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क्या है सिजोफ्रेनिया?
सिजोफ्रेनिया एक ऐसी मानसिक बीमारी है जिसमें रोगी के मानसिक स्तर पर कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इस रोग से पीड़ित रोगी के सोचने, बात करने और समझने के व्यवहार में काफी बदलाव देखने को मिलता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि वह अपनी एक काल्पनिक दुनिया बना लेता है। वह इस दुनिया के अनुसार ही अपना व्यवहार करता है। इस रोग से ग्रसित लोग सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से ही परेशानी का सामना करते हैं।
सिजोफ्रेनिया शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है- 'विभाजित मन'। सिजोफ्रेनिया एक मानसिक रोग है, जिसमें व्यक्ति के विचार, व्यवहार और बातचीत के तरीके में बेहद असामान्य बदलाव देखने को मिलते हैं। जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति अपनी वास्तविकता को भूल जाता है, और अपनी एक नई मानसिक दुनिया का निर्माण कर लेता है।
सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोग एक काल्पनिक दुनिया में रहते हैं, और हमेशा एक भ्रम बना रहता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को हमेशा यही लगता है कि सामने वाला व्यक्ति उनके खिलाफ कोई न कोई साजिश कर रहा है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को समय समय पर दौरे पड़ते हैं।
सिजोफ्रेनिया से पीड़ित रोगी का एक सबसे महत्वपूर्ण लक्षण है कि वह अक्सर अपने ही आसपास के लोगों से डर महसूस करता है। वह सोचता है कि उसके आसपास जो भी लोग हैं वह उसके प्रति अच्छे विचार नहीं रखते हैं। इसी कारण से वह अपने साथी और संबंधियों से दूर होता जाता है, जिससे उसके सामाजिक जीवन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है।
सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक रोग है, जिसका इलाज किसी कुशल मनोरोग चिकित्सक द्वारा ही कराना चाहिए लेकिन यदि आप इस रोग के लक्षणों को समझ पाते हैं तो कुछ साधारण से उपाय कर रोगी के जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं।
Disclaimer- ये लेख आपकी सामान्य जानकारी के लिए है, इसका उद्देश्य आपको किसी तरह की चिकित्सकीय सलाह देना नहीं है। ऊपर बताए गए लक्षण विभिन्न स्रोतों के आधार पर हैं। यदि आप इनमें से कोई लक्षण महसूस कर रहे हैं तो बिना देर किए तुरंत किसी कुशल चिकित्सक से संपर्क करें।