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Written By: Jitendra Gupta | Updated : September 13, 2023 8:53 AM IST
कोरोनावायरस से कितना मिलता-जुलता है निपाह वायरस, जानिए दोनों वायरस के बीच कौन-कौन से लक्षण हैं समान
देश का दक्षिणी राज्य केरल इस समय केरल दो अलग-अलग वायरल संक्रमणों से लड़ रहा है। एक ओर जहां निपाह वायरस के कारण राज्य की स्थिति गंभीर बनी हुई है तो वही दूसरी ओर कोरोना वायरस के मामलों की संख्या में लगतार बढ़ोतरी देखी जा रही है। लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि ये दोनों वायरस प्रकृति में एक जैसे दिखाई देते हैं जबकि ये दोनो वायरस एक-दूसरे से बहुत अलग-अलग हैं। केरल में रविवार को निपाह वायरस के कारण 12 साल के एक बच्चे की मौत हो गई थी, जिसके बाद निपाह पीड़ित के संपर्क में आए 11 लोगों में भी इस बीमारी के लक्षण दिखे हैं। जिसकी पुष्टि खुद स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज कर चुके हैं। आइए जानते हैं कोरोनावायरस से कितना अलग है निपाह वायरस।
निपाह वायरस की मौजूदगी पहली बार मलेशिया में साल 1990 में देखी गई थी। जबकि भारत में यह वायरस पहली बार साल 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मिला था। उस समय इस वायरस से 45 लोगों की मौत भी हुई थी। इसके बाद केरल में 2018 में निपाह वायरस के मामले सामने आए। चिंता करने वाली बात यह है कि इस वायरस की मृत्यु दर 40-80 प्रतिशत है जबकि संक्रमित रहने की अवधि दो सप्ताह रह सकती है। इसके अलावा निपाह वायरस को एक जूनोटिक वायरस के रूप में जाना जाता है। जोकि जानवरों के जरिये मनुष्यों में फैलता है और खराब भोजन के माध्यम से या सीधे लोगों के बीच भी फैल सकता है। जो लोग इस वायरस से संक्रमित हो जाते हैं। उनमें तेज श्वसन रोग और घातक एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। खास बात यह है कि यह एक हवाई संक्रमण नहीं है यह वायरस चमगादड़ और सूअर से माध्य्म से फैलता है। यह संक्रमण सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि जानवरों के लिए भी घातक साबित होता है।
निपाह वायरस से संक्रमित लोग कोरोना संक्रमण के समान लक्षण दिखते हैं। इसके लक्षण में खांसी, गले में खराश, चक्कर आना, उनींदापन, मांसपेशियों में दर्द, थकान और मस्तिष्क की सूजन (एन्सेफलाइटिस), जिसके कारण सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, मानसिक भ्रम, दौरे और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता कुछ सामान्य लक्षण हैं। एक व्यक्ति बेहोश हो सकता है। जबकि कोरोना वायरस अधिक घातक है।
इस वायरस के लिए कोई सटीक उपचार नहीं है। लेकिन किसी को लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। साथ ही आरटी- पीसीआर, मस्तिष्कमेरु द्रव, मूत्र और रक्त परीक्षण की जांच करानी चाहिए। इसके बाद, ठीक होने के बाद, एंटीबॉडी के लिए परीक्षण कराना चाहिए है। साथ ही एन्सेफलाइटिस और अन्य लक्षणों की देखभाल के लिए डॉक्टर द्वारा दवाओं की सलाह दी जाती है। यह सलाह दी जाती है कि स्व-दवा न करें क्योंकि इससे जोखिम बढ़ सकता है और स्थिति खराब हो सकती है।