आइए, PSRI हॉस्पिटल के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. परमजीत सिंह से जानते हैं सिजोफ्रेनिया के लक्षण और कारणों के बारे में-

सिजोफ्रेनिया के कारण क्या हैं?

डॉ. परमजीत सिंह बताते हैं कि सिजोफ्रेनिया का कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, इनमें शामिल हैं-

  1. सिजोफ्रेनिया जेनेटिक हो सकता है। यानी अगर परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी है, तो आप में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।
  2. मस्तिष्क में डोपामिन और ग्लूटामेट जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन होने पर भी सिजोफ्रेनिया का खतरा बढ़ सकता है।
  3. प्रेग्नेंसी के दौरान सिजोफ्रेनिया का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, जन्म के समय संक्रमण या ऑक्सीजन की कमी की वजह से भविष्य में इसका खतरा बढ़ सकता है।
  4. लंबे समय तक तनाव में रहने से और किसी ट्रामा की वजह से सिजोफ्रेनिया का जोखिम ज्यादा हो सकता है।

सिजोफ्रेनिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

सिजोफ्रेनिया होने पर व्यक्ति को कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं। इस समस्या के लक्षण और प्रभाव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं-

  1. ऐसी आवाजें सुनाई देना जो वास्तव में मौजूद न हों
  2. लोगों पर शक करने की आदत
  3. सोचने और बोलने में असंगति
  4. लोगों से दूरी बनाना और अकेले रहना
  5. भावनाओं का कम हो जाना
  6. पढ़ाई या काम में अचानक गिरावट
  7. ध्यान और याददाश्त में कमी
  8. हाइजीन का ध्यान न रखना

इन लोगों में ज्यादा रहता है सिजोफ्रेनिया जोखिम

  1. अगर परिवार में मानसिक बीमारी का इतिहास रहा है, तो खतरा ज्यादा हो सकता है।
  2. 20 से 30 साल की उम्र में सिजोफ्रेनिया का जोखिम ज्यादा रहता है।
  3. लंबे समय तक नशीले पदार्थों का सेवन करने से सिजोफ्रेनिया का जोखिम भी रहता है।
  4. लंबे समय तक तनाव में रहने से सिजोफ्रेनिया का खतरा ज्यादा रहता है।

क्या सिजोफ्रेनिया का इलाज संभव है?

डॉ. परमजीत सिंह बताते हैं कि वर्तमान में सिजोफ्रेनिया का इलाज उपलब्ध नहीं है। लेकिन, सही समय पर निदान और सही उपचार से इसके लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर एंटीसाइकोटिक दवाएं लिख सकते हैं। साथ ही, साइकेट्रिस्ट की सलाह भी बहुत जरूरी है। वहीं, परिवार और दोस्तों से बातचीत करना भी बहुत जरूरी है।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को लगातार भ्रम हो रहा है, उसे ऐसी चीजें दिखाई या सुनाई दे रही है, जो असल में है ही नहीं।

अगर व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो इस संकेत की अनदेखी न करें और डॉक्टर से जरूर मिलें।

Disclaimer: सिजोफ्रेनिया कोई शारीरिक कमजोरी नहीं, बल्कि यह मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर समस्या है। अगर समय पर लक्षणों की पहचान कर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो इससे व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। अगर व्यक्ति खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की बात करें, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें।