
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : April 15, 2026 8:08 PM IST
Medically Verified By: Dr Rahul Chaudhari
Image credits by: what is pinched nerve and how it increases the risk of paralysis
Nas Dabne ke Karan: लोगों की खराब जीवनशैली को देखते हुए पीठ का दर्द एक आम समस्या बन चुकी है। बढ़ती उम्र में पेट का दर्द होना आम बात है, लेकिन इसके साथ-साथ लंबे समय तक बैठकर काम करना जैसे कि डेस्क जॉब या दुकानदार, गलत तरीके से वजन उठाना और एक्सरसाइज न करना आदि ये सभी कारण इस दर्द को बढ़ाते हैं। अक्सर लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और कहते हैं कि “थोड़ा ही दर्द है, आराम कर लेंगे तो ठीक हो जाएगा” लेकिन कई बार यही गंभीर समस्या की वजह बन जाती है। क्योंकि हर पीठ दर्द साधारण नहीं होता। कई बार यह नस दबना यानी पिंच्ड नर्व का संकेत होता है, जो समय रहते इलाज न मिलने पर पैरालिसिस यानी लकवा जैसी गंभीर स्थिति तक पहुंच सकता है। मणिपाल हॉस्पिटल, पुणे में कंसल्टेंट, स्पाइन सर्जन डॉ. राहुल चौधरी ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिनके बारे में हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं।
डॉक्टर राहुल के अनुसार रीढ़ की हड्डी यानी हमारी स्पाइन, सिर्फ हड्डियों का ढांचा नहीं है। बल्कि यह हमारे शरीर की मुख्य सपोर्ट सिस्टम है और इसके अंदर से गुजरने वाली नसें दिमाग और शरीर के बीच सिग्नल पहुंचाने का काम करती हैं। जब इन नसों पर किसी वजह से दबाव पड़ता है, तो शरीर तुरंत संकेत देना शुरू कर देता है। शुरुआत अक्सर कमर दर्द से होती है, जो धीरे-धीरे बढ़कर पैरों तक पहुंच सकता है।
पिंच्ड नर्व के सबसे बड़े कारणों में से एक स्लिप डिस्क है, जिसमें स्पाइन के बीच की डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है और इसके कारण इसका सीधा असर नस पर पड़ने लगता है। इसके अलावा भी नस दबने के कुछ अन्य कारण हो सकते हैं जैसे
डॉ. चौधरी के अनुसार शुरुआत में दर्द हल्का होता है, लेकिन समय के साथ यह तेज और लगातार होने लगता है। कई मरीज बताते हैं कि उन्हें कमर से लेकर पैर तक बिजली के झटके जैसा दर्द महसूस होता है, यह साइटिका का लक्षण है। यह दर्द सिर्फ दर्द नहीं होता, बल्कि यह संकेत होता है कि नस पर दबाव बढ़ रहा है। अगर इस स्टेज पर ध्यान दिया जाए, तो दवाइयों और फिजियोथेरेपी से राहत मिल सकती है। लेकिन अगर इसे अनदेखा किया जाए, तो समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
जब दर्द के साथ-साथ पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होने लगे, तो यह चेतावनी है। कुछ लोग कहते हैं कि चलते समय पैर भारी लगते हैं या संतुलन बिगड़ने लगता है। सीढ़ियां चढ़ना-उतरना मुश्किल हो जाता है। कई बार लंबे समय तक खड़े रहने पर पैर जवाब देने लगते हैं। ये सभी लक्षण संकेत देते हैं कि धीरे-धीरे स्थिति गंभीर हो रही है।
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लेकिन जब मरीज को पेशाब कंट्रोल करने में भी दिक्कत आने लगती है, तो यह सबसे गंभीर स्थिति का संकेत देता है। यह स्थिति बताती है कि स्पाइन के निचले हिस्से में नसों पर गंभीर दबाव है। यह एक इमरजेंसी कंडीशन है, जिसमें तुरंत सर्जरी करने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि अगर इस कंडीशन के बाद भी मरीज के इलाज में देरी हो रही है या फिर समय पर सर्जरी नहीं हो पाई है, तो इससे नस में परमानेंट डैमेज हो सकता है यानी नस में हुई क्षति को भी ठीक करना मुश्किल हो सकता है।
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