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प्री-डायबिटीज क्या होती है? क्या इसे बिना दवा के कंट्रोल किया जा सकता है

भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में अगर प्री डायबिटीज मरीज अपनी समस्या को समय रहते कंट्रोल करे, तो डायबिटीज के खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : July 23, 2026 4:06 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Yogesh Kumar Chhabra

 What is Pre-Diabetes : हमारे देश में लगातार डायबिटीज के मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और द लंसेट में प्रकाशित INDIAB स्टडी के अनुसार, देश में करोड़ों लोग डायबिटीज और प्री-डायबिटीज से प्रभावित हैं। कई लोग डायबिटीज और प्री डायबिटीज को एक ही समस्या समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। प्री डायबिटीज वह स्थिति है, जब ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा होती है, लेकिन इतनी नहीं कि उसे टाइप-2 डायबिटीज कहा जाए। अच्छी बात यह है कि अगर इस स्टेज पर सही कदम उठाए जाएं, तो डायबिटीज होने के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। अब कई लोगों के मन में यह सलाल रहता है कि क्या प्री-डायबिटीज बिना दवा के कंट्रोल हो सकती है? आइए इस विषय को शालीमार बाग स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में नेफ्रलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. योगेश छाबड़ा से अच्छी तरह से समझते हैं-

प्री-डायबिटीज क्या होती है?

अमेरिकन डायबिटीज असोशिएशन के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति का फास्टिंग ब्लड शुगर 100-125 mg/dL, HbA1c 5.7 प्रतिशत से 6.4 प्रतिशत या खाना खाने के 2 घंटे बाद ब्लड शुगर 140-199 mg/dL के बीच है, तो उसे प्री-डायबिटीज माना जाता है। इस स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या बिना दवा के कंट्रोल हो सकती है प्री-डायबिटीज?

सीधेतौर पर इसका जवाब हां है, लेकिन यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर समय रहते प्री-डायबिटीज का पता चल जाए और व्यक्ति अपनी लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करे, तो कई मामलों में ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर वापस लाया जा सकता है।

Pre Diabetes

क्या हर मरीज को दवा की जरूरत होती है?

नहीं, अमेरिकन डायबिटीज असोशिएशन के मुताबिक, प्री-डायबिटीज के सभी मरीजों को दवा नहीं दी जाती। सबसे पहले डॉक्टर खानपान में सुधार, वजन कम करने और नियमित शारीरिक गतिविधि की सलाह देते हैं। हालांकि, जिन लोगों में डायबिटीज का खतरा बहुत ज्यादा होता है, उन्हें डॉक्टर मेटफॉर्मिन जैसी दवा लेने की सलाह दी जाती है।

प्री-डायबिटीज को कंट्रोल करने के आसान तरीके क्या हैं?

अगर आप प्री डायबिटीज को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो कुछ चीजों पर ध्यान दे सकते हैं, जैसे-

Pre Diabetes

  1. रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलें या कोई भी एक्सरसाइज करें, इससे प्री डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
  2. शरीर का 5-7 प्रतिशत वजन कम करने की कोशिश करें।
  3. मीठे ड्रिंक, मैदा और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर रखें।
  4. साबुत अनाज, दालें, हरी सब्जियां और फाइबर से भरपूर भोजन करें।
  5. हर 6 से 12 महीने में ब्लड शुगर और HbA1c की जांच कराएं।

क्या कहती है रिसर्च

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक, अगर प्री-डायबिटीज वाले लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और अपना वजन कंट्रोल में रखें, तो काफी हद तक टाइप-2 डायबिटीज के खतरों से बचा जा सकता है।

वहीं, द लांसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजिस्ट में प्रकाशित कई अध्ययनों ने भी लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन को प्री-डायबिटीज मैनेजमेंट का सबसे प्रभावी तरीका माना है।

Disclaimer : ध्यान रखें कि प्री-डायबिटीज कोई ऐसी स्थिति नहीं है, जिससे घबराने की जरूरत हो, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखकर कई लोग बिना दवा के भी ब्लड शुगर को सामान्य स्तर तक ला सकते हैं। हालांकि, दवा की जरूरत है या नहीं, इसका फैसला हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही होना चाहिए।