पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

Polycystic Kidney Disease: जब किडनी में असामान्य रूप से सिस्ट बनने लगते हैं, तो यह स्थिति पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज कहलाती है। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

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Written By: priya mishra | Updated : August 29, 2025 12:30 PM IST

Polycystic Kidney Disease Symptoms: किडनी हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो रक्त को फिल्टर कर अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ बाहर निकालती है। लेकिन जब किडनी में असामान्य रूप से सिस्ट (थैलीनुमा संरचना जिसमें तरल भरा होता है) बनने लगते हैं, तो यह स्थिति पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (Polycystic Kidney Disease - PKD) कहलाती है। यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जो धीरे-धीरे किडनी के आकार और कार्य को प्रभावित करती है। समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव न किए जाएं तो यह स्थिति किडनी फेलियर तक भी पहुंचा सकती है। आज इस लेख में डॉ कमल कुमार कसवान, सीनियर कंसल्टेंट – नेफ्रोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर से जानते हैं पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज के लक्षण, प्रकार, कारण, उपचार और रोकथाम के उपाय -

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज के लक्षण – Symptoms Of Of Polycystic Kidney Disease In Hindi

शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई बार मरीज को बीमारी के बारे में देर से पता चलता है। जैसे-जैसे सिस्ट बढ़ते हैं, लक्षण नज़र आने लगते हैं:

  • पेट या पीठ में दर्द – बड़े या कई सिस्ट किडनी को भारी बना देते हैं, जिससे लगातार दर्द रह सकता है।
  • उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर)
  • बार-बार पेशाब आना या रात में पेशाब की समस्या
  • मूत्र में खून आना
  • किडनी स्टोन बनने की संभावना बढ़ना
  • बार-बार मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) – खासकर किडनी से जुड़ा संक्रमण
  • पेट का आकार बढ़ना – बड़ी किडनी या कई सिस्ट के कारण
  • थकान और शरीर में कमजोरी

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज के प्रकार – Types Of Polycystic Kidney Disease In Hindi

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:

1. ऑटोसोमल डॉमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज

  • इसे एडल्ट PKD भी कहा जाता है।
  • इसके लक्षण प्रायः 30 से 40 साल की उम्र में दिखाई देने लगते हैं।
  • यह सबसे आम प्रकार है और अधिकांश मामलों में इसकी पुष्टि होती है।
  • यदि माता या पिता में से किसी एक को यह बीमारी है, तो बच्चे में इसके होने की 50% संभावना होती है।

2. ऑटोसोमल रिसेसिव पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज

  • यह दुर्लभ और गंभीर प्रकार है।
  • लक्षण बचपन में ही, कभी-कभी जन्म से पहले भी दिखाई दे जाते हैं।
  • इसमें किडनी के अलावा लिवर को भी नुकसान पहुँच सकता है।
  • यदि माता-पिता दोनों में जीन दोष है, तभी बच्चे को यह बीमारी होती है।

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज के कारण – Causes Of Of Polycystic Kidney Disease In Hindi

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज का मुख्य कारण जीन में बदलाव (mutation) है। यह बीमारी अनुवांशिक है और पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है।

  • ADPKD का कारण PKD1 और PKD2 नामक जीन में बदलाव है।
  • ARPKD का कारण PKHD1 जीन में दोष है।
  • कभी-कभी यह बीमारी बिना पारिवारिक इतिहास के भी हो सकती है, जिसे स्पॉन्टेनियस म्यूटेशन कहा जाता है।

 पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से जुड़ी जटिलताएं

  • यदि इस बीमारी पर ध्यान न दिया जाए तो यह कई गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकती है:
  • क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और अंततः किडनी फेलियर।
  • हाई ब्लड प्रेशर से हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा।
  • किडनी में स्टोन या बार-बार इन्फेक्शन।
  • लिवर में भी सिस्ट बनने की संभावना।
  • दुर्लभ मामलों में मस्तिष्क की रक्त वाहिका में एन्यूरिज्म (फटने का खतरा)।

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज का निदान - Diagnosis Of Polycystic Kidney Disease In Hindi

PKD की पहचान के लिए डॉक्टर कई जांच करवाते हैं:

  1. अल्ट्रासाउंड – सबसे सामान्य और शुरुआती जांच।
  2. CT स्कैन या MRI – किडनी में सिस्ट की संख्या और आकार जानने के लिए।
  3. जेनेटिक टेस्ट – यह पुष्टि करने के लिए कि बीमारी अनुवांशिक है या नहीं।
  4. ब्लड और यूरिन टेस्ट – किडनी के कामकाज का आकलन करने के लिए।

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज का उपचार – Treatment Of Polycystic Kidney Disease In Hindi

अभी तक PKD का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके लक्षण और जटिलताओं को नियंत्रित कर मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।

  • ब्लड प्रेशर नियंत्रण – ACE inhibitors या ARBs जैसी दवाइयां दी जाती हैं।
  • दर्द निवारक दवाइयां – डॉक्टर की सलाह से ही लें।
  • संक्रमण का इलाज – UTI या किडनी संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक।
  • Tolvaptan नामक दवा – कुछ मामलों में सिस्ट की वृद्धि धीमी करने में मददगार।
  • डायलिसिस – जब किडनी काम करना बंद कर दे।
  • किडनी ट्रांसप्लांट – अंतिम और स्थायी विकल्प।

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से बचाव और रोकथाम - Prevention And Cure Of Polycystic Kidney Disease In Hindi

क्योंकि यह बीमारी मुख्य रूप से जेनेटिक है, इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन कुछ कदम उठाकर इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है:

  • ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें।
  • पानी पर्याप्त मात्रा में पियें और नमक का सेवन कम करें।
  • धूम्रपान और शराब से परहेज करें।
  • स्वस्थ और संतुलित आहार लें – ताज़े फल, सब्जियां, साबुत अनाज।
  • नियमित व्यायाम करें ताकि वजन और हार्ट हेल्थ ठीक रहे।
  • किडनी के लिए हानिकारक दवाओं (जैसे कुछ पेनकिलर) से बचें।
  • यदि परिवार में PKD का इतिहास है, तो जेनेटिक काउंसलिंग कराएं।

निष्कर्ष

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज एक गंभीर लेकिन संभालने योग्य स्थिति है। यह समझना जरूरी है कि शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। इसलिए यदि परिवार में किसी को यह बीमारी रही हो या हाई ब्लड प्रेशर और बार-बार किडनी संबंधी समस्याएं हों, तो समय रहते जांच करवाना बेहद ज़रूरी है। समय पर निदान, जीवनशैली में सुधार और चिकित्सक की सलाह से न केवल बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है, बल्कि मरीज एक सामान्य और स्वस्थ जीवन भी जी सकता है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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