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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : February 11, 2020 3:46 PM IST
रोजेशिया बीमारी का मुख्य लक्षण चेहरे पर लालिमा ही होती है। कुछ लोगों में लाल रंग के धब्बे अलग-अलग दिखते हैं तो कुछ लोगों में यह एक साथ जुड़ा हुआ होता है। ©Shutterstock
आपने अक्सर देखा होगा कुछ लोगों के चेहर पर लालिमा छा जाती है। कुछ लोगों में चेहरे पर लाल धब्बे भी हो जाते हैं। चेहरे पर लालिमा के उपचार के लिए अक्सर लोग घरेलू उपचार खोजने लगते हैं। बार बार चेहरा लाल होता है या चेहरे पर लालिमा छा जाती है तो यह रोजेशिया की बीमारी हो सकती है। रोजेशिया बीमारी एक बहुत ही सामान्य सी त्वचा की बीमारी है। ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि रोजेशिया (Rosacea) की बीमारी 30 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को होती है। कुछ लोगों में यह पूरे चेहरे पर होता है तो कुछ लोगों में चेहरे पर लालिमा के साथ लाल धब्बे भी होते हैं। कुछ लोगों में लाल भाग में उभार भी देखा जा सकता है। रोजेशिया की बीमारी में आंखों में जलन और आंखों में दर्द भी हो सकता है। कुछ लोगों को लगता है कि चेहरे पर लालिमा होना मतलब खुन की अधिकता है लेकिन ऐसा नहीं होता है।
रोजेशिया बीमारी का मुख्य लक्षण चेहरे पर लालिमा ही होती है। कुछ लोगों में लाल रंग के धब्बे अलग-अलग दिखते हैं तो कुछ लोगों में यह एक साथ जुड़ा हुआ होता है। कुछ लोगों में रोजेशिया के लाल धब्बे उभार लिए होते हैं। रोजेशिया की बीमारी में आंखों में दर्द और जलन भी हो सकती है।
कुछ लोगों में रोजेशिया बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है तो कुछ लोगों में रोजेशिया बीमारी पूरी उम्र रहती है। कुछ लोगों में रोजेशिया बीमारी किसी एलर्जी की वजह से भी हो जाती है। रोजेशिया बीमारी का कोई खास इलाज नहीं है लेकिन इसको बढ़ने से रोका जा सकता है। रोजेशिया बीमारी जब बढ़ना रूक जाता है तो यह धीरे-धीरे ठीक भी हो जाता है।
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वैसे तो रोजेशिया की बीमारी एक ही होती है लेकिन लक्षण और इलाज के हिसाब से चेहरे पर लालिमा वाली बीमारी रोजेशिया मुख्यतः 4 प्रकार की होती है।
रोजेशिया का पहला प्रकार एरीथेमैटोटेलांगेस्टाटिक रोजेशिया के नाम से जाना जाता है। इसमें सामान्य लालिमा के साथ चेहरे पर नशों का ऊभार दिखाई देता है।
रोजेशिया का दूसरा प्रकार पॉपुलोपोस्टलर के नाम से जाना जाता है। पॉपुलोपोस्टलर रोजेशिया में चेहरे पर मुंहासे हो सकते हैं जो चेहरे पर लालिमा लिए होते हैं।
रोजेशिया का तीसरा प्रकार राइनोफायमा के नाम से जाना जाता है। राइनोफायमा रोजेशिया बहुत कम होने वाला रोजेशिया रोग है। राइनोफायमा रोजेशिया में नाक की त्वचा मोटी और लाल हो जाती है।
रोजेशिया का चौथा प्रकार ओक्यूलर रोजेशिया के नाम से जाना जाता है। ओक्यूलर रोजेशिया होने पर आंखों के आस-पास त्वचा लाल होती है। ओक्यूलर रोजेशिया में आंखों में जलन की समस्या होती है।
चेहरा लाल होना या चेहरे पर लालिमा की बीमारी रोजेशिया किस कारण से होती है इसका कोई ठोस तथ्य नहीं है। कई बार चेहरे पर लालिमा की बीमारी रोजेशिया आनुवंशिक होती है। कुछ मामलों में रोजेशिया प्रदूषण या पर्यावरण की वजह से भी होती है। कुछ लोगों में रोजेशिया की बीमारी साफ-सफाई की कमी की वजह से भी होती है। कुछ सामन्य कारण हैं जिसकी वजह से रोजेशिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
गर्म पेय पदार्थो का ज्यादा सेवन
एल्कोहल का अधिक सेवन
तापमान में बदलाव
कॉस्मेटिक पदार्थों के कारण
दवाओं का साइड-इफेक्ट
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चेहरे पर लालिमा या चेहरा लाल करने वाली बीमारी रोजेशिया का इलाज अभी तक नहीं है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इसका इलाज नहीं हो सकता है। रोजेशिया के इलाज के लिए कुछ दवाओं का उपयोग किया जाता है जो इसको नियंत्रित करने का काम करती है।
रोजेशिया के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है। रोजेशिया के इलाज के लिए एजेलिक एसिड और मेट्रोनिडाजोल वाली कुछ क्रीमों का भी इस्तेमाल किया जाता है। हाल के वर्षों में इसके इलाज के लिए लेजर के माध्यम से भी किया जाने लगा है। रोजेशिया का इलाज के लिए खुद से या घरेलू उपचार नहीं करना चाहिए। त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श के बाद ही इसकी दवा लेनी चाहिए।
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