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Medically Verified By: Dr. Archana Dhawan Bajaj
पीसीओएस एक हार्मोनल डिसऑर्डर है। इसमें ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं और पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। बदलती जीवनशैली और तनाव, पीसीओएस के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। आजकल महिलाओं में पीसीओएस के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। खासकर, किशोरियों और युवा महिलाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खराब लाइफस्टाइल और तनाव को पीसीओएस का मुख्य कारण माना जाता है। पीसीओएस की वजह से शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं और इसकी वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होनी शुरू हो जाती हैं। इसलिए पीसीओएस के लक्षणों पर शुरुआत में गौर करना बहुत जरूरी है। अन्यथा, यह प्रजनन क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। आइए, नर्चर की स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन से जानते हैं पीसीओएस से जुड़ी जानकारी-
पीसीओएस के मामलों में तेजी से वृद्धि देखने को मिली है। इसके लिए कुछ कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
इसके अलावा, जेनेटिक कारण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। अगर आपके परिवार में किसी महिला को PCOS रहा हो, तो आपमें भी इसका खतरा बढ़ सकता है।
ज्यादातर लोगों को लगता है कि पीसीओएस सिर्फ प्रजनन से जुड़ी समस्या है। लेकिन, यह सिर्फ पीरियड्स या प्रेग्नेंसी तक सीमित नहीं है। जब पीसीओएस लंबे समय तक कंट्रोल में नहीं आता है, तो यह कई रोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
पीसीओएस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। लेकिन, सही डाइट और लाइफस्टाइल को फॉलो करके इसे काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।
स्ट्रेस को कम करना बहुत जरूरी होता है।
सही जानकारी, समय पर पहचान और लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके महिलाएं PCOS के साथ भी स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकती हैं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।