पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम: क्या पोलियो से ठीक होने के बाद भी कुछ स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

Post-Polio Syndrome Kya Hota Hai: कई बार पोलियो ठीक होने के बाद भी पेशेंट को कुछ हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं वह क्या परेशानियां हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : October 26, 2025 10:54 PM IST

Polio Thik Hone Ke Baad Kya Dikkat Hoti Hai: पोलियो को भारत से खत्म हुए एक दशक से अधिक समय हो चुका है, लेकिन जिन लोगों ने बचपन में इस बीमारी का सामना किया था, उनमें से कई अब एक नई चुनौती से गुजर रहे हैं। यह है पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम (Post-Polio Syndrome)। यह ऐसी स्थिति है जिसमें पोलियो से ठीक हो चुके व्यक्ति को वर्षों बाद फिर से मांसपेशियों की कमजोरी, थकान और दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

कैसी समस्याएं? इस विषय पर पूरी जानकारी पाने के लिए हमने एशियन हॉस्पिटल की एसोसिएट डायरेक्टर और न्यूरोलॉजिस्ट हेड नेहा कपूर से बातचीत की। उन्होंने बताया कि 'पोस्ट-पोलियो सिंड्रोमपोलियो वायरस से नहीं होता, बल्कि उस पुराने संक्रमण के कारण क्षतिग्रस्त हुई नसों के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने से यह स्थिति विकसित होती है। जब शरीर पोलियो से लड़कर ठीक होता है, तब शेष स्वस्थ न्यूरॉन्स उन मांसपेशियों को संभालने का अतिरिक्त काम करने लगते हैं जो पहले कमजोर हो चुकी थीं। लेकिन सालों बाद यही अतिरिक्त बोझ उन्हें थका देता है।'

डॉक्टर ने बताए मुख्य लक्षण

पोस्ट-पोलियो सिंड्रोमआमतौर पर पोलियो से ठीक होने के 15 से 40 साल बाद दिखाई देता है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं-

  • धीरे-धीरे बढ़ती मांसपेशियों की कमजोरी
  • अत्यधिक थकान
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
  • सांस लेने या निगलने में कठिनाई (गंभीर मामलों में)
  • ठंड में कमजोरी का बढ़ जाना

डॉ. नेहा के अनुसार 'कई बार मरीज समझते हैं कि यह उम्र या सामान्य कमजोरी की वजह से है, जबकि वास्तव में यह पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम हो सकता है। सही पहचान और फिजियोथेरेपीसे स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।'

इलाज और देखभाल

इस सिंड्रोम का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन कुछ कदम जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं—

  • फिजियोथेरेपी और हल्के व्यायाम- मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाए रखते हैं।
  • संतुलित जीवन शैली- पर्याप्त नींद और ऊर्जा संरक्षण के लिए दिनचर्या में ब्रेक लें।
  • चलने-फिरने में सहायक साधन- जैसे वॉकर, ऑर्थोटिक सपोर्ट या वीलचेयर से रोजमर्रा के काम आसान हो सकते हैं।
  • दर्द प्रबंधन- नियमित स्ट्रेचिंग, गर्म सिकाई और दर्द निवारक दवाओं से राहत मिल सकती है।

डॉ. नेगा कहती हैं कि 'यह जरूरी है कि पोलियो सर्वाइवर अपनी सेहत पर नजर रखें। किसी भी नई कमजोरी या दर्द को नजरअंदाज न करें और तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें। समय पर हस्तक्षेप से मांसपेशियों की गिरावट को काफी हद तक रोका जा सकता है।'

पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम हमें यह याद दिलाता है कि पोलियो का सफर केवल वायरस से लड़ने तक सीमित नहीं था—यह जीवन भर की जागरूकता की मांग करता है। सही देखभाल, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह से पोलियो सर्वाइवर आज भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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