
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : October 5, 2025 11:51 AM IST
What is Pulmonary Hypertension: कई बार आपको सांस फूलना, थकान, सीने में दबाव और लगभग अस्थमा जैसे लक्षण महसूस होते हैं। आप थोड़ा आराम कर ठीक होने का प्रयास करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्थिति अस्थमा न होकर पल्मोनरी हाइपरटेंशन होती है। असल में पल्मोनरी हाइपरटेंशन एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसे अक्सर अस्थमा या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज समझकर बहुत से लोग वर्षों तक गलत इलाज करते हैं, जबकि असली समस्या श्वास नलिकाओं में नहीं, बल्कि फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं और हृदय में होती है। पल्मोनरी हाइपरटेंशन में फेफड़ों की धमनियां संकरी और कठोर हो जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह कठिन हो जाता है और दाहिनी हृदय निलय को अधिक जोर लगाकर रक्त पंप करना पड़ता है। लंबे समय में यह तनाव हृदय को विफलता की ओर ले जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप इस स्थिति को सही तरह से समझें, जिसके बारे में बता रहे हैं, शारदा केयर हेल्थ सिटी के डॉ. गौतम अग्रवाल एवं डॉ. अखिल कुमार रुस्तगी।
डॉक्टर बताते हैं कि पल्मोनरी हाइपरटेंशन में फेफड़ों की धमनियों में रक्तचाप सामान्य से बहुत अधिक हो जाता है। इससे हृदय पर अत्यधिक भार पड़ता है और दाहिना निलय फैलकर कमजोर हो जाता है। यह स्थिति अस्थमा या सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज से भिन्न होती है, क्योंकि इसमें श्वास नलिकाओं की बजाय रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं।
अगर आप इसके लक्षणों और कारणों को सही समय पर पहचान लें तो आप इस परेशानी से बेहतर तरीके से डील कर सकते हैं। पल्मोनरी हाइपरटेंशन का सबसे बड़ा धोखा यह है कि इसके लक्षण, जैसे- सांस फूलना, थकान, सीने में असहजता अस्थमा या सीओपीडी जैसे सामान्य फेफड़ों के रोगों से मिलते-जुलते होते हैं, जो कि आपको भ्रम में डालते हैं।
डॉक्टर कहते हैं कि पल्मोनरी हाइपरटेंशन के कई कारण होते हैं, जिनमें अनुवांशिक कारण प्रमुख हैं। वहीं कनेक्टिव टिशु रोग जैसे- स्क्लेरोडर्मा या ल्यूपस भी फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं। पुरानी फेफड़ों की बीमारियां जैसे- सीओपीडी या खून के थक्के बनने से भी दबाव बढ़ सकता है और इस बीमारी से लक्षण उभरने लगते हैं। वहीं डॉक्टर बताते हैं कि कई बार, रोग का सटीक कारण अज्ञात होता है, जो इसे पहचानने और इलाज को चुनौतीपूर्ण बनाता है। इसलिए समय जांच करवाते रहना जरूरी है।
डॉ. अखिल कुमार रुस्तगी के अनुसार, कई मरीजों को पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता तब चलता है, जब उनका दिल पहले ही कमजोर हो चुका होता है। ईसीजी से हृदय पर तनाव का पहला संकेत मिलता है, जबकि 2डी ईसीएचओ इसकी पुष्टि करने का मुख्य तरीका है। गंभीर मामलों में सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन की जरूरत भी पड़ती है।
यदि पल्मोनरी हाइपरटेंशन का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह बहुत गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। दिल का दाहिना हिस्सा फैल सकता है और कमजोर हो सकता है। इसके अलावा, शरीर में पानी जमने लगता है, जिससे पेट, पैरों और टखनों में सूजन हो सकती है। नीलापन भी देखने को मिलता है, जो यह दर्शाता है कि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। मरीज की सामान्य गतिविधियां जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल हो जाता है। इसके इलाज का मुख्य उद्देश्य हृदय और फेफड़ों की धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना होता है। इलाज में ऑक्सीजन थेरेपी, रक्त पतला करने वाली दवाएं और कुछ मामलों में शल्य चिकित्सा शामिल हो सकती है। साथ ही, जीवनशैली में सुधार जैसे वजन नियंत्रण और अत्यधिक मेहनत से बचना भी जरूरी है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन एक खामोश लेकिन गंभीर बीमारी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। समय पर सही पहचान और उपचार से न केवल हृदय को बचाया जा सकता है, बल्कि मरीज का जीवन स्तर भी सुधारा जा सकता है। अगर किसी को बार-बार सांस फूलने या थकावट की शिकायत हो, तो यह जरूरी है कि वे केवल अस्थमा या फेफड़े की बीमारी मानकर संतुष्ट न हों, बल्कि विशेषज्ञ से परामर्श लें और हृदय की जांच भी कराएं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।