पोस्टनेटल डिप्रेशन क्या है ? महिलाओं के लिए क्यों है खतरनाक

एक्सपर्ट्स के अनुसार यह डिप्रेशन सेहत के लिए महिलाओं के लिए कभी-कभी खतरनाक हो सकता है। कई बार महिलाओं में नींद न आने की समस्या गंभीर हो जाती है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : November 27, 2018 4:05 PM IST

पोस्टनेटल डिप्रेशन का मतलब है प्रसव के बाद अर्थात बच्चे के जन्म के बाद होने वाला डिप्रेशन। प्रेगनेंसी और उसके बाद बच्चे का जन्म यह दौर मां के लिए खास भी होता है और उसमें कई तरह बदलाव भी होता है। बदलावों में हार्मोनल चेंजेज भी होता है। कुछ महिलाओं में प्रेगनेंसी के समय से ही चिड़चिड़ेपन के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कुछ मामलों में प्रेगनेंसी के बाद ऐसा होता है। चिड़चिड़ापन ही आगे जाकर डिप्रेशन का रूप ले लेता है। ये भी पढ़ेंः क्या दवा से डिप्रेशन और शराब दोनों से मिल सकता है छुटकारा ?

चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह के डिप्रेशन को पोस्टनेटल डिप्रेशन कहा जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह डिप्रेशन सेहत के लिए महिलाओं के लिए कभी-कभी खतरनाक हो सकता है। कई बार महिलाओं में नींद न आने की समस्या गंभीर हो जाती है। पोस्टनेटल डिप्रेशन में महिलाएं अत्यन्त भावुक हो जाती हैं। उनके व्यवहार में कई तरह के बदलाव आते हैं। नींद न लगने की वजह से महिलाओं के खान-पान से लेकर सेहत तक पर गहरा असर होता है। ये भी पढ़ेंः एरोबिक एक्सरसाइज से डिप्रेशन होता है दूर, जानें इसके खास फैक्ट्स।

साइकोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है......एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद पोस्टनेटल डिप्रेशन की वजह से पोस्टपार्टम फ्लू और साइकोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। साइकोसिस का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जिनमें यह आनुवंशिक समस्या होती है।

पोस्टनेटल डिप्रेशन के लक्षणः थकान महसूस करना, असहाय, खालीपन, दुखी होना या किसी भी बात पे आंसू आना, आत्मविश्वास खोना, अपराधबोध की भावना, खुद को नाकाम मानना, उलझन में होना, घबराहट, अपने बच्चे के लिए खतरा महसूस करना, अकेलेपन या बाहर निकलने का डर, सामाजिक कार्यों में दिलचस्पी न लेना, ज्यादा सोना या बिल्कुल ना सोना, बहुत ज्यादा खाना या बिल्कुल ना खाना, ऊर्जा की कमी महसूस करना, अपनी देखभाल पे ध्यान न देना, स्वास्थ्य में साफ-सफाई का ध्यान ना रखना, स्पष्ट सोच ना पाना, निर्णय लेने में मुश्किल, जिम्मेदारियों से दूर भागना इत्यादि इसके लक्षण हैं।

बचाव व सावधानीः इस समय में डॉक्टरी इलाज से ज्यादा एक महिला को उसके पति और परिवार के सपोर्ट की जरूरत होती है। आपसी संबंधों में मधुरता बनाये रखना और मां बनी महिला की मन की उलझन को समझते हुए उसका साथ देना। बच्चे की देखभाल व अन्य कामों में परिवार का साथ महिला को इस स्थिति से उबारने में सहयोगी है।

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