
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 8, 2026 12:14 PM IST
Medically Verified By: Dr. Amit Kumar Mandal
Image Credit- ChatGPT
Orthopnea Kya Hota Hai Or Iske Lakshan: कई लोगों को लेटते समय सांस फूलने सा महसूस होता है और ऐसा एक-दो बार नहीं, बल्कि रोजाना होता है। अगर आपको भी लेटते ही सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है और बैठने या तकिया ऊंचा करने पर राहत मिलती है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। इसे ऑर्थोपनिया कहा जाता है।
पारस हॉस्पिटल के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर अमित कुमार मंडल बताते हैं कि ‘यह खुद में कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, खासकर दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का।’ ऐसे में अगर आपको इस बीमारी के बारे में थोड़ी भी जानकारी नहीं है, तो आइए हम इसके, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से जानते हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि ऑर्थोपनिया एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति को बैड, सोफा या जमीन पर सीधे लेटने पर सांस फूलने लगती है। वहीं जैसे ही व्यक्ति बैठता है या सिर ऊंचा करके सोता है, तो सांस लेने में आराम मिलने लगता है। कई लोग इसे थकान समझ कर अनदेखा कर देते हैं। तो कुछ रात में अचानक सांस फूलने या बार-बार तकिया लगाकर सोने की जरूरत के रूप में महसूस करते हैं।
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अगर ऑर्थोपनिया के लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
डॉक्टर बताते हैं कि ‘हमारे पास अक्सर ऐसे बहुत से लोग आते हैं जिन्हें पता ही नहीं होता है कि उन्हें ऑर्थोपनिया की समस्या है। वह समझते हैं कि ऐसा दिनभर के काम करने और रेस्ट करने का समय न मिलने की वजह से हो रहा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है।’ आइए आपको ऑर्थोपनिया होने के कुछ आम कारणों के बारे में बताते हैं।
| ऑर्थोपनिया होने के कारण | विस्तार से समझें |
| 1. हार्ट फेल्योर | जब हार्ट सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों में तरल जमा होने लगता है। इसी की वजह से लेटते ही आपको चक्कर से आने लगते हैं। |
| 2. फेफड़ों की बीमारी | कभी-कभी अस्थमा, COPD या निमोनिया जैसी समस्याएं भी ऑर्थोपनिया का कारण बन सकती हैं। |
| 3. मोटापा | अगर आपका वजन अधिक है तो यह फेफड़ों पर दबाव डाल सकता है, इसलिए अपने वजन को कंट्रोल करें। |
| 4. स्लीप एपनिया | यह सोते समय सांस रुकने की समस्या होती है। |
| 5. एनीमिया या कमजोरी | जब शरीर में कमजोरी होती है या ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो ऑर्थोपनिया हो सकता है। |
डॉक्टर इस सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं कि 'हां, अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो ऑर्थोपनिया गंभीर हो सकता है। खासकर अगर इसका कारण हार्ट फेल्योर या फेफड़ों की बीमारी हो तो। लगातार सांस फूलना शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर सकता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई मामलों में यह इमरजेंसी की स्थिति भी बन सकती है।
डॉक्टर ने बताया कि ‘ऑर्थोपनिया का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। हम पेशेंट को कुछ टेस्ट जैसे एक्स-रे, ईसीजी, इको या ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।’ इलाज जिन कारणों पर निर्भर हो सकता है वह इस प्रकार हैं-
अगर समस्या शुरुआती स्तर पर हो, तो कुछ लाइफस्टाइल बदलाव राहत दे सकते हैं। जैसे आप सोते समय सिर थोड़ा ऊंचा रखें, रोज हल्की एक्सरसाइज करें, वजन कंट्रोल में रखें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखें, ज्यादा नमक और जंक फूड कम खाएं और साथ ही खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।
लेकिन साथ ही डॉक्टर कहते हैं कि सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं है। अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि जब आपको सांस लेने में अचानक बहुत ज्यादा दिक्कत महसूस होने लगे, सीने में दर्द हो, होंठ या उंगलियां नीली पड़ने लगें या तेज धड़कन और चक्कर आने लगे तो इसे इग्नोर न करें। ये संकेत गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर- ऑर्थोपनिया एक ऐसा लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह अक्सर दिल या फेफड़ों से जुड़ी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। समय पर जांच, सही इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। अगर आपको भी लेटते समय बार-बार सांस फूलती है, तो इसे सामान्य समस्या समझने की गलती न करें और डॉक्टर के पास जाएं।