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बचपन में हुई घटना जवानी में भी कर रही परेशान? आपको हो सकती है ये मानसिक बीमारी, जानें क्या है इलाज

What Is PTSD : पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस सिंड्रोम आपके साथ बचपन या फिर जीवन के किसी भी पड़ाव में हुई घटना के कारण होने वाली मानसिक परेशानी है, जो आपको कुछ वक्त बाद परेशान करती है।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : June 13, 2022 1:03 PM IST

What Is PTSD : जीवन में बुरा और अच्छा वक्त हर किसी के साथ आता है। लेकिन आपने देखा होगा कि अच्छे वक्त का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर उतना प्रभाव नहीं पड़ता, जितना कि बुरा दौर हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। कुछ घटनाएं हमारे दिमाग को बहुत बुरी तरह प्रभावित करती हैं और ये हमारे मानसिक स्वास्थ्य को काफी हद तक नुकसान पहुंचाती हैं। इसी स्थिति को पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) कहा जाता है या फिर इसे आप पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस सिंड्रोम (PTSS) भी कहते हैं।

क्या है पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस सिंड्रोम को पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के रूप में संदर्भित भी किया जाता है, जो कि आपके साथ बचपन या फिर जीवन के किसी भी पड़ाव में हुई घटना के कारण होने वाली मानसिक परेशानी है। इसके अलावा ऐसी कुछ घटनाएं, जो आपको करीबी रूप से प्रभावित करती है ये आपको घटना के होने के महीने भर बाद होती है या फिर आपको कई वर्षों तक परेशान कर सकती है।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर का प्रभाव

अतीत की कुछ घटनाएं या ऐसे हालात, जो आपको मानसिक और शारीरिक रूप से झकझोर कर रख देते हैं, वो सभी इस स्थिति में आते हैं। इस स्थिति में आप वापस उसी दौर में चले जाते हैं, जो आपको परेशान करते हैं। ये स्थिति आपको वर्षों पुरानी घटना को फिर से जीने को मजबूर कर देते हैं और आपको न चाहते हुए भी परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर आप भी ऐसी ही किसी परेशानी की सामना कर रहे हैं तो इनके लक्षणों को नजरअंदाज न करें क्योंकि आप इस स्थिति का शिकार हो सकते हैं।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के कारण

आमतौर पर ये स्थिति आपको चार तरीके से प्रभावित करती है जैसेः

1-पहली स्थिति में आपको बार-बार उस घटना से जुड़ी चीजें दिखाई देती हैं जैसे बुरे सपने आना या फिर उसी ख्याल में खो जाना।

2-कुछ लोगों के लिए उस घटना को स्वीकार कर पाना मुश्किल होता है क्योंकि वह उस घटना को झेल नहीं पाते हैं। इसलिए वह हर चीज को उसी से जोड़कर देखते हैं। इस स्थिति से जूझ रहे लोगों को ऐसी चीजों से बचना चाहिए, जो उन्हें अतीत की याद दिलाते हो।

3-कुछ लोगों में उनकी याददाश्त और मूड दोनों ही प्रभावित होता है। वे उस घटना के महत्वपूर्ण पहलुओं को तो भूल जाते हैं लेकिन उसके नकरात्मक विचार और भाव उन्हें असहज बनाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें वो घटना याद रहती है ।

4-कभी-कभार ये घटनाएं उन्हें डर, गुस्सा, पछतावा और शर्म के इर्द-गिर्द ले जाती है। इसकी वजह से उनके अच्छे रिश्ते भी खराब होने लगते हैं।

कुछ मामलों में इस स्थिति की वजह से लोगों की जिंदगी बिल्कुल तबाह सी हो जाती है और उन्हें हर वक्त चिंता सताती रहती है, जिसकी वजह से हालात हमेशा संदेह भरे होते हैं। ये आपकी नींद को भी प्रभावित करते हैं।

क्या पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर का इलाज है?

इस स्थिति के लक्षण या तो एक साथ दिखाई दे सकते हैं या फिर आपको अलग-अलग महसूस हो सकते हैं हालांकि ये व्यक्ति और उसकी मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। इस स्थिति से आपको हाव-भाव में कोई खास बदलाव नहीं आता है लेकिन पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर को हमेशा से अंदरूनी घाव के रूप में जाना जाता है। इस स्थिति सो सही मार्गदर्शन और थेरेपी से ठीक किया जा सकता है।